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ताजिए नहीं हुए सुपुर्दे ख़ाक, घरों में रहकर की इवादत
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नदीपुरा में ताजियादार जानू अली रज्जब अली यूनुस अली
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। कोरोना महामारी की वजह से इस बार मोहर्रम पर ताजिया और जुलूस निकाले जाने पर रोक लगा दी गई है। प्रदेश सरकार ने मोहर्रम को लेकर अपनी गाइड लाइन जारी कर दी है। इस बार मोहर्रम पर जुलूस और ताजिया निकालने पर पाबंदी की वजह से घर की चौकियों पर ताजिये रखकर सादगी से फातिहा व सेहराबंदी की रस्में अदा की गईं। शहर में ताजियादारों ने घर पर ही करीब साठ ताजिये और बुर्राक बनाए हैं, जिसमें 15 ताजिये 10 फीट के तथा शेष ताजिये और बुर्राक तीन से पांच फीट के बनाए गए हैं। हालांकि इससे पूर्व हर वर्ष 15 से 20 फुट ऊंचाई के ताजिये बनाए जाते थे।
इस्लामिक नया साल मोहर्रम माह की पहली तारीख से शुरू हो चुका है। लेकिन इसका जश्न नहीं मनाया जाता है। मोहर्रम की दसवीं तारीख वह दिन है जब इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब (सअ) के नाती हजरत इमाम हुसैन अपने परिवार और 72 साथियों के साथ कर्बला की जंग में शहीद हो गए थे।
शहादतनामा और मर्सिया पढ़ी
मुस्लिम समुदाय के लोगों ने घरों पर ही रहकर इबादत की। महिलाएं और बच्चियां भी शहादत नामा और मरसिया पढ़ीं। रोजे रखकर भी खुदा की इबादत की जा रही है यह रोजे अनिवार्य यानी जरूरी नहीं हैं, लेकिन मुहर्रम के रोजों का बहुत सवाब है।
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कोरोना की वजह से शासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए इस मोहर्रम पर जुलूस नहीं निकाला गया और न ही कर्बला में ताजिये सुपुर्द-ए-खाक किए गए। शासन की अनुमति मिलेगी तो कर्बला में ताजिये और बुर्राक सुपुर्द-ए-खाक किए जाएंगे। रमजान अली (दादा), ताजिया यूनियन अध्यक्ष
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इस्लामिक नया साल मोहर्रम माह की पहली तारीख से शुरू हो चुका है। लेकिन इसका जश्न नहीं मनाया जाता है। मोहर्रम की दसवीं तारीख वह दिन है जब इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब (सअ) के नाती हजरत इमाम हुसैन अपने परिवार और 72 साथियों के साथ कर्बला की जंग में शहीद हो गए थे।
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शहादतनामा और मर्सिया पढ़ी
मुस्लिम समुदाय के लोगों ने घरों पर ही रहकर इबादत की। महिलाएं और बच्चियां भी शहादत नामा और मरसिया पढ़ीं। रोजे रखकर भी खुदा की इबादत की जा रही है यह रोजे अनिवार्य यानी जरूरी नहीं हैं, लेकिन मुहर्रम के रोजों का बहुत सवाब है।
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कोरोना की वजह से शासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए इस मोहर्रम पर जुलूस नहीं निकाला गया और न ही कर्बला में ताजिये सुपुर्द-ए-खाक किए गए। शासन की अनुमति मिलेगी तो कर्बला में ताजिये और बुर्राक सुपुर्द-ए-खाक किए जाएंगे। रमजान अली (दादा), ताजिया यूनियन अध्यक्ष

अजीतापुरा में फातिहा पढ़ते जब्बार खान- फोटो : LALITPUR

फातिहा पढ़ते जानू अली नदीपुरा- फोटो : LALITPUR