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मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का बच्चों को दिलाएं लाभ
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ललितपुर। कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी ने कोविड-19 महामारी से प्रभावित महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण एवं पुर्नवासन के लिए जनपद स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक बच्चों को चिह्नित कर योजना से लाभान्वित करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि खंड विकास अधिकारी और उप जिलाधिकारी दो दिवस में आवेदनों का सत्यापन कर जिला प्रोबेशन कार्यालय में भिजवाएं।
सुरेन्द्र कुमार पटेल जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा बताया गया कि कोविड-19 महामारी से प्रभावित/अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण एवं पुर्नवासन हेतु महिला कल्याण विभाग द्वारा उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना‘ का संचालन किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य कोविड-19 महामारी के कारण जोखिम में आने वाले ऐसे सभी बच्चे जिनके माता/पिता या दोनों की कोविड-19 के महामारी के संक्रमण/प्रभाव से मृत्यु हो गई है एवं इन बच्चों के कोई करीबी अभिभावक न हो या होने के बाद भी वह उन्हें अपनाना न चाहे या अपनाने में समक्ष न हो, ऐसे बच्चों के भरण-पोषण, शिक्षा, चिकित्सा आदि की व्यवस्था हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान करना है।
उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अन्तर्गत विभिन्न विभागों के माध्यम से बच्चों का चिह्नीकरण किया गया हैं, जिसमें 24 बच्चों के आवेदन पत्रों को संबंधित खंड विकास अधिकारी/उप जिलाधिकारियो से सत्यापन प्राप्त कर लिया गया है, जिसका अनुमोदन समिति द्वारा किया गया है। इनमें से 23 आवेदन पत्रों को पूर्ण कराकर सत्यापन हेतु संबंधित खंड विकास अधिकारी/उप जिलाधिकारियों को भेज दिया गया है।10 वर्ष की आयु के बच्चों के वैध संरक्षक के बैंक खाते में चार हजार रुपये प्रति माह की धनराशि देय होगी।
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कक्षा 6 से कक्षा 12 तक शिक्षा हेतु अटल आवासीय विद्यालयों तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवेश कराया जाएगा। 11 से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों की कक्षा 12 तक की निशुल्क शिक्षा हेतु अटल आवासीय विद्यालयों तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवेश कराया जाएगा। विद्यालयों की 3 महीने की अवकाश अवधि हेतु बच्चे की देखभाल हेतु प्रति माह चार हजार रुपये की दर से प्रति वर्ष कुल रुपये 12000/-की धनराशि प्रतिवर्ष वैध संरक्षक जिसकी अभिरक्षा में बच्चा हो, के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी। बैठक में डॉ. दिनेश गर्ग मुख्य चिकित्साधिकारी, रवीन्द्र वीर मुख्य विकास अधिकारी, पुष्पा वर्मा जिला कार्यक्रम अधिकारी, कैलाश अग्रवाल, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, ममता श्रीवास प्रभारी सेन्टर मैनेजर, वन स्टॉप सेन्टर आदि उपस्थित रहे।
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सुरेन्द्र कुमार पटेल जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा बताया गया कि कोविड-19 महामारी से प्रभावित/अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण एवं पुर्नवासन हेतु महिला कल्याण विभाग द्वारा उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना‘ का संचालन किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य कोविड-19 महामारी के कारण जोखिम में आने वाले ऐसे सभी बच्चे जिनके माता/पिता या दोनों की कोविड-19 के महामारी के संक्रमण/प्रभाव से मृत्यु हो गई है एवं इन बच्चों के कोई करीबी अभिभावक न हो या होने के बाद भी वह उन्हें अपनाना न चाहे या अपनाने में समक्ष न हो, ऐसे बच्चों के भरण-पोषण, शिक्षा, चिकित्सा आदि की व्यवस्था हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान करना है।
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उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अन्तर्गत विभिन्न विभागों के माध्यम से बच्चों का चिह्नीकरण किया गया हैं, जिसमें 24 बच्चों के आवेदन पत्रों को संबंधित खंड विकास अधिकारी/उप जिलाधिकारियो से सत्यापन प्राप्त कर लिया गया है, जिसका अनुमोदन समिति द्वारा किया गया है। इनमें से 23 आवेदन पत्रों को पूर्ण कराकर सत्यापन हेतु संबंधित खंड विकास अधिकारी/उप जिलाधिकारियों को भेज दिया गया है।10 वर्ष की आयु के बच्चों के वैध संरक्षक के बैंक खाते में चार हजार रुपये प्रति माह की धनराशि देय होगी।
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कक्षा 6 से कक्षा 12 तक शिक्षा हेतु अटल आवासीय विद्यालयों तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवेश कराया जाएगा। 11 से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों की कक्षा 12 तक की निशुल्क शिक्षा हेतु अटल आवासीय विद्यालयों तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवेश कराया जाएगा। विद्यालयों की 3 महीने की अवकाश अवधि हेतु बच्चे की देखभाल हेतु प्रति माह चार हजार रुपये की दर से प्रति वर्ष कुल रुपये 12000/-की धनराशि प्रतिवर्ष वैध संरक्षक जिसकी अभिरक्षा में बच्चा हो, के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी। बैठक में डॉ. दिनेश गर्ग मुख्य चिकित्साधिकारी, रवीन्द्र वीर मुख्य विकास अधिकारी, पुष्पा वर्मा जिला कार्यक्रम अधिकारी, कैलाश अग्रवाल, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, ममता श्रीवास प्रभारी सेन्टर मैनेजर, वन स्टॉप सेन्टर आदि उपस्थित रहे।