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सर्द देश से आए पक्षियों का होने लगा शिकार
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कैप्सन - जहर से मृत साइबेरियन चिड़िया
- फोटो : TALDEHATE
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तालबेहट। सर्दी की दस्तक के साथ ही क्षेत्र के बांधों में आने वाले साइबेरियन पक्षियों का शिकार करने का सिलसिला शुरू हो गया है। शिकारी अपने स्वार्थ की खातिर इन पक्षियों को जहर देकर मार रहे हैं, वहीं जिम्मेदार जानकारी के बाद भी मौन साधे हुए हैं।
सर्दी शुरू होते ही साइबेरिया क्षेत्र के पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके जिले के बांधों व तालाबों के किनारे आ जाते हैं। क्षेत्र के माताटीला बांध और शहजाद बांध के भराव क्षेत्र में यह भारी संख्या में मौजूद रहते हैं। मांसाहारी लोगों में इनका शिकार बहुत प्रिय है। इस कारण पक्षियों के आते ही मांसाहारी लोग इनकी तलाश शुरू कर देते है। कुछ लोग इसे जाल डाल कर पकड़ते हैं। लेकिन, कम संख्या में आने के कारण इन्हें जहर देकर मारा जाता है। इसके लिए वह छोटी- छोटी मछलियों में जहर भरकर उसे पानी में डाल देते है। इसके बाद जैसे ही यह पक्षी भोजन के रूप में उनका शिकार करते हैं, कुछ ही पल में उनका शिकार हो जाता है। जहर देकर मारी जा रही यह चिड़ियां लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, लेकिन इसके बाद भी पक्षियों का शिकार किया जा रहा है।
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शिकार रोकने की जिम्मेदारी वन विभाग की है। फिर भी क्षेत्र में साइबेरियन पक्षियों का शिकार नहीं करने दिया जाएगा।
- अजय कुमार, प्रभारी तेरई फाटक पुलिस चौकी
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अभी किसी ने इस संबंध में बताया नहीं है। फिर भी इसकी निगरानी शुरू कराई जाएगी।
प्रेमशंकर तिवारी, वनक्षेत्राधिकारी तालबेहट
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कड़ाके की ठंड में आती है लालसर चिड़िया
ठंड की शुरूआत में काली चिड़िया आती है, लेकिन जैसे- जैसे सर्दी अधिक बढ़ती है, उसी रफ्तार से इन पक्षियों के आने की संख्या बढ़ जाती है। कड़ाके की सर्दी में इन चिड़ियों में सबसे अधिक महत्व रखने वाली लाल रंग की खूबसूरत चिड़िया आती है। इसको क्षेत्र में लालसर के नाम से जाना जाता है।
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सर्दी शुरू होते ही साइबेरिया क्षेत्र के पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके जिले के बांधों व तालाबों के किनारे आ जाते हैं। क्षेत्र के माताटीला बांध और शहजाद बांध के भराव क्षेत्र में यह भारी संख्या में मौजूद रहते हैं। मांसाहारी लोगों में इनका शिकार बहुत प्रिय है। इस कारण पक्षियों के आते ही मांसाहारी लोग इनकी तलाश शुरू कर देते है। कुछ लोग इसे जाल डाल कर पकड़ते हैं। लेकिन, कम संख्या में आने के कारण इन्हें जहर देकर मारा जाता है। इसके लिए वह छोटी- छोटी मछलियों में जहर भरकर उसे पानी में डाल देते है। इसके बाद जैसे ही यह पक्षी भोजन के रूप में उनका शिकार करते हैं, कुछ ही पल में उनका शिकार हो जाता है। जहर देकर मारी जा रही यह चिड़ियां लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, लेकिन इसके बाद भी पक्षियों का शिकार किया जा रहा है।
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शिकार रोकने की जिम्मेदारी वन विभाग की है। फिर भी क्षेत्र में साइबेरियन पक्षियों का शिकार नहीं करने दिया जाएगा।
- अजय कुमार, प्रभारी तेरई फाटक पुलिस चौकी
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अभी किसी ने इस संबंध में बताया नहीं है। फिर भी इसकी निगरानी शुरू कराई जाएगी।
प्रेमशंकर तिवारी, वनक्षेत्राधिकारी तालबेहट
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कड़ाके की ठंड में आती है लालसर चिड़िया
ठंड की शुरूआत में काली चिड़िया आती है, लेकिन जैसे- जैसे सर्दी अधिक बढ़ती है, उसी रफ्तार से इन पक्षियों के आने की संख्या बढ़ जाती है। कड़ाके की सर्दी में इन चिड़ियों में सबसे अधिक महत्व रखने वाली लाल रंग की खूबसूरत चिड़िया आती है। इसको क्षेत्र में लालसर के नाम से जाना जाता है।
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