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संग्रहालय में धूल खा रहीं प्राचीन प्रतिमाएं
Tue, 16 Apr 2019 01:02 AM IST
Pragyan dubey
lalitpur
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Published by: Pragyan dubey
Updated Tue, 16 Apr 2019 01:02 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
ललितपुर। मोहल्ला नेहरू नगर में प्राचीन धरोहरों को सहेजने के लिए बनाए पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में रखीं प्राचीन प्रतिमाएं धूल खा रही हैं। दीवारें चटख रहीं हैं, पेयजल और शौचालय के इंतजाम नहीं है। ऐतिहासिक स्थलों से लाकर रखी गईं मूर्तियों की पहचान के लिए कोई रिकॉर्ड ही नहीं है और न ही मूर्तियों का कोई इतिहास ही सहेजा गया है। यहां तैनात गार्डों द्वारा मात्र गिनती कर प्रतिमाओं की सुरक्षा की जा रही है।
जनपद में विभिन्न प्राचीन महत्व के स्थलों से अस्तित्व खो रही संपदाओं को सहेजने के लिए करीब 20 वर्ष पूर्व नेहरू नगर में पुरातत्व संग्रहालय का निर्माण किया गया था। इसके निर्माण में उस समय लाखों रुपये की लागत आई थी। पुरातत्व विभाग द्वारा संग्रहालय में विभिन्न स्थलों ग्राम कुचदों, बानपुर समेत अन्य क्षेत्रों में निकली प्राचीन मूर्तियों को लाकर रखकर सहेजा गया और उनकी पहचान के लिए विभाग द्वारा शुरुआत में मूर्तियों के सामने उनके नाम और सदी का उल्लेख किया गया। लेकिन, जैसे-जैसे समय बढ़ता गया, संग्रहालय की ओर अफसरों का ध्यान कम होता गया। आज स्थिति यह है कि पुरातत्व संग्रहालय में रखी बेशकीमती पुरा संपदा धूल खा रही है। न तो उनका रखरखाव ठीक से किया जा रहा है और न ही यहां समय से सफाई या अन्य मरम्मत आदि के कार्य ही किए जा रहे हैं। यह धरोहर धूल में गुम होती जा रही हैं। इनकी पहचान के लिए उनके सामने रखी नाम पट्टिकाएं भी गायब हो गई हैं, जिससे पहचान करना और उनकी सदी व इतिहास जानना मुश्किल हो गया है। पुरातत्व संग्रहालय में बिजली व्यवस्था के नाम पर मात्र गार्ड रूम में बल्व लगा है। संग्रहालय की दीवारें और जमीन पर सीमेंट का फर्श कई जगह से चटख गया है। यहां पहुंचने वाले गिने-चुने लोगों के लिए भी पेयजल और शौचालय आदि का इंतजाम नहीं है।
हालांकि, पूर्व में विभाग द्वारा यहां पेयजल व्यवस्था के लिए बोरिंग कराई गई थी और शौचालय निर्माण भी कराया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव में बोरिंग की मोटर खराब पड़ी रहती है, जबकि शौचालय उपयोगी नहीं होने के कारण बंद रहता है। जिससे यहां आने वाले लोग सिर्फ धूल चढ़ी मूर्तियां देखकर वापस चले जाते हैं। गार्ड के अलावा यहां कोई कर्मचारी या अधिकारी नहीं होने के कारण पुरातत्व संग्रहालय की हालत बदतर बनी रहती है। संग्रहालय में छठवीं से लेकर 11वीं और 12वीं शताब्दी तक की करीब 130 मूर्तियां संग्रहीत हैं।
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शासन से बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण संग्रहालय की मरम्मत का कार्य नहीं हो पा रहा है। प्रतिमाओं की नाम पट्टिकाएं बनवाकर रखने के निर्देश दिए गए हैं। सफाई और अन्य कार्यों के लिए शासन को प्रस्ताव रिमांड किया जाएगा।
- एसके दुबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी
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जनपद में विभिन्न प्राचीन महत्व के स्थलों से अस्तित्व खो रही संपदाओं को सहेजने के लिए करीब 20 वर्ष पूर्व नेहरू नगर में पुरातत्व संग्रहालय का निर्माण किया गया था। इसके निर्माण में उस समय लाखों रुपये की लागत आई थी। पुरातत्व विभाग द्वारा संग्रहालय में विभिन्न स्थलों ग्राम कुचदों, बानपुर समेत अन्य क्षेत्रों में निकली प्राचीन मूर्तियों को लाकर रखकर सहेजा गया और उनकी पहचान के लिए विभाग द्वारा शुरुआत में मूर्तियों के सामने उनके नाम और सदी का उल्लेख किया गया। लेकिन, जैसे-जैसे समय बढ़ता गया, संग्रहालय की ओर अफसरों का ध्यान कम होता गया। आज स्थिति यह है कि पुरातत्व संग्रहालय में रखी बेशकीमती पुरा संपदा धूल खा रही है। न तो उनका रखरखाव ठीक से किया जा रहा है और न ही यहां समय से सफाई या अन्य मरम्मत आदि के कार्य ही किए जा रहे हैं। यह धरोहर धूल में गुम होती जा रही हैं। इनकी पहचान के लिए उनके सामने रखी नाम पट्टिकाएं भी गायब हो गई हैं, जिससे पहचान करना और उनकी सदी व इतिहास जानना मुश्किल हो गया है। पुरातत्व संग्रहालय में बिजली व्यवस्था के नाम पर मात्र गार्ड रूम में बल्व लगा है। संग्रहालय की दीवारें और जमीन पर सीमेंट का फर्श कई जगह से चटख गया है। यहां पहुंचने वाले गिने-चुने लोगों के लिए भी पेयजल और शौचालय आदि का इंतजाम नहीं है।
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हालांकि, पूर्व में विभाग द्वारा यहां पेयजल व्यवस्था के लिए बोरिंग कराई गई थी और शौचालय निर्माण भी कराया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव में बोरिंग की मोटर खराब पड़ी रहती है, जबकि शौचालय उपयोगी नहीं होने के कारण बंद रहता है। जिससे यहां आने वाले लोग सिर्फ धूल चढ़ी मूर्तियां देखकर वापस चले जाते हैं। गार्ड के अलावा यहां कोई कर्मचारी या अधिकारी नहीं होने के कारण पुरातत्व संग्रहालय की हालत बदतर बनी रहती है। संग्रहालय में छठवीं से लेकर 11वीं और 12वीं शताब्दी तक की करीब 130 मूर्तियां संग्रहीत हैं।
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शासन से बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण संग्रहालय की मरम्मत का कार्य नहीं हो पा रहा है। प्रतिमाओं की नाम पट्टिकाएं बनवाकर रखने के निर्देश दिए गए हैं। सफाई और अन्य कार्यों के लिए शासन को प्रस्ताव रिमांड किया जाएगा।
- एसके दुबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी