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भगवान परशुराम के जयघोष से गूंजा तालबेहट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 May 2016 01:15 AM IST
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parhsuram jyanti,lalitpur news
- फोटो : amar ujala
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तालबेहट (ललितपुर)। भगवान परशुराम की जयंती पर नगर में शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में शामिल युवाओं द्वारा जय परशुराम के गगनभेदी जयकारे लगाकर पूरे नगर को गुंजायमान कर दिया। शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। शोभायात्रा के बाद हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने ब्राह्मण समाज से एकजुट होने का आह्वान किया।
सोमवार सुबह परशुराम जयंती के अवसर पर पीरों वाली मढ़िया पर सुंदर कांड, हवन-पूजन व अन्य धार्मिक कार्यक्रम हुए। सायंकाल पांच बजे पीरों वाली मढ़िया से गाजे-बाजे के साथ शोभा यात्रा निकली। शोभायात्रा में सबसे आगे घोड़े पर सवार युवक हाथों में तलवार लिए चल रहे थे। उनके पीछे डीजे के धुनों पर युवा हाथों में तलवार एवं फरसे लिए झूमते व जयकारे लगाते चल रहे थे।
मौनियों की टोलियों सहित विभिन्न क्षेत्रीय नृत्य पार्टियां नृत्य करती चल रही थी। हाथ ठेलों पर भगवान परशुराम के तैल चित्र रखे थे और सबसे पीछें बग्गी पर सवार भगवान परशुराम के स्वरूप चल रहे थे।
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शोभायात्रा जैन मंदिर तिराहे, सब्जी मंडी से बस स्टैंड, रामलीला मैैदान, पैट्रोल पंप होती हुई पीरों की मढ़िया पर समाप्त हुई। शोभायात्रा का एक दर्जन से अधिक स्थानों पर जोरदार स्वागत हुआ।
शोभायात्रा निकलते समय राज मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई थी। शोभायात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद हुई गोष्ठी में ब्राह्मणों की एकता पर जोर दिया गया। आभार व्यक्त हरीमोहन लिटोरिया ने किया।
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सोमवार सुबह परशुराम जयंती के अवसर पर पीरों वाली मढ़िया पर सुंदर कांड, हवन-पूजन व अन्य धार्मिक कार्यक्रम हुए। सायंकाल पांच बजे पीरों वाली मढ़िया से गाजे-बाजे के साथ शोभा यात्रा निकली। शोभायात्रा में सबसे आगे घोड़े पर सवार युवक हाथों में तलवार लिए चल रहे थे। उनके पीछे डीजे के धुनों पर युवा हाथों में तलवार एवं फरसे लिए झूमते व जयकारे लगाते चल रहे थे।
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मौनियों की टोलियों सहित विभिन्न क्षेत्रीय नृत्य पार्टियां नृत्य करती चल रही थी। हाथ ठेलों पर भगवान परशुराम के तैल चित्र रखे थे और सबसे पीछें बग्गी पर सवार भगवान परशुराम के स्वरूप चल रहे थे।
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शोभायात्रा जैन मंदिर तिराहे, सब्जी मंडी से बस स्टैंड, रामलीला मैैदान, पैट्रोल पंप होती हुई पीरों की मढ़िया पर समाप्त हुई। शोभायात्रा का एक दर्जन से अधिक स्थानों पर जोरदार स्वागत हुआ।
शोभायात्रा निकलते समय राज मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई थी। शोभायात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद हुई गोष्ठी में ब्राह्मणों की एकता पर जोर दिया गया। आभार व्यक्त हरीमोहन लिटोरिया ने किया।