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जमीन उपलब्ध न होने से पाली सीएचसी का निर्माण अधर में
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पाली। जिले की पाली नगर पंचायत विकास के मामले में सबसे ज्यादा फिसड्डी है। पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण भू राजस्व नक्शा न मिलना है। इसके चलते नगर पंचायत की कीमती जमीन कितनी है इसकी कोई सही जानकारी नहीं है। जब भी नगर पंचायत को कोई लाभकारी सौगात मिलती है तो वह जमीन के अभाव में लटक कर रह जाती है। ऐसा ही कुछ पाली के लिए प्रस्तावित सीएचसी अस्पताल के साथ हो रहा है। अस्पताल के लिए जमीन उपलब्ध न हो पाने की वजह से प्रस्ताव अधर में लटका पड़ा है।
प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 1965 में ग्राम पाली को नगर पंचायत का दर्जा दिया गया। नगरवासी बताते हैं कि आज तक मालूम नहीं पड़ा कि कितने क्षेत्रफल को जोड़कर पाली को नगर पंचायत बनाया गया था। नगर पंचायत के कार्यालय में एक सूचना पट भी लगा है जिसमें लिखे क्षेत्रफल कालम के आगे जगह खाली पड़ी है। नगर में प्रथम चुनाव वर्ष 1971 में हुआ जिसमें महेंद्र सिंह बुंदेला प्रथम अध्यक्ष बने। इनके कार्यकाल समाप्त होने के बाद वर्ष 1987 तक नगर पंचायत की कमान प्रशासनिक अधिकारियों के बीच रही। 1988 में हुए चुनाव में विष्णु शंकर चौरसिया ने जीत दर्ज कर नगर की कमान संभाली, अपने पार्षदों के साथ नगर के विकास का खाका तैयार किया तो इसमें नगर पंचायत की सूचना रिपोर्ट परिसम्पत्ति रजिस्टर व भू राजस्व नक्शे की कमी आड़े आने लगी। पूर्व चेयरमैन मनोज कुमार राही, नंदकिशोर सोनी के कार्यकाल में अस्पताल की मांग ने काफी जोर पकड़ा। अस्पताल के लिए जमीन भी मुहैया कराई गई, लेकिन यह बन न सका।
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ये सौगातें चली गई पाली के हिस्से से
नगरवासी बताते हैं कि पाली को नवोदय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, ब्लॉक कार्यालय आदि सौगातें मिलीं थी, पर जमीन के अभाव में इन्हें दूसरी जगह भेज दिया गया। इसका मलाल आज भी कस्बावासियों को है।
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भूमिहीन है नगर पंचायत
पाली नगर पंचायत का कितना क्षेत्रफल है इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। लखनऊ सचिवालय में जाकर इसकी जानकारी भी मांगी गई लेकिन कोई रिकॉर्ड की जानकारी नहीं मिली। इस कारण नगर पंचायत अपंग बनी हुई है। केवल एक ही जानकारी मिलती कि 1965 में पाली को नगर पंचायत का दर्जा मिला।
चौरसिया समाज की धर्मशाला में चलता है अर्बन हेल्थ पोस्ट
तत्कालीन जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद ने अस्थायी व्यवस्था कर पाली में चौरसिया समाज की धर्मशाला में अर्बन हेल्थ पोस्ट शुरु कराया था जो एक संविदा कर्मी डॉक्टर व फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा है। लेकिन सुविधाओं के अभाव में लोग 25 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय जाने को मजबूर हैं। प्रदेश सरकार में श्रम सेवायोजन राज्य मंत्री मनोहर लाल पंथ के महरौनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पाली आता है इसके चलते लोगों को अस्पताल की आस जागी थी, लेकिन वह भी पाली में अस्पताल बनवाने के वादे को भूल गए।
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फोटो संख्या- 07
कैप्शन- रामकुमार चौरसिया
विधानसभा चुनाव के कुछ ही समय बाद लोकसभा के चुनाव में भी सत्ताधारी दल के नेताओं ने अस्पताल की स्थापना का आश्वासन दिया था, लेकिन चुनाव जीतने के बाद अस्पताल के निर्माण का वादा भूल गए।
- रामकुमार चौरसिया, चेयरमैन पाली
फोटो संख्या- 06
- कैप्शन- रामकुमारी संजीव कुमार
भू राजस्व नक्शा के अभाव में पाली का क्षेत्रफल ग्राम पंचायत से भी छोटा मालूम पड़ता है। पाली ग्रामीण को कस्बे की सीमा में शामिल किया जाए जिससे पाली में बनने वाली सीएचसी अस्पताल को जमीन मिल सके।
- रामकुमारी संजीव कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता
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प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 1965 में ग्राम पाली को नगर पंचायत का दर्जा दिया गया। नगरवासी बताते हैं कि आज तक मालूम नहीं पड़ा कि कितने क्षेत्रफल को जोड़कर पाली को नगर पंचायत बनाया गया था। नगर पंचायत के कार्यालय में एक सूचना पट भी लगा है जिसमें लिखे क्षेत्रफल कालम के आगे जगह खाली पड़ी है। नगर में प्रथम चुनाव वर्ष 1971 में हुआ जिसमें महेंद्र सिंह बुंदेला प्रथम अध्यक्ष बने। इनके कार्यकाल समाप्त होने के बाद वर्ष 1987 तक नगर पंचायत की कमान प्रशासनिक अधिकारियों के बीच रही। 1988 में हुए चुनाव में विष्णु शंकर चौरसिया ने जीत दर्ज कर नगर की कमान संभाली, अपने पार्षदों के साथ नगर के विकास का खाका तैयार किया तो इसमें नगर पंचायत की सूचना रिपोर्ट परिसम्पत्ति रजिस्टर व भू राजस्व नक्शे की कमी आड़े आने लगी। पूर्व चेयरमैन मनोज कुमार राही, नंदकिशोर सोनी के कार्यकाल में अस्पताल की मांग ने काफी जोर पकड़ा। अस्पताल के लिए जमीन भी मुहैया कराई गई, लेकिन यह बन न सका।
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ये सौगातें चली गई पाली के हिस्से से
नगरवासी बताते हैं कि पाली को नवोदय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, ब्लॉक कार्यालय आदि सौगातें मिलीं थी, पर जमीन के अभाव में इन्हें दूसरी जगह भेज दिया गया। इसका मलाल आज भी कस्बावासियों को है।
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भूमिहीन है नगर पंचायत
पाली नगर पंचायत का कितना क्षेत्रफल है इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। लखनऊ सचिवालय में जाकर इसकी जानकारी भी मांगी गई लेकिन कोई रिकॉर्ड की जानकारी नहीं मिली। इस कारण नगर पंचायत अपंग बनी हुई है। केवल एक ही जानकारी मिलती कि 1965 में पाली को नगर पंचायत का दर्जा मिला।
चौरसिया समाज की धर्मशाला में चलता है अर्बन हेल्थ पोस्ट
तत्कालीन जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद ने अस्थायी व्यवस्था कर पाली में चौरसिया समाज की धर्मशाला में अर्बन हेल्थ पोस्ट शुरु कराया था जो एक संविदा कर्मी डॉक्टर व फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा है। लेकिन सुविधाओं के अभाव में लोग 25 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय जाने को मजबूर हैं। प्रदेश सरकार में श्रम सेवायोजन राज्य मंत्री मनोहर लाल पंथ के महरौनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पाली आता है इसके चलते लोगों को अस्पताल की आस जागी थी, लेकिन वह भी पाली में अस्पताल बनवाने के वादे को भूल गए।
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फोटो संख्या- 07
कैप्शन- रामकुमार चौरसिया
विधानसभा चुनाव के कुछ ही समय बाद लोकसभा के चुनाव में भी सत्ताधारी दल के नेताओं ने अस्पताल की स्थापना का आश्वासन दिया था, लेकिन चुनाव जीतने के बाद अस्पताल के निर्माण का वादा भूल गए।
- रामकुमार चौरसिया, चेयरमैन पाली
फोटो संख्या- 06
- कैप्शन- रामकुमारी संजीव कुमार
भू राजस्व नक्शा के अभाव में पाली का क्षेत्रफल ग्राम पंचायत से भी छोटा मालूम पड़ता है। पाली ग्रामीण को कस्बे की सीमा में शामिल किया जाए जिससे पाली में बनने वाली सीएचसी अस्पताल को जमीन मिल सके।
- रामकुमारी संजीव कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता