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विचार गोष्ठी में पेश कीं कविताएं
Mon, 11 Feb 2019 01:09 AM IST
Pragyan dubey
lalitpur
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Published by: Pragyan dubey
Updated Mon, 11 Feb 2019 01:09 AM IST
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vasant panchmi
- फोटो : amar ujala
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विचार गोष्ठी में पेश कीं कविताएं
ललितपुर। रविवार को मड़ावरा में करुणा इंटरनेशनल केंद्र पर वसंत पंचमी के अवसर पर सेवानिवृत्त प्रवक्ता रमेशचंद्र जैन की अध्यक्षता में विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें वसंत पंचमी के महत्व के बारे में जानकारी दी। गोष्ठी में उन्होंने बताया कि वसंत पंचमी पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा होती है। इसमें महिलाएं पीले वस्त्र धारण करतीं हैं। वसंत पंचमी के त्योहार से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है। महामंत्री शैलेष तिवारी ने कहा कि वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा आराधना की जाती है। वसंत ऋतु तथा पंचमी का अर्थ शुक्ल पक्ष का पांचवां दिन माना है। भारतीय पंचांग के अनुसार यह त्योहार माघ के महीने में मनाया जाता है। शीलचंद्र शास्त्री ने कहा कि बसंत के आगमन से मौसम सुहावना हो जाता है। वृक्षों में नये पत्ते आने लगते हैं। खेत सरसों के फूलों से भरे पीले दिखाई देते हैं। राग रंग का उत्सव मनाने के लिए यह ऋतु सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है और इसे ऋतुराज कहा गया है। इस दौरान डा. सुनील संचय, हरिशंकर सोनी, संयोजक पुष्पेंद्र जैन, रमेशचंद्र जैन, अखिलेश श्रीवास्तव, पुष्पेंद्र जैन, अवध किशोर सोनी, राजीव बजाज व शीलचंद्र जैन मौजूद रहे।
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ललितपुर। रविवार को मड़ावरा में करुणा इंटरनेशनल केंद्र पर वसंत पंचमी के अवसर पर सेवानिवृत्त प्रवक्ता रमेशचंद्र जैन की अध्यक्षता में विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें वसंत पंचमी के महत्व के बारे में जानकारी दी। गोष्ठी में उन्होंने बताया कि वसंत पंचमी पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा होती है। इसमें महिलाएं पीले वस्त्र धारण करतीं हैं। वसंत पंचमी के त्योहार से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है। महामंत्री शैलेष तिवारी ने कहा कि वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा आराधना की जाती है। वसंत ऋतु तथा पंचमी का अर्थ शुक्ल पक्ष का पांचवां दिन माना है। भारतीय पंचांग के अनुसार यह त्योहार माघ के महीने में मनाया जाता है। शीलचंद्र शास्त्री ने कहा कि बसंत के आगमन से मौसम सुहावना हो जाता है। वृक्षों में नये पत्ते आने लगते हैं। खेत सरसों के फूलों से भरे पीले दिखाई देते हैं। राग रंग का उत्सव मनाने के लिए यह ऋतु सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है और इसे ऋतुराज कहा गया है। इस दौरान डा. सुनील संचय, हरिशंकर सोनी, संयोजक पुष्पेंद्र जैन, रमेशचंद्र जैन, अखिलेश श्रीवास्तव, पुष्पेंद्र जैन, अवध किशोर सोनी, राजीव बजाज व शीलचंद्र जैन मौजूद रहे।