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श्रद्घा के साथ मनाया जा रहा शहीदी पर्व
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गुरूद्वारा में ग्रंथियों की सेवा करते श्रद्धालु
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। मोहल्ला लक्ष्मीपुरा स्थित गुरुद्वारा में श्री गुरु गोविंद सिंह के चारों साहिबजादों व माता गूजरी का शहीदी पर्व श्रद्धा से मनाया जा रहा है। गुरुद्वारा के ग्रंथी ज्ञानी मोकम सिंह ने शब्द कीर्तन किया।
28 दिसंबर तक सुबह एवं रात्रि में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कथा वाचक भाई हरजीत सिंह ढपाली द्वारा माता गूजरी एवं चार साहिबजादों के दृष्टांत को सुनाया गया। उन्होंने कहा कि सरसा नदी पर श्री गुरु गोविंद सिंह महाराज का परिवार जुदा हो रहा था। एक ओर जहां बड़े साहिबजादे गुरुजी के साथ चले गए, वहीं दूसरे ओर छोटे शहजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह माता गूजरी के साथ रुक गए। उन्हें अचानक गंगू नौकर मिल गया और वे गंगू की बातों में आकर उनके साथ चल दिए। गंगू ने लालच में आकर वजीर खान को खबर दे दी। खबर मिलते ही माता गूजरी के साथ 7 वर्ष और 5 वर्ष की आयु के साहिबजादों को गिरफ्तार कर उन्हें ठंडे बुर्ज में रखा गया। उन्हें धर्म परिवर्तन के साथ जागीरों की लालच दी गई।
उन्होंने जब इसे कबूल नहीं किया तो साहेबजादे शहीदी को प्राप्त हुए। उन्हें जिंदा दीवारों में दबाने का ऐलान किया गया। इसी प्रकार दो अन्य साहिबजादे चमकौर गढ़ी के युद्ध में शहीद हुए थे। माताजी यह खबर पाकर शहीदी को प्राप्त र्हुइं। प्रतिदिन सुबह व शाम को लंगर की सेवा माता अमृत कौर परिवार की तरफ से की जा रही है।
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श्रीगुरु सिंह सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा ने सभी से धर्म लाभ लेने की अपील की है। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा, महामंत्री सुरजीत सिंह सलूजा, परमजीत सिंह, छतवाल, मनजीत सिंह सलूजा एडवोकेट, चरणजीत सिंह, दलजीत सिंह, मनजीत सिंह परमार, जीवन सिंह, दर्शन सिंह, कमलजीत सिंह, रविंद्र सिंह, गुरमुख सिंह, हरजीत सिंह गोलू, मनमीत सिंह सलूजा, नरेंद्र सिंह सलूजा, अमरजीत सिंह सलूजा, सरदार अवतार सिंह, सुखप्रीत सिंह, सुरजीत सिंह काके, सतनाम सिंह आदि उपस्थित रहे।
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28 दिसंबर तक सुबह एवं रात्रि में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कथा वाचक भाई हरजीत सिंह ढपाली द्वारा माता गूजरी एवं चार साहिबजादों के दृष्टांत को सुनाया गया। उन्होंने कहा कि सरसा नदी पर श्री गुरु गोविंद सिंह महाराज का परिवार जुदा हो रहा था। एक ओर जहां बड़े साहिबजादे गुरुजी के साथ चले गए, वहीं दूसरे ओर छोटे शहजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह माता गूजरी के साथ रुक गए। उन्हें अचानक गंगू नौकर मिल गया और वे गंगू की बातों में आकर उनके साथ चल दिए। गंगू ने लालच में आकर वजीर खान को खबर दे दी। खबर मिलते ही माता गूजरी के साथ 7 वर्ष और 5 वर्ष की आयु के साहिबजादों को गिरफ्तार कर उन्हें ठंडे बुर्ज में रखा गया। उन्हें धर्म परिवर्तन के साथ जागीरों की लालच दी गई।
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उन्होंने जब इसे कबूल नहीं किया तो साहेबजादे शहीदी को प्राप्त हुए। उन्हें जिंदा दीवारों में दबाने का ऐलान किया गया। इसी प्रकार दो अन्य साहिबजादे चमकौर गढ़ी के युद्ध में शहीद हुए थे। माताजी यह खबर पाकर शहीदी को प्राप्त र्हुइं। प्रतिदिन सुबह व शाम को लंगर की सेवा माता अमृत कौर परिवार की तरफ से की जा रही है।
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श्रीगुरु सिंह सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा ने सभी से धर्म लाभ लेने की अपील की है। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा, महामंत्री सुरजीत सिंह सलूजा, परमजीत सिंह, छतवाल, मनजीत सिंह सलूजा एडवोकेट, चरणजीत सिंह, दलजीत सिंह, मनजीत सिंह परमार, जीवन सिंह, दर्शन सिंह, कमलजीत सिंह, रविंद्र सिंह, गुरमुख सिंह, हरजीत सिंह गोलू, मनमीत सिंह सलूजा, नरेंद्र सिंह सलूजा, अमरजीत सिंह सलूजा, सरदार अवतार सिंह, सुखप्रीत सिंह, सुरजीत सिंह काके, सतनाम सिंह आदि उपस्थित रहे।

गुरूद्वारा में कीर्तन करते श्रद्धालु- फोटो : LALITPUR