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Lalitpur News: मंत्री जी... यहां लापरवाही के वेंटीलेटर पर 16 लाख आबादी की सेहत
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ललितपुर। उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक आज शहर में हैं। ललितपुर सहित पूरे बुंदेलखंड की स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खस्ता है। कहने को तो जिले की करीब 16 लाख की आबादी के जिला चिकित्सालय व महिला चिकित्सालय के अलावा छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। लेकिन निजी डॉक्टरों और दलालों के चंगुल में मरीज और तीमारदार पिसने को मजबूर हैं। सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत यह है कि डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से मरीजों को महंगे अस्पतालों में इलाज कराना पड़ता है। यही नहीं, सरकारी अस्पतालों में मशीनें धूल फांक रही हैं।
जिले में 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 198 उपस्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। जिला अस्पताल में 38 चिकित्सकों के सापेक्ष 19 चिकित्सक, महिला अस्पताल में 15 के सापेक्ष तीन चिकित्सक, सीएचसी-पीएचसी में 81 के सापेक्ष 40 चिकित्सक तैनात है। इस प्रकार से कुल स्वीकृत 134 चिकित्सकों के सापेक्ष महज 62 चिकित्सक ही तैनात हैं। इतना ही नहीं पैरामेडिकल स्टाफ के साथ वार्ड बॉय तक नहीं हैं।
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फोटो-08
ट्रामा सेंटर में चल रही इमरजेंसी
राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को 24 घंटे इलाज देने के लिए लाखों रुपये की लागत से ट्रामा सेंटर की इमारत तैयार कराई गई थी। इसमें चिकित्सक, लैब टेक्नीशियन के साथ पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती गई थी। साथ में घायलों के ऑपरेशन के लिए ओटी भी बनाई गई थी। जिला अस्पताल में बनाए गए इस ट्रामा सेंटर का संचालन कुछ समय तक तो हुआ। इसके बाद जिला अस्पताल में संचालित हो रहे इमरजेंसी वार्ड को ट्रामा सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया। जोकि अभी भी ट्रामा सेंटर में संचालित हो रही है।
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डिजिटल एक्सरे मशीन सुधरवाने को आई 10 लाख की धनराशि कर दी सरेंडर
करोड़ों रुपये कीमत की डिजिटल एक्सरे मशीन जिला अस्पताल में लगाई गई थी। मशीन खराब हो गई तो दो माह पहले दस लाख रुपये मिले। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से मशीन ठीक नहीं की गई। यही नहीं, अस्पताल प्रशासन ने दस लाख रुपये की धनराशि को शासन के समक्ष सरेंडर कर पल्ला झाड़ लिया। अब मरीज निजी एक्सरे लैब पर महंगे दाम देने को मजबूर हैं।
लाखों रुपये की लागत से लगाई गई लिफ्ट वर्षों से बंद
जिला चिकित्सालय मेें आए गंभीर मरीजों को वार्ड में भर्ती रखा जाता है। यह वार्ड इमारत के प्रथम व द्वितीय तल पर स्थित हैं। वहां पर मरीजों को पहुंचाने के लिए लाखों रुपये की लागत से लिफ्ट लगाई गई थी। जोकि कई वर्षों से बंद है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं मशीन खराब, कहीं बंद ऑक्सीजन प्लांट
ललितपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी और पीएचसी की हालत और खस्ता है। महरौनी सीएचसी पर करीब एक साल से ऑक्सीजन प्लांट तकनीकी खराबी से बंद है। डीजल न मिलने से जनरेटर बंद रहता है। जबकि यह क्षेत्र राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ का है। इस सीएचसी को उन्होंने गोद ले रखा, फिर भी यह स्थिति है। ब्यूरो
मड़ावरा सीएचसी : पानी तक मयस्सर नहीं
मड़ावरा। 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक साल से सीबीसी मशीन खराब है। मलेरिया के अलावा टायफायड, सीबीसी, ब्लड ग्रुप जैसी सामान्य जांच सुविधा भी नहीं है। दंत चिकित्सक, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र चिकित्सक, महिला रोग विशेषज्ञ, नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ समेत गायनी सर्जन की तैनाती भी नहीं है। अस्पताल में पीने के लिए साफ पानी भी नहीं है। नवजातों की देखभाल के लिए संचालित एसएनसी यूनिट, कुपोषित बच्चों एवं उनकी माताओं को भर्ती करने के लिए संचालित एनआरसी बाल पोषण पुनर्वास केंद्र भी स्टाफ की कमी के चलते दम तोड़ रहा है। 31 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में से 16 उपकेंद्र एएनएम के अभाव में खाली पड़े हैं। सीएचसी के तहत आने वाले मदनपुर, गिरार, डोंगराखुर्द स्थित नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोई डॉक्टर नहीं है। रैनबसेरा मीटिंग हॉल और कबाड़ रखने का गोदाम बना हुआ है। संवाद
अस्पताल में लगा आक्सीजन प्लांट एक साल से धूल फांक रहा
महरौनी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्टाफ सहित सुविधाओं की कमी से कई वर्षों से जूझ रहा रहा है। कोविड के मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा लाखों खर्च कर लगाया ऑक्सीजन प्लांट एक वर्ष से खराब है। मरीजों को ऑक्सीजन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्वास्थ्य अधीक्षक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी खराबी से एक वर्ष से बंद है। जिसके लिए शासन को कई बार पत्र भी लिख चुके है। ऑक्सीजन प्लांट में लगे जनरेटर के लिए शासन से डीजल भी नहीं दिया जा रहा है। संवाद
सीएचसी तालबेहट बना रेफरल अस्पताल
तालबेहट। वर्तमान में सीएचसी पर अधीक्षक सहित तीन चिकित्सक स्थायी रूप से पदस्थ है। जबकि चार चिकित्सक संविदा पर है। स्थायी चिकित्सक में एक के पास पीएचसी हिगौरा का प्रभार भी है। वहीं, अधीक्षक आए दिन शासकीय बैठकों एवं सरकारी कार्य में व्यस्त रहते है। राजमार्ग पर तालबेहट के होने के कारण आए दिन मार्ग दुर्घटनाओं के मरीज आते है। मरीजों को मामूली सी बीमारी या घायल अवस्था में झांसी या जिला मुख्यालय रेफर कर दिया जाता है। संवाद
जर्जर हालत में ङोगरा खुर्द पीएचसी
ङोगरा खुर्द। नाराहट क्षेत्र के ङोगरा खुर्द गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जर्जर हालत में है। अस्पताल में रखा कुर्सी, मेज, एलसीङी पलंग, गेट आदि उपकरण चोर ले गए। डॉक्टरों की तैनाती न होने से परिसर में आवास खुले पड़े जिनमें जानवर घूमते रहते। हैंडपंप खराब और अस्पताल में गंदगी की अंबार लगा है। पीएचसी में डॉक्टर नहीं होने पर फार्मासिस्ट अस्पताल खोलकर मामूली बीमार का उपचार कर देता है।
पत्राचार किया है, जल्द सुधरेगी व्यवस्था
अस्पताल में चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ की कमी दूर करने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाए जाने के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया है। जो भी कमियां है उन्हें शीघ्र ही दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. जेएस बख्शी, मुख्य चिकित्साधिकारी
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जिले में 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 198 उपस्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। जिला अस्पताल में 38 चिकित्सकों के सापेक्ष 19 चिकित्सक, महिला अस्पताल में 15 के सापेक्ष तीन चिकित्सक, सीएचसी-पीएचसी में 81 के सापेक्ष 40 चिकित्सक तैनात है। इस प्रकार से कुल स्वीकृत 134 चिकित्सकों के सापेक्ष महज 62 चिकित्सक ही तैनात हैं। इतना ही नहीं पैरामेडिकल स्टाफ के साथ वार्ड बॉय तक नहीं हैं।
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ट्रामा सेंटर में चल रही इमरजेंसी
राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को 24 घंटे इलाज देने के लिए लाखों रुपये की लागत से ट्रामा सेंटर की इमारत तैयार कराई गई थी। इसमें चिकित्सक, लैब टेक्नीशियन के साथ पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती गई थी। साथ में घायलों के ऑपरेशन के लिए ओटी भी बनाई गई थी। जिला अस्पताल में बनाए गए इस ट्रामा सेंटर का संचालन कुछ समय तक तो हुआ। इसके बाद जिला अस्पताल में संचालित हो रहे इमरजेंसी वार्ड को ट्रामा सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया। जोकि अभी भी ट्रामा सेंटर में संचालित हो रही है।
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डिजिटल एक्सरे मशीन सुधरवाने को आई 10 लाख की धनराशि कर दी सरेंडर
करोड़ों रुपये कीमत की डिजिटल एक्सरे मशीन जिला अस्पताल में लगाई गई थी। मशीन खराब हो गई तो दो माह पहले दस लाख रुपये मिले। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से मशीन ठीक नहीं की गई। यही नहीं, अस्पताल प्रशासन ने दस लाख रुपये की धनराशि को शासन के समक्ष सरेंडर कर पल्ला झाड़ लिया। अब मरीज निजी एक्सरे लैब पर महंगे दाम देने को मजबूर हैं।
लाखों रुपये की लागत से लगाई गई लिफ्ट वर्षों से बंद
जिला चिकित्सालय मेें आए गंभीर मरीजों को वार्ड में भर्ती रखा जाता है। यह वार्ड इमारत के प्रथम व द्वितीय तल पर स्थित हैं। वहां पर मरीजों को पहुंचाने के लिए लाखों रुपये की लागत से लिफ्ट लगाई गई थी। जोकि कई वर्षों से बंद है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं मशीन खराब, कहीं बंद ऑक्सीजन प्लांट
ललितपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी और पीएचसी की हालत और खस्ता है। महरौनी सीएचसी पर करीब एक साल से ऑक्सीजन प्लांट तकनीकी खराबी से बंद है। डीजल न मिलने से जनरेटर बंद रहता है। जबकि यह क्षेत्र राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ का है। इस सीएचसी को उन्होंने गोद ले रखा, फिर भी यह स्थिति है। ब्यूरो
मड़ावरा सीएचसी : पानी तक मयस्सर नहीं
मड़ावरा। 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक साल से सीबीसी मशीन खराब है। मलेरिया के अलावा टायफायड, सीबीसी, ब्लड ग्रुप जैसी सामान्य जांच सुविधा भी नहीं है। दंत चिकित्सक, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र चिकित्सक, महिला रोग विशेषज्ञ, नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ समेत गायनी सर्जन की तैनाती भी नहीं है। अस्पताल में पीने के लिए साफ पानी भी नहीं है। नवजातों की देखभाल के लिए संचालित एसएनसी यूनिट, कुपोषित बच्चों एवं उनकी माताओं को भर्ती करने के लिए संचालित एनआरसी बाल पोषण पुनर्वास केंद्र भी स्टाफ की कमी के चलते दम तोड़ रहा है। 31 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में से 16 उपकेंद्र एएनएम के अभाव में खाली पड़े हैं। सीएचसी के तहत आने वाले मदनपुर, गिरार, डोंगराखुर्द स्थित नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोई डॉक्टर नहीं है। रैनबसेरा मीटिंग हॉल और कबाड़ रखने का गोदाम बना हुआ है। संवाद
अस्पताल में लगा आक्सीजन प्लांट एक साल से धूल फांक रहा
महरौनी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्टाफ सहित सुविधाओं की कमी से कई वर्षों से जूझ रहा रहा है। कोविड के मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा लाखों खर्च कर लगाया ऑक्सीजन प्लांट एक वर्ष से खराब है। मरीजों को ऑक्सीजन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्वास्थ्य अधीक्षक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी खराबी से एक वर्ष से बंद है। जिसके लिए शासन को कई बार पत्र भी लिख चुके है। ऑक्सीजन प्लांट में लगे जनरेटर के लिए शासन से डीजल भी नहीं दिया जा रहा है। संवाद
सीएचसी तालबेहट बना रेफरल अस्पताल
तालबेहट। वर्तमान में सीएचसी पर अधीक्षक सहित तीन चिकित्सक स्थायी रूप से पदस्थ है। जबकि चार चिकित्सक संविदा पर है। स्थायी चिकित्सक में एक के पास पीएचसी हिगौरा का प्रभार भी है। वहीं, अधीक्षक आए दिन शासकीय बैठकों एवं सरकारी कार्य में व्यस्त रहते है। राजमार्ग पर तालबेहट के होने के कारण आए दिन मार्ग दुर्घटनाओं के मरीज आते है। मरीजों को मामूली सी बीमारी या घायल अवस्था में झांसी या जिला मुख्यालय रेफर कर दिया जाता है। संवाद
जर्जर हालत में ङोगरा खुर्द पीएचसी
ङोगरा खुर्द। नाराहट क्षेत्र के ङोगरा खुर्द गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जर्जर हालत में है। अस्पताल में रखा कुर्सी, मेज, एलसीङी पलंग, गेट आदि उपकरण चोर ले गए। डॉक्टरों की तैनाती न होने से परिसर में आवास खुले पड़े जिनमें जानवर घूमते रहते। हैंडपंप खराब और अस्पताल में गंदगी की अंबार लगा है। पीएचसी में डॉक्टर नहीं होने पर फार्मासिस्ट अस्पताल खोलकर मामूली बीमार का उपचार कर देता है।
पत्राचार किया है, जल्द सुधरेगी व्यवस्था
अस्पताल में चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ की कमी दूर करने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाए जाने के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया है। जो भी कमियां है उन्हें शीघ्र ही दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. जेएस बख्शी, मुख्य चिकित्साधिकारी