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Lalitpur News: महायोजना पर असमंजस से तीन करोड़ के राजस्व का नुकसान
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। महायोजना 2031 की प्रक्रिया जनवरी से चल रही है। एक माह पूर्व महायोजना के नक्शे तैयार कर आपत्ति मांगी गई। इस पर करीब 900 आपत्तियां आ चुकी हैं। महायोजना को लेकर लोगों के बीच असमंजस है। जिसका असर बैनामों पर पड़ रहा है। पिछली साल के सापेक्ष में इस साल करीब एक हजार बैनामे कम हुए हैं। इसके पीछे सर्किल रेट की विसंगतियों को भी माना जा रहा है। इससे करीब तीन करोड़ के राजस्व की हानि हुई है।
नई महायोजना की चर्चा के कारण पहले लोगों ने बैनामे नहीं कराए। इसके बाद महायोजना पर आपत्तियां बढ़ने के कारण भी भू-कारोबारी निवेश करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन ने श्रेणी दो के जमीनों का बैनामा पर रोक लगा रखी है।
जनपद मुख्यालय की आसपास की अधिकांश भूमि श्रेणी तीन में दर्ज थी, जिनको दो में तो दर्ज कर दिया गया। लेकिन इन्हें एक में दर्ज नहीं किया गया। जिससे इनके बैनामे नहीं हो पा रहे हैं।
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सर्किल रेट की विसंगतियों को भी कारण माना जा रहा है। वर्ष 2022 में सर्किल रेट का निर्धारण हुआ था। जिसमें सड़क किनारे भूमि का 50 फीट गहराई तक का भूभाग व्यवसायिक माना गया। इससे भी बैनामों में गिरावट आई है। अप्रैल से अभी तक करीब 500 बैनामे हुए हैं, जबकि अगस्त तक पिछले वर्ष 1500 से अधिक बैनामे हो गए थे।
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कम बैनामे हुए हैं, इसके कारणों का पता लगाया जा रहा है। सर्किल रेट भी एक कारण है, जिसका रिवीजन किया जाएगा। जल्द की स्थित सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। - मनोज कुमार श्रीवास्तव, अपर महानिरीक्षक स्टांंप
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ललितपुर। महायोजना 2031 की प्रक्रिया जनवरी से चल रही है। एक माह पूर्व महायोजना के नक्शे तैयार कर आपत्ति मांगी गई। इस पर करीब 900 आपत्तियां आ चुकी हैं। महायोजना को लेकर लोगों के बीच असमंजस है। जिसका असर बैनामों पर पड़ रहा है। पिछली साल के सापेक्ष में इस साल करीब एक हजार बैनामे कम हुए हैं। इसके पीछे सर्किल रेट की विसंगतियों को भी माना जा रहा है। इससे करीब तीन करोड़ के राजस्व की हानि हुई है।
नई महायोजना की चर्चा के कारण पहले लोगों ने बैनामे नहीं कराए। इसके बाद महायोजना पर आपत्तियां बढ़ने के कारण भी भू-कारोबारी निवेश करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन ने श्रेणी दो के जमीनों का बैनामा पर रोक लगा रखी है।
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जनपद मुख्यालय की आसपास की अधिकांश भूमि श्रेणी तीन में दर्ज थी, जिनको दो में तो दर्ज कर दिया गया। लेकिन इन्हें एक में दर्ज नहीं किया गया। जिससे इनके बैनामे नहीं हो पा रहे हैं।
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सर्किल रेट की विसंगतियों को भी कारण माना जा रहा है। वर्ष 2022 में सर्किल रेट का निर्धारण हुआ था। जिसमें सड़क किनारे भूमि का 50 फीट गहराई तक का भूभाग व्यवसायिक माना गया। इससे भी बैनामों में गिरावट आई है। अप्रैल से अभी तक करीब 500 बैनामे हुए हैं, जबकि अगस्त तक पिछले वर्ष 1500 से अधिक बैनामे हो गए थे।
कम बैनामे हुए हैं, इसके कारणों का पता लगाया जा रहा है। सर्किल रेट भी एक कारण है, जिसका रिवीजन किया जाएगा। जल्द की स्थित सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। - मनोज कुमार श्रीवास्तव, अपर महानिरीक्षक स्टांंप