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जंगलों से पेड़ों की विभिन्न विलुप्त हो रही प्रजातियों पर जाहिर की गई चिंता

Sat, 14 Mar 2020 01:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2020 01:03 AM IST
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Missing many cast of tree from lalitpur forest
जाखलौन( ललितपुर)। वन एवं पर्यावरण प्रेमियों की बैठक में कस्बे के जंगलों से पेड़ों की विलुप्त हो रही विभिन्न प्रजातियों पर चिंता जाहिर की गई। वक्ताओं ने कहा कि यदि इन्हें संरक्षण नही दिया गया तो इस क्षेत्र से इनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।लगातार तेजी से समाप्त हो रहे जंगलों और कई प्रजातियों के पेड़ पौधों के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट पर चिंता व्यक्त की गई।इस अवसर पर बोलते हुए केपीएस महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 राजेन्द्र प्रकाश ने बताया कि हमारी संस्कृति और सभ्यता ऋषियों मुनियों के जंगलों में स्थित आश्रमों से संचालित होती रही है ।वनों से हमें जीवन यापन के लिए जड़ी बूटियों के साथ साथ बहुत से खाद्य और ओषधीय उत्पाद मिलते रहते थे। मानव के भौतिक वादी स्वभाव ने इन जंगलों के तेजी से दोहन तो किया परंतु उनके संरक्षण पर ध्यान नही दिया नतीजतन आज हमें तरह तरह की बीमारियों का शिकार होना पड़ रहा है।आशीष रावत ने बताया कि वनों से प्राप्त उत्पाद जैसे महुआ,अचार,तेंदू,बेर ,आंवला,बहेड़ा,मूसली हमारे जीवन और भोजन की दिन चर्या का अभिन्न अंग थे जो हमें कई बीमारियों से सुरक्षित रखते थे ।आज उनसे दूरी का परिणाम है कि हम कई घातक और जानलेवा बीमारियों का शिकार हो रहे है।सुरेश प्रकाश कौंतेय ने कहा कि हमारे क्षेत्र के जंगलों से मेवा में प्रयोग होने वाली अचार की चिरौंजी के साथ साथ कई प्रजातियों के अस्तित्व को गंभीर संकट पैदा हो गया है ।जिस अचार के पेड़ से चिरौंजी उत्पन्न होती है उस प्रजाति के नए पेड़ तैयार नही हो रहे क्योंकि उनके फलों को पूरी तरह से तोड़ लिया जाता है जिससे न तो उनका प्रकीर्णन हो पाता है और न ही नए पौधे तैयार हो रहे है पुराने पेड़ तेजी से समाप्त हो रहे है यदि इनको संरक्षण नही दिया गया तो बहुत जल्दी ये प्रजाति समाप्त होने की कगार पर है।वृक्षारोपण के नाम पर हर साल भारी भरकम धन राशि खर्च कर ऐसे पौधों का रोपण किया जाता है जो उपयोगी ही नही होते। उन्होंने बहेड़ा,आंवला,कत्था,( खैर),सेमल की पौध तैयार किये जाने की मांग उठाई है। अचार, बहेड़ा,आंवला,सेमल,तेंदू एवं कत्थे के पेड़ों की प्रजातियां बड़ी तेजी से इस क्षेत्र के जंगलों से समाप्त हो रही है। वन विभाग से इनकी पौध तैयार करवाकर इनका रोपण करवाने की मांग की गई।पर्यावरण प्रेमी अवध बिहारी पटेरिया ने वनों को संरक्षित करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में जिला पंचायत सदस्य बंशीधर श्रीवास बन्शी बाबू,श्याम बिहारी कौशिक,आशीष चौरसिया,नरेंद्र ताम्रकार, महेश रिछारिया,ललित लोकवाणी आकाशवाणी प्रबंधक पंकज तिवारी मौजूद रहे।अध्यक्षता पंकज तिवारी और संचालन महेश रिछारिया ने किया।
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