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लोधी मतों का ध्रुवीकरण न होना बना भाजपा की जीत का कारण
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ललितपुर। लोधी मतों का ध्रुवीकरण नहीं होना भाजपा के लिए बड़ी जीत का कारण बना। भाजपा और सपा पार्टी में दावेदारी कर रहे समाज के एक नेता का टिकट कटने से समाज पार्टी से खफा था। हालांकि सपा ने गंभीरता देखते हुए कैलाश यादव को चुनाव के दौरान जिलाध्यक्ष पद से हटाकर ज्योति सिंह लोधी को पार्टी की बागडोर थमा कर लोधी मतदाता को साधने की कोशिश की। लेकिन वह काम नहीं आई।
उधर भाजपा से दावेदारी कर रहे लोधी समाज के नेता गंदर्भ सिंह लोधी को टिकट नहीं मिलने पर समर्थकों ने भाजपा छोड़ने का दबाव बनाया, लेकिन उन्होंने भाजपा का साथ नहीं छोड़ा और दोनों ही क्षेत्रों के प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में जुट गए। उसी का नतीजा रहा कि लोधी मतदाताओं ने भाजपा का साथ नहीं छोड़ा और दोनों ही सीटों पर भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाकर पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा कायम रखी।
जिले की दो विधानसभा सीटों पर करीब एक लाख लोधी मतदाता किसी भी प्रत्याशी की हार-जीत में अहम माना जाता है। भाजपा ने लोधी मतदाताओं को साधने की जिम्मेदारी गंदर्भ सिंह लोधी को सौंपते हुए मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की दोनों विधानसभा क्षेत्रों में सभा कराकर लोधी मतों को लामबंद किया।
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इधर, सपा ने लोधी मतदाताओं की नाराजगी दूर करने के लिए कैलाश यादव को हटाकर ज्योति सिंह लोधी को जिलाध्यक्ष बना दिया। इस फैसले से सपा का एक खेमा तो खुश हो गया, लेकिन दूसरा खेमा संतुष्ट नजर नहीं आया। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष ज्योति सिंह लोधी ने संगठन के साथ ही चुनाव प्रचार में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया लेकिन जो परिणाम आए उससे यही लगता है कि लोधी मतदाताओं ने अपनी निष्ठा नहीं बदली। उसका लाभ भाजपा को मिला। जिससे पिछले चुनाव से अधिक वोट दोनों ही प्रत्याशियों को मिले।
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उधर भाजपा से दावेदारी कर रहे लोधी समाज के नेता गंदर्भ सिंह लोधी को टिकट नहीं मिलने पर समर्थकों ने भाजपा छोड़ने का दबाव बनाया, लेकिन उन्होंने भाजपा का साथ नहीं छोड़ा और दोनों ही क्षेत्रों के प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में जुट गए। उसी का नतीजा रहा कि लोधी मतदाताओं ने भाजपा का साथ नहीं छोड़ा और दोनों ही सीटों पर भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाकर पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा कायम रखी।
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जिले की दो विधानसभा सीटों पर करीब एक लाख लोधी मतदाता किसी भी प्रत्याशी की हार-जीत में अहम माना जाता है। भाजपा ने लोधी मतदाताओं को साधने की जिम्मेदारी गंदर्भ सिंह लोधी को सौंपते हुए मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की दोनों विधानसभा क्षेत्रों में सभा कराकर लोधी मतों को लामबंद किया।
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इधर, सपा ने लोधी मतदाताओं की नाराजगी दूर करने के लिए कैलाश यादव को हटाकर ज्योति सिंह लोधी को जिलाध्यक्ष बना दिया। इस फैसले से सपा का एक खेमा तो खुश हो गया, लेकिन दूसरा खेमा संतुष्ट नजर नहीं आया। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष ज्योति सिंह लोधी ने संगठन के साथ ही चुनाव प्रचार में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया लेकिन जो परिणाम आए उससे यही लगता है कि लोधी मतदाताओं ने अपनी निष्ठा नहीं बदली। उसका लाभ भाजपा को मिला। जिससे पिछले चुनाव से अधिक वोट दोनों ही प्रत्याशियों को मिले।