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दतिया से खरीद कर ला रहे मीट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Mar 2017 01:16 AM IST
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मांसाहारी लोग
- फोटो : demo
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अवैध मांस बिक्री की बंदी का असर दिखाई देने लगा है। मीट न मिलने के कारण दुकानदार वेज बिरियानी बेचने लगे हैं। इससे उनकी दुकान पर लगने वाली भीड़ छंट गई है। वहीं, नियमित मांसाहारी भोजन करने वाले परेशान हैं। वह लोग मजबूरन दतिया से मांस खरीद कर ला रहे हैं।
शहर में किसी भी दुकानदार के पास पशु काटने का लाइसेंस नहीं है। केवल मांस बेचने भर का ही लाइसेंस हैं। इससे मांस नहीं मिल पा रहा है। जो थोड़ा बहुत मिल रहा है, वह चोरी छिपे काटा जा रहा है। इस पर भी नजर रखने के लिए नगर निगम और खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम लगातार निरीक्षण कर रही है। मांस बंदी का असर हाथ ठेला लगाकर बिरयानी बेचने वालों की बिक्री पर पड़ा है। चिकन बिरियानी बेचने वालों ने या तो अपनी दुकानें बंद कर दी हैं या शाकाहारी बिरियानी बेचने लगे हैं।
नगर में बिरियानी बेचने का सबसे बड़ा केंद्र जीवनशाह तिराहा, ओरछा गेट और नगरा हाट के मैदान में अब सन्नाटा है। कुछ लोग ही शाकाहारी बिरियानी बेच रहे हैं। उन्होंने अपनी दुकानों पर स्टीकर लगा दिए हैं कि यहां पर केवल शाकाहारी बिरयानी मिलती है।
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इतना ही नहीं, जो लोग नियमित तौर पर मांसाहारी भोजन करते हैं उन्हें मीट के लिए परेशानी हो रही है। मार्केट में मछली का कारोबार तो खूब चल रहा है, लेकिन मांस नहीं बिकने के कारण खाने वाले लोग परेशान हैं। मजबूरन वह दतिया से मांस खरीद कर ला रहे हैं। यही नहीं, जो लोग चोरी छिपे बेच रहे हैं, उन्होंने भी मांस के दाम बढ़ा दिए हैं। चार सौ से चार सौ पच्चीस प्रति रुपये किलोग्राम की दर से बिकने वाला मांस अब पांच सौ से सवा पांच सौ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है।
करौंदी माता मंदिर पर रही भीड़
करौंदी माता मंदिर पर गत दिवस बकरा चढ़ाने वालों की भीड़ रही। मान्यता है कि बलि में बकरे के कान काट दिए जाते हैं। बाद में बकरा छोड़ दिया जाता है। लेकिन, मांस बंदी के दौरान मंदिर पर ऐसे बहुत से बकरा कारोबारी पहुंचे, जिन्होंने जमकर मांस बेचा। रविवार को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण अधिकारी छुट्टी पर रहे, इसका लोगों ने खूब फायदा उठाया।
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शहर में किसी भी दुकानदार के पास पशु काटने का लाइसेंस नहीं है। केवल मांस बेचने भर का ही लाइसेंस हैं। इससे मांस नहीं मिल पा रहा है। जो थोड़ा बहुत मिल रहा है, वह चोरी छिपे काटा जा रहा है। इस पर भी नजर रखने के लिए नगर निगम और खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम लगातार निरीक्षण कर रही है। मांस बंदी का असर हाथ ठेला लगाकर बिरयानी बेचने वालों की बिक्री पर पड़ा है। चिकन बिरियानी बेचने वालों ने या तो अपनी दुकानें बंद कर दी हैं या शाकाहारी बिरियानी बेचने लगे हैं।
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नगर में बिरियानी बेचने का सबसे बड़ा केंद्र जीवनशाह तिराहा, ओरछा गेट और नगरा हाट के मैदान में अब सन्नाटा है। कुछ लोग ही शाकाहारी बिरियानी बेच रहे हैं। उन्होंने अपनी दुकानों पर स्टीकर लगा दिए हैं कि यहां पर केवल शाकाहारी बिरयानी मिलती है।
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इतना ही नहीं, जो लोग नियमित तौर पर मांसाहारी भोजन करते हैं उन्हें मीट के लिए परेशानी हो रही है। मार्केट में मछली का कारोबार तो खूब चल रहा है, लेकिन मांस नहीं बिकने के कारण खाने वाले लोग परेशान हैं। मजबूरन वह दतिया से मांस खरीद कर ला रहे हैं। यही नहीं, जो लोग चोरी छिपे बेच रहे हैं, उन्होंने भी मांस के दाम बढ़ा दिए हैं। चार सौ से चार सौ पच्चीस प्रति रुपये किलोग्राम की दर से बिकने वाला मांस अब पांच सौ से सवा पांच सौ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है।
करौंदी माता मंदिर पर रही भीड़
करौंदी माता मंदिर पर गत दिवस बकरा चढ़ाने वालों की भीड़ रही। मान्यता है कि बलि में बकरे के कान काट दिए जाते हैं। बाद में बकरा छोड़ दिया जाता है। लेकिन, मांस बंदी के दौरान मंदिर पर ऐसे बहुत से बकरा कारोबारी पहुंचे, जिन्होंने जमकर मांस बेचा। रविवार को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण अधिकारी छुट्टी पर रहे, इसका लोगों ने खूब फायदा उठाया।