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नगद में कम, चेक से मिलेंगे ज्यादा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 17 Dec 2016 12:52 AM IST
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mandi news lalitpur
- फोटो : demo
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गल्ला मंडी में किसानों से जिंस की खरीद नगद में एक हजार रुपये कम की जा रही है। शुक्रवार को मंडी में इंदौरी मूंगफली नगद में चार हजार रुपये व चैक से भुगतान पर पांच हजार रुपये तक में बिकी। जिंस खरीद में भुगतान प्रणाली की शर्तों से सबसे अधिक नुकसान किसानों को हो रहा है। वह मजबूूरी में एक हजार रुपये कम भाव में गल्ला बेच रहे हैं।
नोटबंदी के बाद गल्ला व्यापारियों में जिंस खरीद में भुगतान प्रणाली पर आपसी मतभेद के बाद जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद चेक से भुगतान पर सहमति बन गई थी। आढ़तियों ने मंडी में खोल दी है, लेकिन अब गल्ला मंडी में जिंस की खरीद आढ़तियों द्वारा अलग-अलग नगद व चेक दोनों प्रकार से की जा रही है। इसकेे तहत नगद में जिंस की खरीद किसानों से सीधे एक हजार रुपए प्रति क्विंटल कम में की जा रही है। जबकि वही जिंस चेक से भुगतान को राजी होने पर एक हजार रुपये अधिक में खरीद हो रही है।
शुक्रवार को गल्ला मंडी में इंदौरी मूंगफली नगद में किसानों से सीधे चार हजार रुपये प्रति क्विंटल में खरीदी गई, जबकि उसी इंदौरी मूंगफली को बिल के आधार पर चेक से भुगतान पर पांच हजार रुपये प्रति
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क्विंटल में खरीदा गया। शुक्रवार को गल्ला मंडी में एक दुकान पर करीब सौ क्विंटल इंदौरी मूंगफली चार हजार रुपये प्रति क्विंटल में खरीदी गई है। इसी प्रकार गेहूं नगद में 1600 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि चेक से भुगतान पर 1750 रुपए में खरीद हुई। जवा की खरीद भी नगद में 1800 रुपये प्रति क्विंटल और चेक से भुगतान पर 1950 रुपये प्रति क्विंटल, वहीं मक्का की नगद में खरीद 1150 रुपए
और बिल के आधार पर चेक से भुगतान पर 1350 रुपये तक में खरीद की गई है।
जिंस खरीद की भुगतान प्रणाली से सबसे अधिक नुकसान किसानों को हो रहा है। बैंक की परेशानियों और घरेलू कार्यों, खेती को डीजल लेने व अन्य कार्यों को नगदी की जरूरत होने के चलते किसानों से गल्ला मंडी में नगदी में जिंस की बेचनेज पर एक हजार रुपये कम में खरीद की जा रही है। जबकि यदि किसान थोड़ा भी साहस बांध लेता है, तो उसी जिंस की कीमत बिल के आधार पर चेक से भुगतान पर एक हजार रुपये अधिक में खरीद की जा रही है। यह सब आढ़तियों ने विभिन्न प्रकार की पेचीदगियों से बचने और मुनाफा कमाने के उद्देश्य से तय कर रखा है।
मजबूरी का उठाया जा रहा फायदा
ललितपुर। ब्लॉक जखौरा अंतर्गत ग्राम बरखिरिया निवासी राजेश कुमार मिश्रा ने बताया कि गल्ला मंडी में नगद से एक हजार रुपये तक कम में गल्ला लिया जा रहा है। रुपयों की जरूरत है इसलिए वह जल्दी में उड़द बेचने आए हैं। उनके साथ में इमलिया, पाचौनी के भी किसान यहां पहुंचे हैं, जो कम दाम में उड़द बेचने को तैयार हैं। हालांकि सरसों रोक लिया है।
डीजल के लिए रुपयों की है जरूरत
खिरिया छतारा निवासी कृपाल सिंह ने बताया कि वह तीन लोग मंडी में चेक से भुगतान हो रहा है। जबकि नगदी से काफी कम अंतर से जिंस की खरीद की जा रही है। वह मंडी में चार क्विंटल उड़द लेकर पहुंचे हैं। लेकिन नगदी में अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं। खेती की सिंचाई के लिए डीजल की जरुरत है, जिसके लिए नगद रुपए के लिए वह कम दाम में भी जिंस उड़द बेच रहे हैं।
मजबूरी को फायदा उठा रहे आढ़तियां
ग्राम खिरिया छतारा निवासी स्वरुप, हरिदास और संतोष कुशवाहा ने बताया कि गल्ला मंडी में उड़द लेकर आए हैं, लेकिन यहां व्यापारी किसानों की मजबूरी का लाभ उठा रहे हैं। नगद में कम रुपये दे रहे हैं, जबकि उसी उड़द को पांच हजार रुपये में भी लिया जा रहा है। घरेलू व खेती की जरुरतों के लिए वह खुले बाजार में भी जिंस बेचने को तैयार हैं। फिर बाजार में किसी भी भाव में बिके तो वो बेच देंगे।
कोई भी किसान इस प्रकार की शिकायत लेकर नहीं पहुंच रहा है। पूरी आढ़त चेक से हो रही है। यदि कोई भी किसान इस प्रकार की शिकायत करता है तो उस व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-अनिल कुमार, मंडी सचिव।
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नोटबंदी के बाद गल्ला व्यापारियों में जिंस खरीद में भुगतान प्रणाली पर आपसी मतभेद के बाद जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद चेक से भुगतान पर सहमति बन गई थी। आढ़तियों ने मंडी में खोल दी है, लेकिन अब गल्ला मंडी में जिंस की खरीद आढ़तियों द्वारा अलग-अलग नगद व चेक दोनों प्रकार से की जा रही है। इसकेे तहत नगद में जिंस की खरीद किसानों से सीधे एक हजार रुपए प्रति क्विंटल कम में की जा रही है। जबकि वही जिंस चेक से भुगतान को राजी होने पर एक हजार रुपये अधिक में खरीद हो रही है।
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शुक्रवार को गल्ला मंडी में इंदौरी मूंगफली नगद में किसानों से सीधे चार हजार रुपये प्रति क्विंटल में खरीदी गई, जबकि उसी इंदौरी मूंगफली को बिल के आधार पर चेक से भुगतान पर पांच हजार रुपये प्रति
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क्विंटल में खरीदा गया। शुक्रवार को गल्ला मंडी में एक दुकान पर करीब सौ क्विंटल इंदौरी मूंगफली चार हजार रुपये प्रति क्विंटल में खरीदी गई है। इसी प्रकार गेहूं नगद में 1600 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि चेक से भुगतान पर 1750 रुपए में खरीद हुई। जवा की खरीद भी नगद में 1800 रुपये प्रति क्विंटल और चेक से भुगतान पर 1950 रुपये प्रति क्विंटल, वहीं मक्का की नगद में खरीद 1150 रुपए
और बिल के आधार पर चेक से भुगतान पर 1350 रुपये तक में खरीद की गई है।
जिंस खरीद की भुगतान प्रणाली से सबसे अधिक नुकसान किसानों को हो रहा है। बैंक की परेशानियों और घरेलू कार्यों, खेती को डीजल लेने व अन्य कार्यों को नगदी की जरूरत होने के चलते किसानों से गल्ला मंडी में नगदी में जिंस की बेचनेज पर एक हजार रुपये कम में खरीद की जा रही है। जबकि यदि किसान थोड़ा भी साहस बांध लेता है, तो उसी जिंस की कीमत बिल के आधार पर चेक से भुगतान पर एक हजार रुपये अधिक में खरीद की जा रही है। यह सब आढ़तियों ने विभिन्न प्रकार की पेचीदगियों से बचने और मुनाफा कमाने के उद्देश्य से तय कर रखा है।
मजबूरी का उठाया जा रहा फायदा
ललितपुर। ब्लॉक जखौरा अंतर्गत ग्राम बरखिरिया निवासी राजेश कुमार मिश्रा ने बताया कि गल्ला मंडी में नगद से एक हजार रुपये तक कम में गल्ला लिया जा रहा है। रुपयों की जरूरत है इसलिए वह जल्दी में उड़द बेचने आए हैं। उनके साथ में इमलिया, पाचौनी के भी किसान यहां पहुंचे हैं, जो कम दाम में उड़द बेचने को तैयार हैं। हालांकि सरसों रोक लिया है।
डीजल के लिए रुपयों की है जरूरत
खिरिया छतारा निवासी कृपाल सिंह ने बताया कि वह तीन लोग मंडी में चेक से भुगतान हो रहा है। जबकि नगदी से काफी कम अंतर से जिंस की खरीद की जा रही है। वह मंडी में चार क्विंटल उड़द लेकर पहुंचे हैं। लेकिन नगदी में अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं। खेती की सिंचाई के लिए डीजल की जरुरत है, जिसके लिए नगद रुपए के लिए वह कम दाम में भी जिंस उड़द बेच रहे हैं।
मजबूरी को फायदा उठा रहे आढ़तियां
ग्राम खिरिया छतारा निवासी स्वरुप, हरिदास और संतोष कुशवाहा ने बताया कि गल्ला मंडी में उड़द लेकर आए हैं, लेकिन यहां व्यापारी किसानों की मजबूरी का लाभ उठा रहे हैं। नगद में कम रुपये दे रहे हैं, जबकि उसी उड़द को पांच हजार रुपये में भी लिया जा रहा है। घरेलू व खेती की जरुरतों के लिए वह खुले बाजार में भी जिंस बेचने को तैयार हैं। फिर बाजार में किसी भी भाव में बिके तो वो बेच देंगे।
कोई भी किसान इस प्रकार की शिकायत लेकर नहीं पहुंच रहा है। पूरी आढ़त चेक से हो रही है। यदि कोई भी किसान इस प्रकार की शिकायत करता है तो उस व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-अनिल कुमार, मंडी सचिव।