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अब बर्बाद नहीं होगा गोविंद सागर और शहजाद बांध की नहर का पानी
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शहजाद बांध
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। विश्व बैंक की जल संचयन योजना के तहत फेज-3 में जिले के गोविंद सागर बांध और शहजाद बांध की नहरों को चयनित किया गया है। दोनों बांध की नहरों का 165 करोड़ की लागत से आधुनिकीकरण होगा। जिससे सीपेज, लीकेज के जरिए होने वाली पानी की बर्बादी को रोका जाएगा। साथ ही जो पानी बचाया जाएगा, उससे सिंचित क्षेत्र भी बढे़गा और किसानों को फायदा होगा।
गोविंद सागर बांध व शहजाद बांध के निर्माण को 50 वर्ष से अधिक समय हो चुका है। निर्माण के समय से ही दोनों बांधों से सिंचाई परियोजना के लिए नहरों का निर्माण कराया गया था। गोविंद सागर बांध से निकलीं छोटी और बड़ी नहर की लंबाई 190.09 किलोमीटर है। जबकि शहजाद बांध से 116.60 किलोमीटर लंबी नहर बनाई गई थी। यह नहरें कच्ची हैं। इन नहरों के जरिए किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। गोविंद सागर बांध की नहरें शहर की घनी आबादी के बीच से होकर गुजरती हैं।
काफी पुरानी होने के कारण अब यह जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी हैं। इसके चलते नहरों में पानी छोड़ेे जाने से लीकेज और सीपेज हो जाने से काफी पानी बर्बाद हो जाता है। जिससे छोड़ा गया पानी नहर के आखिरी छोर तक नहीं पहुंच पाता और किसानों को मायूस होना पड़ता है। लेकिन अब इस समस्या से छुटकारा मिलने की संभावना है। विश्व बैंक की जल संचयन योजनांतर्गत फेज-थ्री के तहत गोविंद सागर बांध व शहजाद बांध की नहरों को चयनित किया गया है। इन दोनों ही बांधों की नहरों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इन नहरों को आरसीसी किया जाएगा। साथ ही आबादी वाले क्षेत्रों से नहरों में कचरा न आए, इसके लिए उन्हें ऊपर से कवर किया जाएगा। सिंचाई विभाग ने इन दोनों बांधों की नहरों का विवरण उच्चाधिकारियों को पहुंचा दिया है। गोविंद सागर बांध की नहर पर 110 करोड़ रुपये व शहजाद बांध की नहर पर 55 करोड़ रुपये खर्च करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रक्रिया अपने अंतिम दौर में चल रही है। इसके बाद इसका सर्वे होगा और एस्टीमेट तैयार किया जाएगा। एक से दो माह के अंदर ही इस योजना के मूर्तरूप लेने की संभावना है। साथ ही इसी वित्तीय वर्ष में योजना के शुरू होने का अनुमान है।
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पक्के गूल का भी होगा निर्माण
दोनों बांधों से निकली नहरों के आधुनिकीकरण के बाद गूल को भी पक्का किया जाएगा। क्योंकि अभी तक यह गूल कच्चे होने के चलते खुर्दबुर्द हो चुके हैं। कहीं कहीं तो यह गूल अपना अस्तित्व ही खो चुके हैं। पक्के गूल का निर्माण होने से पानी की बर्बादी काफी हद तक रुक जाएगी।
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सड़क का भी होगा निर्माण
नहरों का आधुनिकीकरण किए जाने के साथ साथ उन स्थानों पर सड़क भी डाली जाएगी। जहां पर इसकी आवश्यकता होगी। यह सड़कें ज्यादा लंबी न होकर कुछेक मीटर लंबाई की होगी।
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बांध के नाम - नहरों की लंबाई - सिंचाई की क्षमता
गोविंद सागर बांध - 190.09 किमी - 10820 हेक्टेयर
शहजाद बांध - 116.60 किमी - 14403 हेक्टेयर
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विश्व बैंक की जल संचयन योजनांतर्गत फेज-3 में जनपद के गोविंद सागर बांध व शहजाद बांध की नहरों चयनित किया गया है। इन दोनों ही बांधों की नहरों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। -इं. मनमोहन, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड
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गोविंद सागर बांध व शहजाद बांध के निर्माण को 50 वर्ष से अधिक समय हो चुका है। निर्माण के समय से ही दोनों बांधों से सिंचाई परियोजना के लिए नहरों का निर्माण कराया गया था। गोविंद सागर बांध से निकलीं छोटी और बड़ी नहर की लंबाई 190.09 किलोमीटर है। जबकि शहजाद बांध से 116.60 किलोमीटर लंबी नहर बनाई गई थी। यह नहरें कच्ची हैं। इन नहरों के जरिए किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। गोविंद सागर बांध की नहरें शहर की घनी आबादी के बीच से होकर गुजरती हैं।
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काफी पुरानी होने के कारण अब यह जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी हैं। इसके चलते नहरों में पानी छोड़ेे जाने से लीकेज और सीपेज हो जाने से काफी पानी बर्बाद हो जाता है। जिससे छोड़ा गया पानी नहर के आखिरी छोर तक नहीं पहुंच पाता और किसानों को मायूस होना पड़ता है। लेकिन अब इस समस्या से छुटकारा मिलने की संभावना है। विश्व बैंक की जल संचयन योजनांतर्गत फेज-थ्री के तहत गोविंद सागर बांध व शहजाद बांध की नहरों को चयनित किया गया है। इन दोनों ही बांधों की नहरों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इन नहरों को आरसीसी किया जाएगा। साथ ही आबादी वाले क्षेत्रों से नहरों में कचरा न आए, इसके लिए उन्हें ऊपर से कवर किया जाएगा। सिंचाई विभाग ने इन दोनों बांधों की नहरों का विवरण उच्चाधिकारियों को पहुंचा दिया है। गोविंद सागर बांध की नहर पर 110 करोड़ रुपये व शहजाद बांध की नहर पर 55 करोड़ रुपये खर्च करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रक्रिया अपने अंतिम दौर में चल रही है। इसके बाद इसका सर्वे होगा और एस्टीमेट तैयार किया जाएगा। एक से दो माह के अंदर ही इस योजना के मूर्तरूप लेने की संभावना है। साथ ही इसी वित्तीय वर्ष में योजना के शुरू होने का अनुमान है।
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पक्के गूल का भी होगा निर्माण
दोनों बांधों से निकली नहरों के आधुनिकीकरण के बाद गूल को भी पक्का किया जाएगा। क्योंकि अभी तक यह गूल कच्चे होने के चलते खुर्दबुर्द हो चुके हैं। कहीं कहीं तो यह गूल अपना अस्तित्व ही खो चुके हैं। पक्के गूल का निर्माण होने से पानी की बर्बादी काफी हद तक रुक जाएगी।
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सड़क का भी होगा निर्माण
नहरों का आधुनिकीकरण किए जाने के साथ साथ उन स्थानों पर सड़क भी डाली जाएगी। जहां पर इसकी आवश्यकता होगी। यह सड़कें ज्यादा लंबी न होकर कुछेक मीटर लंबाई की होगी।
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बांध के नाम - नहरों की लंबाई - सिंचाई की क्षमता
गोविंद सागर बांध - 190.09 किमी - 10820 हेक्टेयर
शहजाद बांध - 116.60 किमी - 14403 हेक्टेयर
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विश्व बैंक की जल संचयन योजनांतर्गत फेज-3 में जनपद के गोविंद सागर बांध व शहजाद बांध की नहरों चयनित किया गया है। इन दोनों ही बांधों की नहरों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। -इं. मनमोहन, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड