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आज 700 टीबी मरीजों को गोद लेंगे अधिकारी और समाजसेवी
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ललितपुर। वर्ष 2025 तक देश को टीबी से मुक्ति दिलाने लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार काम कर रही हैं। इसके लिए विभाग के साथ ही विभिन्न विभागों के अधिकारी, निजी चिकित्सक व सामाजिक संस्थाएं भी आगे आ रहीं हैं। इसके चलते बृहस्पतिवार को जिले के 700 क्षय रोगियों को गोद लिया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जीपी शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी से मुक्ति दिलाना है। लक्ष्य को समुदाय का साथ लेकर आसानी से हासिल किया जा सकता है। इसके लिए हम सभी को संकल्पित होना होगा। टीबी का इलाज संभव है। यदि टीबी के लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सीय परामर्श प्राप्त कर अपने बलगम की जांच करवाएं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जेएस बक्शी ने बताया कि टीबी रोग को अन्य कई नाम से जाना जाता है। इसे प्रारंभिक अवस्था में ही नही रोका गया तो जानलेवा साबित होता है। यह व्यक्ति को धीरे-धीरे मारता है। दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, वजन कम होना, यह सभी टीबी के लक्षण हैं। जिले में वर्ष 2018 में 3000, वर्ष 2019 में 3600, वर्ष 2020 में 2950, वर्ष 2021 में 3196 टीबी से ग्रसित मरीज तलाशे गए थे। टीबी से ग्रसित मरीजों की स्क्रीनिंग में सरकारी कर्मियों के साथ प्राइवेट संस्थानों ने भी सहयोग किया है।
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जिला कार्यक्रम समन्वयक शिवराम ने बताया कि जिला व ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों, चिकित्सक व स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा क्षय रोगियों को गोद लेने की प्रक्रिया जिलाधिकारी के माध्यम से अपनाई जा रही है। टीबी के इलाज में छह माह तक दवाई लेना जरूरी है।
समाजसेवियों के सहयोग से जल्द ठीक हुए मरीज
गत वर्ष क्षय रोग से ग्रसित शून्य से अठारह वर्ष की आयु वर्ग के 35 बच्चों को जिला, ब्लॉक स्तरीय व स्वयं सेवी संस्थाओं ने गोद लिया गया था। जिम्मेदारों ने गोद लिए बच्चों का समय- समय पर मरीजों के घर पहुंचकर हालचाल जाना और उन्हें पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया। इससे बच्चों की बीमारी जल्द ठीक हो गई। बीते महीने जिले के भ्रमण पर आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने टीबी से ग्रसित बच्चों का संपूर्ण इलाज, जांच व फॉलोअप कराने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों से कहा था। इस बार गोद लेने की प्रक्रिया में आयु की बंदिश समाप्त कर दी गई है। अब कोई अधिकारी, चिकित्सक, सामाजिक संस्था किसी भी उम्र व कितनी ही संख्या में क्षय रोगी को गोद ले सकता है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जीपी शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी से मुक्ति दिलाना है। लक्ष्य को समुदाय का साथ लेकर आसानी से हासिल किया जा सकता है। इसके लिए हम सभी को संकल्पित होना होगा। टीबी का इलाज संभव है। यदि टीबी के लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सीय परामर्श प्राप्त कर अपने बलगम की जांच करवाएं।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जेएस बक्शी ने बताया कि टीबी रोग को अन्य कई नाम से जाना जाता है। इसे प्रारंभिक अवस्था में ही नही रोका गया तो जानलेवा साबित होता है। यह व्यक्ति को धीरे-धीरे मारता है। दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, वजन कम होना, यह सभी टीबी के लक्षण हैं। जिले में वर्ष 2018 में 3000, वर्ष 2019 में 3600, वर्ष 2020 में 2950, वर्ष 2021 में 3196 टीबी से ग्रसित मरीज तलाशे गए थे। टीबी से ग्रसित मरीजों की स्क्रीनिंग में सरकारी कर्मियों के साथ प्राइवेट संस्थानों ने भी सहयोग किया है।
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जिला कार्यक्रम समन्वयक शिवराम ने बताया कि जिला व ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों, चिकित्सक व स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा क्षय रोगियों को गोद लेने की प्रक्रिया जिलाधिकारी के माध्यम से अपनाई जा रही है। टीबी के इलाज में छह माह तक दवाई लेना जरूरी है।
समाजसेवियों के सहयोग से जल्द ठीक हुए मरीज
गत वर्ष क्षय रोग से ग्रसित शून्य से अठारह वर्ष की आयु वर्ग के 35 बच्चों को जिला, ब्लॉक स्तरीय व स्वयं सेवी संस्थाओं ने गोद लिया गया था। जिम्मेदारों ने गोद लिए बच्चों का समय- समय पर मरीजों के घर पहुंचकर हालचाल जाना और उन्हें पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया। इससे बच्चों की बीमारी जल्द ठीक हो गई। बीते महीने जिले के भ्रमण पर आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने टीबी से ग्रसित बच्चों का संपूर्ण इलाज, जांच व फॉलोअप कराने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों से कहा था। इस बार गोद लेने की प्रक्रिया में आयु की बंदिश समाप्त कर दी गई है। अब कोई अधिकारी, चिकित्सक, सामाजिक संस्था किसी भी उम्र व कितनी ही संख्या में क्षय रोगी को गोद ले सकता है।