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प्रकृति के मनोहारी दृश्य की एक झलक पाने को बेताब रहते सैलानी

Mon, 28 Sep 2020 12:52 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2020 12:52 AM IST
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natural beautiful bundelkhand
नाराहट में स्थित चण्डी मंदिर का जलप्रपात - फोटो : LALITPUR
डोंगराखुर्द/ललितपुर। जनपद की विंध्य पर्वत की शृंखलाओं में फैली हरियाली और उसके बीच बह रहे जलप्रपात हर किसी को आकर्षित करते हैं, हालांकि, रास्ते दुर्गम होने से यहां पहुंचना आसान नहीं होता है। यदि आवागमन सुगम हो जाएं तो सैलानियों का मेला लगा रहेगा। कई तो रास्ते ठीक नहीं होने के कारण मनमसोस कर रह जाते हैं।
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कस्बा नाराहट से महज पांच किलोमीटर का रास्ता तय करने के उपरांत दौलतपुर गांव के पास चंडी मंदिर का दर्शन व समीप जलप्रप्रात का आनंद लिया जा सकता है। इसका दूसरा रास्ता मध्यप्रदेश के अटा गांव से होकर भी जाता है। चंडी मंदिर के जलप्रपात तक पहुंचने के लिए दोनों ही रास्ते बारिश में बड़े ही दुर्गम हो जाते हैं लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठाने के लिए लोग इन कठिन रास्तों को भी नापते हुए मौके पर पहुंच जाते हैं। वर्तमान में चंडी मंदिर अब शानदार पिकनिक स्पॉट बनता जा रहा है। यहां का जलप्रपात लगभग 30 फीट चौड़ा व 20 फीट की ऊंचाई से गिरता है। इसका बहता पानी नाराहट तालाब की गोद में गिरकर यहां की वसुंधरा को हरा-भरा करता है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य काफी मनोहारी है। चंडी माता मंदिर नाराहट का झरना इस मौसम में देखते ही बनता है।
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3 माह ही बहता है झरना...
इस जल प्रपात का सौंदर्य 3 माह ही रहता है। इसका कारण यह है कि मध्य प्रदेश में होने वाली बारिश का पानी ही इस प्रपात में पहुंचता है। इस पानी पर ही प्रपात निर्भर है। यहां का सौंदर्य देखकर ऐसा लगता है कि जैसे किसी दूसरी दुनिया में आ गये हों, न वाहनों का कोलाहल न ही प्रदूषण। केवल हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना ही सामने नजर आता है। माता का मंदिर होने के साथ ही जलप्रपात है। यहां एक कुंड है जिसमें वर्ष भर पानी बना रहता है। जंगली जीव अक्सर देखने को मिल जाते हैं जो यहां इस कुंड में आकर अपनी प्यास बुझाते हैं।
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अमझरा घाटी स्थित हनुमान मंदिर से थोड़ा आगे जाने पर एक कुंड मिलता है, जिसमें से निकलकर 12 महीने पानी बहता रहता है। यह झरना पत्थर व चट्टानों के बीच से होकर गुजरता है। मान्यता है कि जब राम लक्ष्मण सीता वनवास के लिए निकले थे, तब मां जानकी को प्यास लगी थी, तब लक्ष्मण जी ने उनकी प्यास बुझाने के लिए इस जगह अपने धनुष से तीर मारा था, जिससे पानी का फव्वारा निकल उठा था। सीता माता ने अपनी प्यास इसी पानी से बुझाई थी। बरसात के समय यहां का दृश्य मनमोहक होता है।
नाराहट क्षेत्र में जंगलों के बीच दर्जनों पर्यटन स्थल मौजूद है लेकिन वहां पहुंचने के लिए सुगम रास्ते नहीं हैं। इसके अतिरिक्त इन क्षेत्रों का प्रचार प्रसार भी नहीं हो पा रहा है, फिर भी सैलानी बड़ी संख्या में पहुंच कर पर्यटन स्थलों का आनंद उठाते हैं।
भूप्रताप सिंह बुन्देला ङोगरा खुर्द।
बांध व नदी, तालाबों की संख्या में अधिक है, जो कि जल क्रीड़ा वाले खेलों के लिए उपयुक्त हैं। सैकड़ों मील घने जंगल, बड़ी चट्टाने, प्राकृतिक झरने, जंगली पशु पक्षी, प्राचीन मंदिर सैर और फिल्मांकन के लिए पर्यटकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं।
रवि कुशवाहा ।
अमझरा घाटी पर पहाडों के बीच से निकला झरने का जल स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्य वर्धक होता है यहां पर आने बाले लोग जल ग्रहण करते हैं और पात्रों में भरकर अपने साथ ले जाते हैं।

विक्रम शाह रावसाहब नाराहट
पटना गांव के जंगल में भी एक जलप्रपात हैं लेकिन लोगों को इसकी जानकारी कम है इसलिए देखने के लिए लोग कम पहुंचते हैं और एक कुंङ भी है जिसमें पूरे साल भर पानी भरा रहता है।-शैलेन्द्र दुबे पटना

पटना के जंगल का जलप्रपात

पटना के जंगल का जलप्रपात- फोटो : LALITPUR

अमझरा घाटी का झरना

अमझरा घाटी का झरना- फोटो : LALITPUR

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