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अब डाकिये पहुंचाएंगे टीबी मरीजों के सैंपल
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ललितपुर। राज्य सरकार द्वारा अब एक मई से सभी जिलो में टीबी मरीजों के सैंपल लैब तक पहुंचाने का काम डाकियों से लिया जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक टीबी रोग के खात्मे का संकल्प लिया गया है और इसके लिए यह योजना शुरु की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2025 तक देश से क्षय रोग यानि टीबी के खात्मे के संकल्प को तय समय सीमा से पहले पूरा करने को लेकर योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसी के तहत राज्य क्षय रोग विभाग और भारतीय डाक विभाग में विधिवत करार हुआ है, जिससे पहली मई से प्रदेश के सभी 75 जिलों में टीबी मरीजों का सैंपल लैब तक पहुंचाने का काम अब डाकिया करेंगे। इससे पहले यह सैंपल कोरियर से भेजे जाते थे, जिससे रोगियों की पहचान और इलाज शुरू होने में विलंब होता था। इस करार के साथ ही उत्तर प्रदेश इस नई व्यवस्था को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है ।
इस करार के अंतर्गत प्रदेश के करीब 2300 अधिकृत टीबी जांच केंद्रों (डीएसटी) से 24 घंटे के अंदर 142 सीबीनाट मशीन सेंटर तक सैंपल पहुंचाने का काम डाक विभाग करेगा। इसके साथ ही 142 सीबीनाट मशीन सेंटर से प्रदेश के आठ जिलों (लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर और इटावा) में स्थित ड्रग कल्चर सेंसटिविटी टेस्ट सेंटर तक 48 घंटे के अंदर सैंपल पहुंचाने का काम करेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ, आगरा, बदायूं और चंदौली जिले में पहले चरण में यह कार्यक्रम चलाया गया था। उस दौरान मिली सफलता के आधार पर अब पहली मई से यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में मूर्त रूप लेने जा रही है।
टीबी मरीजों के मामले में सबसे बड़ी चुनौती जल्द से जल्द जांच कराने की होती है, क्योंकि एक टीबी मरीज अनजाने में न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है। इस करार के बाद सैंपल की जांच में तेजी आएगी और जांच रिपोर्ट आते ही जल्द से जल्द उनका इलाज शुरू कर दिया जाएगा। इससे संक्रमण का खतरा कम रहेगा।
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- डा. जेएस बख्शी, जिला क्षय रोग अधिकारी
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इस करार के अंतर्गत प्रदेश के करीब 2300 अधिकृत टीबी जांच केंद्रों (डीएसटी) से 24 घंटे के अंदर 142 सीबीनाट मशीन सेंटर तक सैंपल पहुंचाने का काम डाक विभाग करेगा। इसके साथ ही 142 सीबीनाट मशीन सेंटर से प्रदेश के आठ जिलों (लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर और इटावा) में स्थित ड्रग कल्चर सेंसटिविटी टेस्ट सेंटर तक 48 घंटे के अंदर सैंपल पहुंचाने का काम करेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ, आगरा, बदायूं और चंदौली जिले में पहले चरण में यह कार्यक्रम चलाया गया था। उस दौरान मिली सफलता के आधार पर अब पहली मई से यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में मूर्त रूप लेने जा रही है।
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टीबी मरीजों के मामले में सबसे बड़ी चुनौती जल्द से जल्द जांच कराने की होती है, क्योंकि एक टीबी मरीज अनजाने में न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है। इस करार के बाद सैंपल की जांच में तेजी आएगी और जांच रिपोर्ट आते ही जल्द से जल्द उनका इलाज शुरू कर दिया जाएगा। इससे संक्रमण का खतरा कम रहेगा।
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- डा. जेएस बख्शी, जिला क्षय रोग अधिकारी