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अच्छे महापुरुषों से मिलने का साधन हमारी पुस्तकें: मुनि विनम्र सागर
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संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में मुनि विनम्र सागर महाराज ने कहा, दुनिया के सबसे अच्छे महापुरुषों से मिलने का साधन हमारी पुस्तकें हैं, क्योंकि महापुरुषों ने या तो शास्त्र लिखे हैं या उनके ऊपर शास्त्र लिखे गए हैं। पंचकल्याणक गजरथ के बाद रविवार को मुनि ससंघ ने जनपद सागर के लिए विहार किया। जैन समाज के लोगों ने उन्हें विदाई दी।
मुनिश्री ने कहा कि स्त्री-पुरुष, भोजन, अर्थ और राज कथाओं में हमारे जीवन का महत्वपूर्ण समय निकल रहा है, जिन्हें आचार्य ने विकथा कहा है। लेकिन, जिसकी हमें चर्चा करनी चाहिए उस वीतरागिता पर किसी का ध्यान नहीं है कि तीर्थंकर का वैभव कैसा था। उन्होंने कहा कि विकथा नहीं, हमें तीर्थंकर की प्रभावना करनी चाहिए। जिसकी हमने आराधना की है उसके बारे में पूर्ण जानकारी करें, सपरिवार उनके कल्याणक मनाएं। ग्रंथों का स्वाध्याय करें, तीर्थंकर का गुण वैभव परिवार को परिचित कराएं। साधना से पहले शरीर और फिर शरीर से आत्मा को साधो। जीवन केवल धन कमाने के लिए नहीं है, क्या आप अपनी संपत्ति का पूर्ण उपयोग कर पाएंगे, संचय का सुख तो है, लेकिन उपयोग का सुख नहीं है क्योंकि पुण्य की शक्ति नहीं है। पौराणिक ग्रंथों को जीवंत करो, तीर्थंकरों के बारे में जानो तब जिनालयों के निर्माण की सार्थकता है। परिवार में सामूहिक स्वाध्याय से वात्सल्य बढ़ता है।
इससे पहले मुनि विनम्र सागर महाराज के साथ मुनि निस्वार्थ सागर, मुनि निर्मद सागर, मुनि निसर्ग सागर, मुनि श्रमण सागर एवं क्षुल्लक हीरक सागर के सानिध्य में चौबीसी के भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी का सामूहिक अभिषेक शांतिधारा पूजन एवं विधान का आयोजन किया गया। अष्ट द्रव्य को सुसज्जित कर आचार्य श्री का पूजन किया गया। दोपहर में मुनि संघ का सागर के लिए विहार हुआ तो नगर वासियों ने भजन गाते हुए नम आंखों से विहार कराया। मुनि ससंघ ने रात में प्राथमिक विद्यालय नवीन तेरई में विश्राम किया, जहां बांसी जैन समिति ने श्रीफल भेंट किया। इस दौरान महावीर जैन, यशपाल मोदी, अजय, राकेश, गौतम मोदी, रंजीत जैन, सौरभ पवैया, आकाश चौधरी, विशाल पवा, अभिषेक, शिटिल, सिद्धार्थ, सागर आदि मौजूद रहे।
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तालबेहट। पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में मुनि विनम्र सागर महाराज ने कहा, दुनिया के सबसे अच्छे महापुरुषों से मिलने का साधन हमारी पुस्तकें हैं, क्योंकि महापुरुषों ने या तो शास्त्र लिखे हैं या उनके ऊपर शास्त्र लिखे गए हैं। पंचकल्याणक गजरथ के बाद रविवार को मुनि ससंघ ने जनपद सागर के लिए विहार किया। जैन समाज के लोगों ने उन्हें विदाई दी।
मुनिश्री ने कहा कि स्त्री-पुरुष, भोजन, अर्थ और राज कथाओं में हमारे जीवन का महत्वपूर्ण समय निकल रहा है, जिन्हें आचार्य ने विकथा कहा है। लेकिन, जिसकी हमें चर्चा करनी चाहिए उस वीतरागिता पर किसी का ध्यान नहीं है कि तीर्थंकर का वैभव कैसा था। उन्होंने कहा कि विकथा नहीं, हमें तीर्थंकर की प्रभावना करनी चाहिए। जिसकी हमने आराधना की है उसके बारे में पूर्ण जानकारी करें, सपरिवार उनके कल्याणक मनाएं। ग्रंथों का स्वाध्याय करें, तीर्थंकर का गुण वैभव परिवार को परिचित कराएं। साधना से पहले शरीर और फिर शरीर से आत्मा को साधो। जीवन केवल धन कमाने के लिए नहीं है, क्या आप अपनी संपत्ति का पूर्ण उपयोग कर पाएंगे, संचय का सुख तो है, लेकिन उपयोग का सुख नहीं है क्योंकि पुण्य की शक्ति नहीं है। पौराणिक ग्रंथों को जीवंत करो, तीर्थंकरों के बारे में जानो तब जिनालयों के निर्माण की सार्थकता है। परिवार में सामूहिक स्वाध्याय से वात्सल्य बढ़ता है।
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इससे पहले मुनि विनम्र सागर महाराज के साथ मुनि निस्वार्थ सागर, मुनि निर्मद सागर, मुनि निसर्ग सागर, मुनि श्रमण सागर एवं क्षुल्लक हीरक सागर के सानिध्य में चौबीसी के भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी का सामूहिक अभिषेक शांतिधारा पूजन एवं विधान का आयोजन किया गया। अष्ट द्रव्य को सुसज्जित कर आचार्य श्री का पूजन किया गया। दोपहर में मुनि संघ का सागर के लिए विहार हुआ तो नगर वासियों ने भजन गाते हुए नम आंखों से विहार कराया। मुनि ससंघ ने रात में प्राथमिक विद्यालय नवीन तेरई में विश्राम किया, जहां बांसी जैन समिति ने श्रीफल भेंट किया। इस दौरान महावीर जैन, यशपाल मोदी, अजय, राकेश, गौतम मोदी, रंजीत जैन, सौरभ पवैया, आकाश चौधरी, विशाल पवा, अभिषेक, शिटिल, सिद्धार्थ, सागर आदि मौजूद रहे।
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