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कानून ताक पर, कमाई पर ध्यान
lalitpur
Updated Sun, 05 Feb 2017 12:57 AM IST
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कानून ताक पर, कमाई पर ध्यान
- फोटो : demo
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ललितपुर।
कई दुकानदार बोनस और टारगेट के चलते कानून को ताक पर रखकर बिना आईडी की जांच किए मोबाइल सिम कार्ड धड़ाधड़ बेच रहे हैं। इस तरह के धंधे में लिप्त ऐसे दुकानदारों और डिस्ट्रीब्यूटर को जेल की हवा खानी पड़ सकती है। पुलिस अधीक्षक डी. प्रदीप कुमार ने ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
फर्जी आईडी पर एक्टिवेट हो रहे सिम कार्डों में नेटवर्क कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूटर से लेकर रिटेलर तक की मिलीभगत होती है। फर्जी फोटो और एड्रेस पर किसी भी व्यक्ति को फर्जी डेमो सिम बेचा जा रहा है, जिसका इस्तेमाल गैर कानूनी कामों में हो रहा है। अधिकतर फर्जी आईडी पर ली गई सिमों का बदमाश फिरौती, रंगदारी, धमकी देने, महिलाओं को परेशान करने व अन्य आपराधिक वारदातों को अंजाम देने में इस्तेमाल करते हैं। पुलिस जब कार्रवाई करती है, तो आरोपी आसानी से बच निकलते हैं। लेकिन वे बेगुनाह लोग पुलिस के कानूनी जाल में फंस जाते हैं, जिनके नाम पर सिम जारी की गई होती है।
पूर्व में जनपद में ऐसी कई आपराधिक घटनाएं घटित हो चुकी है, जिनकी जांच के दौरान फर्जी आईडी पर सिम कार्डों के चलने के मामले सामने आए हैं। इसको संज्ञान में लेते हुए पुलिस अधीक्षक डी. प्रदीप कुमार ने यह सख्त निर्देश दिए हैं। अब ऐसे मामले सामने आने पर फर्जी सिम का उपयोग करने वालों के साथ-साथ डिस्ट्रीब्यूटर व रिटेलर के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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डिस्ट्रीब्यूटर पहली कड़ी
डिस्ट्रीब्यूटर के यहां से दुकानों पर जाने वाले एजेंट एक्टीवेट सिम दुकानदारों को देते हैं। लिफाफे में उपभोक्ता और सिम विक्रेता की जानकारी के लिए भरे जाने वाले फार्म की सिर्फ एक कॉपी होती है। पूरा डिटेल पहले से ही भरा रहता है। जैसे ही ग्राहक बिना आईडी के सिम लेने पहुंचता है, मनमाने रुपये लेकर उसे सिम दे दिया जाता है। अब उपभोक्ता अपने मोबाइल पर सिम लगाता है तो कस्टमर केयर को फर्जी व्यक्ति की जानकारी यानी जो रीसिप्ट (रसीद) में लिखा होता है वह दी जाती है, ताकि सिम बंद न हो। इसका उपभोक्ताओं द्वारा भी विरोध नहीं किया जाता है, क्योंकि भारतीय दूरसंचार नियामक आयोग (टीआरएआई) के यह सख्त आदेश हैं कि एक व्यक्ति की आईडी पर अधिकतम नौ सिम कार्ड ही जारी हो सकते हैं, ऐसे में उपभोकता को अपनी सहूलियत दिखाई देती है और वह यह फर्जी सिम लेने से परहेज भी नहीं करते हैं।
कमीशन का है पूरा खेल
फर्जी सिम का व्यापार एक्टीवेशन में मिलने वाले कमीशन के लिए किया जा रहा है। जानकार बताते हैं कि कंपनी एजेंट के माध्यम से विक्रेताओं को एमआरपी से अधिक दामों में सिम उपलब्ध कराती है, जिसमें बैलेंस और दो महीने का टैरिफ होता है। इसमें पहले से आईडी लगी होती है और यह सिम भी एक्टीवेट होता है। दुकानदार इस सिम को एमआरपी से ज्यादा कीमत में बेचता है। इसमें बैलेंस और टैरिफ वाउचर रिचार्ज किया जाता है। इसका कमीशन उस व्यक्ति को जाता है जिसके द्वारा सिम एक्टीवेट होता है। बिना आईडी के सिम में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन और फिर दुकानदार का मुनाफा जुड़ा होता है।
जब भी सिम खरीदें, तो अपनी ही आईडी यूज करें। साथ ही कस्टमर केयर पर चेक करवाएं कि जो आईडी आप ने लगाई हैं सिम उसी पर एक्टीवेट हुई हैं कि नहीं। ऐसा न होने पर इसकी शिकायत पुलिस के पास कर सकते हैं। इससे फर्जी कारोबार करने वालों के चेहरे बेनकाब होंगे और उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डी. प्रदीप कुमार
पुलिस अधीक्षक, ललितपुर।
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कई दुकानदार बोनस और टारगेट के चलते कानून को ताक पर रखकर बिना आईडी की जांच किए मोबाइल सिम कार्ड धड़ाधड़ बेच रहे हैं। इस तरह के धंधे में लिप्त ऐसे दुकानदारों और डिस्ट्रीब्यूटर को जेल की हवा खानी पड़ सकती है। पुलिस अधीक्षक डी. प्रदीप कुमार ने ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
फर्जी आईडी पर एक्टिवेट हो रहे सिम कार्डों में नेटवर्क कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूटर से लेकर रिटेलर तक की मिलीभगत होती है। फर्जी फोटो और एड्रेस पर किसी भी व्यक्ति को फर्जी डेमो सिम बेचा जा रहा है, जिसका इस्तेमाल गैर कानूनी कामों में हो रहा है। अधिकतर फर्जी आईडी पर ली गई सिमों का बदमाश फिरौती, रंगदारी, धमकी देने, महिलाओं को परेशान करने व अन्य आपराधिक वारदातों को अंजाम देने में इस्तेमाल करते हैं। पुलिस जब कार्रवाई करती है, तो आरोपी आसानी से बच निकलते हैं। लेकिन वे बेगुनाह लोग पुलिस के कानूनी जाल में फंस जाते हैं, जिनके नाम पर सिम जारी की गई होती है।
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पूर्व में जनपद में ऐसी कई आपराधिक घटनाएं घटित हो चुकी है, जिनकी जांच के दौरान फर्जी आईडी पर सिम कार्डों के चलने के मामले सामने आए हैं। इसको संज्ञान में लेते हुए पुलिस अधीक्षक डी. प्रदीप कुमार ने यह सख्त निर्देश दिए हैं। अब ऐसे मामले सामने आने पर फर्जी सिम का उपयोग करने वालों के साथ-साथ डिस्ट्रीब्यूटर व रिटेलर के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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डिस्ट्रीब्यूटर पहली कड़ी
डिस्ट्रीब्यूटर के यहां से दुकानों पर जाने वाले एजेंट एक्टीवेट सिम दुकानदारों को देते हैं। लिफाफे में उपभोक्ता और सिम विक्रेता की जानकारी के लिए भरे जाने वाले फार्म की सिर्फ एक कॉपी होती है। पूरा डिटेल पहले से ही भरा रहता है। जैसे ही ग्राहक बिना आईडी के सिम लेने पहुंचता है, मनमाने रुपये लेकर उसे सिम दे दिया जाता है। अब उपभोक्ता अपने मोबाइल पर सिम लगाता है तो कस्टमर केयर को फर्जी व्यक्ति की जानकारी यानी जो रीसिप्ट (रसीद) में लिखा होता है वह दी जाती है, ताकि सिम बंद न हो। इसका उपभोक्ताओं द्वारा भी विरोध नहीं किया जाता है, क्योंकि भारतीय दूरसंचार नियामक आयोग (टीआरएआई) के यह सख्त आदेश हैं कि एक व्यक्ति की आईडी पर अधिकतम नौ सिम कार्ड ही जारी हो सकते हैं, ऐसे में उपभोकता को अपनी सहूलियत दिखाई देती है और वह यह फर्जी सिम लेने से परहेज भी नहीं करते हैं।
कमीशन का है पूरा खेल
फर्जी सिम का व्यापार एक्टीवेशन में मिलने वाले कमीशन के लिए किया जा रहा है। जानकार बताते हैं कि कंपनी एजेंट के माध्यम से विक्रेताओं को एमआरपी से अधिक दामों में सिम उपलब्ध कराती है, जिसमें बैलेंस और दो महीने का टैरिफ होता है। इसमें पहले से आईडी लगी होती है और यह सिम भी एक्टीवेट होता है। दुकानदार इस सिम को एमआरपी से ज्यादा कीमत में बेचता है। इसमें बैलेंस और टैरिफ वाउचर रिचार्ज किया जाता है। इसका कमीशन उस व्यक्ति को जाता है जिसके द्वारा सिम एक्टीवेट होता है। बिना आईडी के सिम में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन और फिर दुकानदार का मुनाफा जुड़ा होता है।
जब भी सिम खरीदें, तो अपनी ही आईडी यूज करें। साथ ही कस्टमर केयर पर चेक करवाएं कि जो आईडी आप ने लगाई हैं सिम उसी पर एक्टीवेट हुई हैं कि नहीं। ऐसा न होने पर इसकी शिकायत पुलिस के पास कर सकते हैं। इससे फर्जी कारोबार करने वालों के चेहरे बेनकाब होंगे और उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डी. प्रदीप कुमार
पुलिस अधीक्षक, ललितपुर।