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श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई

Wed, 19 Feb 2020 01:24 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Feb 2020 01:24 AM IST
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Lord krishna born speech
बरौदा डांग में कथा सुनते श्रद्घालु - फोटो : LALITPUR
पुलवारा। ब्लॉक बार के ग्राम बरौदा डांग में श्री कैलाशपति मंदिर में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास नीरज नयन शास्त्री ने धरती पर कंस के अत्याचार और श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
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उन्होंने कहा कि द्वापर युग में जब पृथ्वी पर राक्षसों के अत्याचार बढ़ने लगे तो पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपनी व्यथा सुनाने के लिए तथा उद्धार के लिए ब्रह्मा जी के पास गई। पृथ्वी पर पाप कर्म बहुत बढ़ गए यह देखकर सभी देवता भी बहुत चिंतित थे। ब्रह्माजी सब देवताओं को साथ लेकर पृथ्वी को भगवान श्री विष्णु के पास क्षीर सागर ले गए। उस समय भगवान विष्णु शयन कर रहे थे। स्तुति करने पर भगवान की निद्रा भंग हो गई। भगवान ने ब्रह मा जी एवं सभी देवताओं को देखकर उनके आने का कारण पूछा तो पृथ्वी बोलीं कि भगवान में पाप के बोझ से दबी जा रही हूं, मेरा उद्धार करें।
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यह सुनकर भगवान विष्णु उन्हें आश्वस्त करते हुए बोले चिंता न करें मैं अवतार लेकर पृथ्वी पर आऊंगा और इसे पापों से मुक्ति प्रदान करूंगा। मेरे अवतार लेने से पहले कश्यप मुनि मथुरा के यदुकुल में जन्म लेकर वसुदेव नाम से प्रसिद्ध होंगे। तब मैं ब्रजमंडल में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से ‘कृष्ण’ के रूप में जन्म लूंगा और उनकी दूसरी पत्नी के गर्भ से मेरी सवारी शेषनाग बलराम के रूप में उत्पन्न होंगे। तुम सब देवतागण ब्रज भूमि में जाकर यादव वंश में अपना शरीर धारण कर लो। कुरुक्षेत्र के मैदान में मैं पापियों का संहार कर पृथ्वी को पापों से भार मुक्त करूंगा।
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कंस एक क्रूर और दुराचारी राजा था, जिसने अपनी बहन और बहनोई को कारागार में बंदी बनाकर रखा था। उसके अंत के लिए भगवान विष्णु ने जब देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया तो उस रात सारे सिपाही सो गए और कारागार के दरवाजे और हथकड़ियां खुल गईं। जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो कंस का बंदी गृह प्रकाशमान हो उठा। वासुदेव कृष्ण को गोकुल में नंद के घर छोड़ आए। श्रीकृष्ण का जन्म होते ही श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में झूम उठे।

इस अवसर पर श्री झूमरनाथ धाम के महंत चंद्रशेखर दास महाराज, पंकज शास्त्री बरोदाडांग, रामगोपाल मिश्र, बृजेश मिश्र, हरीराम मिश्र, संदीप मिश्र, रामसहाय तिवारी, रूपनारायण मलैया, रामनारायण मलैया, सत्यनारायण मलैया, विशाल मलैया, राजेश मलैया, आनंद मलैया, आकाश, विकास आदि लोग मौजूद रहे।
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