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Lalitpur News: खुले में फेंका जा रहा मेडिकल कचरा

Wed, 30 Apr 2025 12:25 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 30 Apr 2025 12:25 AM IST
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Medical waste being dumped in the open
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग भले ही निजी स्वास्थ्य इकाइयों के बायोमेडिकल वेस्ट मैटेरियल (कचरा) निस्तारण का दावा कर रहा हो, लेकिन शहर में निजी चिकित्सा इकाइयों के पास पड़ा कचरा विभाग की पोल खोल रहा है। यह हाल अधिकांश नर्सिंग होम, क्लीनिक व पैथोलॉजी का है। ऐसे में संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है।
शासन ने अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरा से होने वाले प्रदूषण व बीमारियों को रोकने के लिए सभी चिकित्सा इकाइयों को प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड में पंजीयन कराकर एनओसी लेना अनिवार्य किया है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड में पंजीयन होने पर चिकित्सा इकाई के मेडिकल कचरे का उठान अनुबंधित इकाई द्वारा किया जाता है। इसके मानक तय किए गए हैं। कचरे को अलग-अलग थैलों में रखकर बंद कमरे में रखा जाता है।
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लेकिन, जगह-जगह मेडिकल कचरा खुले में पड़ा है। अभिलाषा पेट्रोल पंप के पीछे, जिला अस्पताल के मार्ग में खाली पड़े मैदान में, निजी स्वास्थ्य इकाइयों के पास खाली पड़े प्लाटों व सदनशाह चौराहा के पास गिन्नौट बाग में मरीजों को लगने वाली ड्रिप, निडिल, बोतल व अन्य मेडिकल कचरा पड़ा हुआ है। कुछ स्थानों पर तो कचरा जला तक दिया है।
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यह है मेडिकल कचरा रखने का नियम
पीला बैग - रोगी का कचरा, संक्रमित कचरा, प्रयोगशालाओं का कचरा, सनी हुई ड्रेसिंग
लाल बैग - संक्रमित प्लास्टिक कचरा, कैथेटर, कैनुला, सीरिंज, ट्यूब, आरबी बोतल
नीला बैग - ग्लास का टूटा सामान, ट्रेट इंजेक्शन, एक्युल स्लाइड, कांच की सीरिंज, निडिल, ब्लेड, धातु के धारदार एवं नुकीला सामान
काला बैग - पेशाब, बलगम, मवाद, संक्रमित द्रव्य, संक्रमित कपड़े, ओटी के कपड़े, लेबर रूम के कपड़े स्टोर किए जाते हैं।

यह है निस्तारण का नियम
पंजीयन वाली सभी स्वास्थ्य इकाइयों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट मैटेरियल के निस्तारण के लिए उत्तर-प्रदेश प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड द्वारा संस्थाएं चलाई जा रही हैं। यह संस्था पंजीयन वाली स्वास्थ्य इकाइयों से कचरा प्रतिदिन उठाती है। उठान में प्लास्टिक थैली में पैक करके अपने साथ निस्तारण के लिए ले जाती है।

यह हो सकती हैं हानियां
खुले में पड़े मेडिकल कचरे से निमोनिया, हैजा, डेंगू, स्वाइन फ्लू, मेनेंजाइटिस, हेपेटाइटिस-बी व कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। मवेशी व गोवंश के खाने से उनके शरीर में इंफेक्शन होता है और धीरे-धीरे वे दम तोड़ देते हैं। इससे पर्यावरण को भारी नुकसान होने के साथ ही बीमारियां फैलने की आशंका रहती है।


वर्जन
सभी स्वास्थ्य इकाइयों के मेडिकल वेस्ट मैटेरियल का उठान अनुबंधित कंपनी द्वारा किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर खुले में मेडिकल कचरा डाले जाने की जानकारी हुई है। सभी को कचरा निर्धारित बैग में सुरक्षित रखने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
-डॉ. इम्तियाज अहमद, सीएमओ
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