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Lalitpur News: मेडिकल कॉलेज में महज एक स्त्री रोग विशेषज्ञ
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- छुट्टी पर जाने से गर्भवती महिलाओं को होती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में जिला चिकित्सालय को उच्चीकृत कर मेडिकल काॅलेज में तब्दील तो कर दिया है, लेकिन अब तक चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हो सकी है। छह स्त्री रोग विशेषज्ञ के सापेक्ष महज एक ही चिकित्सक कार्यरत है। ऐसे में चिकित्सक के अवकाश पर जाने से सीजर प्रसव की समस्या हो जाती है। वहीं, सीमित समय में ही उपचार मिल पा रहा है।
जिले में महिला अस्पताल के समय से ही चिकित्सकों की कमी बनी हुई थी। इससे सीजर प्रसव में समस्या बनी रहती है। इसके बाद जब मेडिकल कॉलेज में स्थापित हुआ, तब चिकित्सकों की कमी पूर्ण होने की उम्मीद जगी थी।
लेकिन, एनएमसी की मान्यता को एक वर्ष बीतने के बाद भी महिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी पूरी नहीं हो सकी है। छह विशेषज्ञ चिकित्सकों के सापेक्ष महज एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। वहीं, चार ईएमओ के पदों के सापेक्ष महज एक ही कार्यरत हैं। ऐसे में अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा बना हुआ है। इकलौती विशेषज्ञ चिकित्सक के अवकाश पर जाने से समस्या हो जाती है। साथ ही ओपीडी में भी आने वाली गर्भवती महिलाओं को सामान्य चिकित्सकों से उपचार मिल पा रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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प्रतिदिन उपचार को पहुंच रहीं 300 से अधिक महिलाएं
मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 300 गर्भवती समेत अन्य महिलाएं उपचार को आ रही हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में भी 50 से 60 महिलाएं आती हैं। इसके अलावा 24 घंटे में 20 से अधिक प्रसव होते हैं। इससे अस्पताल में अधिक भीड़ जुटती है।
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विशेषज्ञ चिकित्सकों व ईएमओ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर चयन किया जाएगा।
- डॉ. गजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में जिला चिकित्सालय को उच्चीकृत कर मेडिकल काॅलेज में तब्दील तो कर दिया है, लेकिन अब तक चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हो सकी है। छह स्त्री रोग विशेषज्ञ के सापेक्ष महज एक ही चिकित्सक कार्यरत है। ऐसे में चिकित्सक के अवकाश पर जाने से सीजर प्रसव की समस्या हो जाती है। वहीं, सीमित समय में ही उपचार मिल पा रहा है।
जिले में महिला अस्पताल के समय से ही चिकित्सकों की कमी बनी हुई थी। इससे सीजर प्रसव में समस्या बनी रहती है। इसके बाद जब मेडिकल कॉलेज में स्थापित हुआ, तब चिकित्सकों की कमी पूर्ण होने की उम्मीद जगी थी।
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लेकिन, एनएमसी की मान्यता को एक वर्ष बीतने के बाद भी महिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी पूरी नहीं हो सकी है। छह विशेषज्ञ चिकित्सकों के सापेक्ष महज एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। वहीं, चार ईएमओ के पदों के सापेक्ष महज एक ही कार्यरत हैं। ऐसे में अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा बना हुआ है। इकलौती विशेषज्ञ चिकित्सक के अवकाश पर जाने से समस्या हो जाती है। साथ ही ओपीडी में भी आने वाली गर्भवती महिलाओं को सामान्य चिकित्सकों से उपचार मिल पा रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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प्रतिदिन उपचार को पहुंच रहीं 300 से अधिक महिलाएं
मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 300 गर्भवती समेत अन्य महिलाएं उपचार को आ रही हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में भी 50 से 60 महिलाएं आती हैं। इसके अलावा 24 घंटे में 20 से अधिक प्रसव होते हैं। इससे अस्पताल में अधिक भीड़ जुटती है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों व ईएमओ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर चयन किया जाएगा।
- डॉ. गजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज