{"_id":"29add9519c9edea57cd3db075c4ecf9d","slug":"no-medicine-no-remedy-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"न दवाइयां, न इलाज की व्यवस्था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न दवाइयां, न इलाज की व्यवस्था
ललितपुर / ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2015 12:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डायबिटीज, हार्टअटैक व कैंसर रोगियों के इलाज के लिए जिला चिकित्सालय में संचालित एनसीडी (नान कम्युनिकेबिल डिसीज) सेल का कैंसर रोगियों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। जनपद में सत्तर से अधिक कैंसर रोगियों के परिवार महानगरों में उपचार कराकर बर्बाद हो चुके हैं, पर सरकारी सहायता के नाम पर उन्हें एक धेला भी नहीं मिला है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर से होने वाली मौतों की चौंकाने वाली रिपोर्ट को देखते हुए बीमारी से उपचार के लिए केंद्र सरकार ने देश के सौ जनपदों में नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रीवेंसन एण्ड कंट्रोल आफ कैंसर, डायबिटीज, सीवीडी एंड स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) के तहत एनसीडी सेल खोलने का निर्णय लिया था, जिसमें जनपद भी शामिल है। तीन वर्ष पूर्व जिला चिकित्सालय में सेल की स्थापना कर दी गई, जिसमें स्टॉफ नर्स, डाटा एंट्री ऑपरेटर, पैथालॉजिस्ट, पैथालॉजिस्ट टेक्नीशियन एवं फिजियोथैरेपिस्ट आदि स्टाफ संविदा पर रखा गया, लेकिन विशेषज्ञों की भर्तियां अब तक नहीं की गईं, जिससे जनपद के कैंसर रोगियों के लिए यह सेल महज छलावा साबित हो रही है।
गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों के निशुल्क उपचार व देखभाल के लिए काम कर रही संस्था एचबीएम हास्पिटल के पेलेटिव केयर डिपार्टमेंट के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनपद में 70 से अधिक मरीज कैंसर से ग्रसित हैं। शहरी क्षेत्र में इनकी संख्या 18 है। यह तो वे मरीज हैं, जिनको इस संस्था ने ढूंढ निकाला है और उनकी मदद भी कर रही है। इनके अलावा कई गरीब मरीज ऐसे भी हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति कैंसर की जांच कराने की भी नहीं है। इन हालातों में एनसीडी में कैं सर रोगियों के मुफ्त इलाज का दावा बेमानी साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि अस्पताल में हार्टअटैक, डायबिटीज, ब्लड शुगर आदि की दवाइयां बांटने के अलावा और कोई काम नहीं होता है। कैंसर पीड़ित रोगियों को अब तक कोई उपचार नहीं मिल सका है।
विज्ञापन
घट गया दवाइयों का बजट
योजना के संचालन के साथ प्रत्येक कैंसर रोगी के लिए एक लाख रुपये की दवाइयाें के बजट का प्रावधान किया गया था, लेकिन मौजूदा वित्तीय वर्ष में पूरे सेल के संचालन के लिए महज तीन लाख रुपये की दवाइयों का बजट जारी किया गया है, जिसमें डायबिटीज व ब्लड प्रेशर संबंधी दवाइयां ही बांटी जा रही हैं, उसमें भी अनेक पात्र लाभार्भियों को निराशा हाथ लग रही है।
हर साल होती हैं आठ लाख मौतें
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार देश में 28 लाख से अधिक लोग कैंसर से ग्रसित हैं। आठ लाख मरीजों की मौत प्रतिवर्ष होती है। एक लाख की आबादी में करीब 21.3 लोग सर्विकल कैंसर, 17.1 ब्रेस्ट कैंसर व 11.8 ओरल कैंसर से ग्रसित हैं। रिपोर्ट के अनुसार 57 प्रतिशत पुरुष एवं 10.8 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू के सेवन के कारण कैंसर का शिकार बनते हैं।
इनका कहना है -
‘विशेषज्ञों की कमी और बजट के अभाव में कैंसर रोगियों को इलाज और दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। इस संबंध में नई गाइड लाइन जारी होने की उम्मीद है, उसके बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।’
- डा. मुकेश चंद्र दुबे
नोडल अधिकारी, एनसीडी सेल।
विज्ञापन
विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर से होने वाली मौतों की चौंकाने वाली रिपोर्ट को देखते हुए बीमारी से उपचार के लिए केंद्र सरकार ने देश के सौ जनपदों में नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रीवेंसन एण्ड कंट्रोल आफ कैंसर, डायबिटीज, सीवीडी एंड स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) के तहत एनसीडी सेल खोलने का निर्णय लिया था, जिसमें जनपद भी शामिल है। तीन वर्ष पूर्व जिला चिकित्सालय में सेल की स्थापना कर दी गई, जिसमें स्टॉफ नर्स, डाटा एंट्री ऑपरेटर, पैथालॉजिस्ट, पैथालॉजिस्ट टेक्नीशियन एवं फिजियोथैरेपिस्ट आदि स्टाफ संविदा पर रखा गया, लेकिन विशेषज्ञों की भर्तियां अब तक नहीं की गईं, जिससे जनपद के कैंसर रोगियों के लिए यह सेल महज छलावा साबित हो रही है।
विज्ञापन
गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों के निशुल्क उपचार व देखभाल के लिए काम कर रही संस्था एचबीएम हास्पिटल के पेलेटिव केयर डिपार्टमेंट के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनपद में 70 से अधिक मरीज कैंसर से ग्रसित हैं। शहरी क्षेत्र में इनकी संख्या 18 है। यह तो वे मरीज हैं, जिनको इस संस्था ने ढूंढ निकाला है और उनकी मदद भी कर रही है। इनके अलावा कई गरीब मरीज ऐसे भी हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति कैंसर की जांच कराने की भी नहीं है। इन हालातों में एनसीडी में कैं सर रोगियों के मुफ्त इलाज का दावा बेमानी साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि अस्पताल में हार्टअटैक, डायबिटीज, ब्लड शुगर आदि की दवाइयां बांटने के अलावा और कोई काम नहीं होता है। कैंसर पीड़ित रोगियों को अब तक कोई उपचार नहीं मिल सका है।
विज्ञापन
घट गया दवाइयों का बजट
योजना के संचालन के साथ प्रत्येक कैंसर रोगी के लिए एक लाख रुपये की दवाइयाें के बजट का प्रावधान किया गया था, लेकिन मौजूदा वित्तीय वर्ष में पूरे सेल के संचालन के लिए महज तीन लाख रुपये की दवाइयों का बजट जारी किया गया है, जिसमें डायबिटीज व ब्लड प्रेशर संबंधी दवाइयां ही बांटी जा रही हैं, उसमें भी अनेक पात्र लाभार्भियों को निराशा हाथ लग रही है।
हर साल होती हैं आठ लाख मौतें
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार देश में 28 लाख से अधिक लोग कैंसर से ग्रसित हैं। आठ लाख मरीजों की मौत प्रतिवर्ष होती है। एक लाख की आबादी में करीब 21.3 लोग सर्विकल कैंसर, 17.1 ब्रेस्ट कैंसर व 11.8 ओरल कैंसर से ग्रसित हैं। रिपोर्ट के अनुसार 57 प्रतिशत पुरुष एवं 10.8 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू के सेवन के कारण कैंसर का शिकार बनते हैं।
इनका कहना है -
‘विशेषज्ञों की कमी और बजट के अभाव में कैंसर रोगियों को इलाज और दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। इस संबंध में नई गाइड लाइन जारी होने की उम्मीद है, उसके बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।’
- डा. मुकेश चंद्र दुबे
नोडल अधिकारी, एनसीडी सेल।