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मकर संक्रांति आज, तीन बजे तक रहेगा पुण्यकाल
ब्यूरो
Updated Fri, 15 Jan 2016 12:57 AM IST
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ललितपुर। मकर संक्रांति का पुण्यकाल शुक्रवार को सुबह सात बजे से दिन में तीन बजे तक रहेगा। इस पुण्यकाल में तिल के साथ नदी और तालाबों पर स्नान करना शुभ फलदायी है।
मकर संक्रांति का पर्व हिंदू मान्यतानुसार प्रकृति में श्रेष्ठ स्थान रखता है। इस दिन सूर्य उत्तर क्रांति की ओर अग्रसर होते हैं। शास्त्रीय मान्यतानुसार इस दिन से देवताओं का दिन प्रारंभ होता है और दैत्यों की रात्रि शुरू होती है। संक्रांति का पर्व भगवान विष्णु का पर्व है।
भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न तिल का भोजन करना और स्नान से शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है। जानकार इसे संपूर्ण वर्ष के व्यापारिक दृष्टिकोण से जोड़कर देखते हैं।
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आचार्य महेश मिश्र के अनुसार मान्यता है कि संक्रांति जिस ओर से आती है और जिस वाहन पर बैठती है, उन वस्तुओं का ह्रास होता है। संक्रांति की दृष्टि वक्र होती है और जिस दिशा में संक्रांति की दृष्टि होती है, उस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा व भूकंप आते हैं। संक्रांति जिन वस्तुओं को स्वीकार करती है, वह महंगी होती हैं। तीर्थ व नदियों में स्नान का विशेष महत्व है।
संक्रांति पर मंदिरों, सार्वजनिक स्थानों और तीर्थ क्षेत्रों पर कार्यक्रमों की तैयारियों की गई हैं। साथ ही मेला भी लगाए जाएंगे। शहर के सीतापाठ मंदिर, धौर्रा के अंतर्गत श्रीरणछोरधाम मंदिर, पाली के श्री नीलकंठेश्वर मंदिर आदि स्थलों पर स्थित नदी व तालाबों में डुबकी लगाकर स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में शहरी व ग्रामीण श्रद्धालु मेला पहुंचते हैं।
इन राशि को रहेगी अशुभ
शास्त्रीय विद्वानों के अनुसार मीन, सिंह, धनुुु व मेष राशि वालों के लिए मकर संक्रांति अशुभ बताई गई है। बाकी राशि वालों के लिए मकर संक्रांति शुभ रहेगी, जिनके लिए अशुभ बताई गई है, वह दान, जप व हवन से अनिष्ट का निवारण कर सकते हैं।
यह करें दान
मकर संक्रांति इस बार वाराह वाहन पर सवार होकर आई है। मकर संक्रांति के दिन तुलादान, गौदान और स्वर्णदान करना शुभ फलदायक है।
यह है स्नान का समय
आचार्य के अनुसार सूर्य का संक्रमण काल धनु राशि से मकर राशि में शुक्रवार की सुबह 7.05 बजे प्रवेश होकर दिन में 3.05 बजे तक पुण्य काल रहेगा। इस दौरान स्नान करना शुभ फलदायी है।
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मकर संक्रांति का पर्व हिंदू मान्यतानुसार प्रकृति में श्रेष्ठ स्थान रखता है। इस दिन सूर्य उत्तर क्रांति की ओर अग्रसर होते हैं। शास्त्रीय मान्यतानुसार इस दिन से देवताओं का दिन प्रारंभ होता है और दैत्यों की रात्रि शुरू होती है। संक्रांति का पर्व भगवान विष्णु का पर्व है।
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भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न तिल का भोजन करना और स्नान से शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है। जानकार इसे संपूर्ण वर्ष के व्यापारिक दृष्टिकोण से जोड़कर देखते हैं।
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आचार्य महेश मिश्र के अनुसार मान्यता है कि संक्रांति जिस ओर से आती है और जिस वाहन पर बैठती है, उन वस्तुओं का ह्रास होता है। संक्रांति की दृष्टि वक्र होती है और जिस दिशा में संक्रांति की दृष्टि होती है, उस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा व भूकंप आते हैं। संक्रांति जिन वस्तुओं को स्वीकार करती है, वह महंगी होती हैं। तीर्थ व नदियों में स्नान का विशेष महत्व है।
संक्रांति पर मंदिरों, सार्वजनिक स्थानों और तीर्थ क्षेत्रों पर कार्यक्रमों की तैयारियों की गई हैं। साथ ही मेला भी लगाए जाएंगे। शहर के सीतापाठ मंदिर, धौर्रा के अंतर्गत श्रीरणछोरधाम मंदिर, पाली के श्री नीलकंठेश्वर मंदिर आदि स्थलों पर स्थित नदी व तालाबों में डुबकी लगाकर स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में शहरी व ग्रामीण श्रद्धालु मेला पहुंचते हैं।
इन राशि को रहेगी अशुभ
शास्त्रीय विद्वानों के अनुसार मीन, सिंह, धनुुु व मेष राशि वालों के लिए मकर संक्रांति अशुभ बताई गई है। बाकी राशि वालों के लिए मकर संक्रांति शुभ रहेगी, जिनके लिए अशुभ बताई गई है, वह दान, जप व हवन से अनिष्ट का निवारण कर सकते हैं।
यह करें दान
मकर संक्रांति इस बार वाराह वाहन पर सवार होकर आई है। मकर संक्रांति के दिन तुलादान, गौदान और स्वर्णदान करना शुभ फलदायक है।
यह है स्नान का समय
आचार्य के अनुसार सूर्य का संक्रमण काल धनु राशि से मकर राशि में शुक्रवार की सुबह 7.05 बजे प्रवेश होकर दिन में 3.05 बजे तक पुण्य काल रहेगा। इस दौरान स्नान करना शुभ फलदायी है।