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सड़कों व गलियों में पसरा कीचड़
lalitpur
Updated Sun, 14 Aug 2016 01:12 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। बरसात के कारण शहर की कच्ची व जर्जर सड़कें कीचड़ से बजबजा रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को काफी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। बजट के अभाव से जूझ रही नगर पालिका ने सड़कों पर हो चुके गड्ढों का मौरंग से भराव करा दिया है, लेकिन यह भी बरसात के पानी से कीचड़ का रूप लेने लगी है। सड़कों पर जमे इस कीचड़ के छींटे राहगीरों के कपड़ों के साथ-साथ नगर पालिका के जन प्रतिनिधियों की गुडविल पर भी पड़ रहे हैं।
पक्की सड़क की बाट जोह रहीं गलियों की कच्ची सड़कें बरसात के कारण कीचड़ में तब्दील हो चुकी हैं। सबसे अधिक खराब स्थिति मलिन बस्तियों व शहरी सीमा क्षेत्रों पर बसे मुहल्लों की गलियों में है। शहर में स्थित खाली मैदानों व खेतों में अब बस्ती बसने लगी है, कई इलाके ऐसे हैं जहां पर लोगों ने अपने मकान तो बना लिए हैं, लेकिन सुविधा के लिए न तो सड़क है और न ही जल निकासी के लिए पक्की नालियों की कोई व्यवस्था है। ऐसी बस्तियों की गलियों के कच्चे रास्ते बरसात के कारण कीचड़ में तब्दील हो गए हैं और जलभराव की स्थिति बन रही है।
वहीं, शहर के ऐसे कई मुहल्ले हैं जहां की पक्की सड़कें बड़े-बड़े गड्ढों में बदल गई है और टूटी व क्षतिग्रस्त पड़ी नालियों से जलनिकासी की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसी स्थिति में स्थानीय लोगों व राहगीरों दोनों को ही भारी मुसीबत झेलनी पड़ रही है। नगर पालिका विगत वर्ष से आर्थिक तंगी की स्थिति से जूझ रही है, इस कारण विभाग इन जर्जर सड़कों व नालियों की मरम्मत नहीं करा पा रहा है और न ही सड़कों का निर्माण करा पा रहा है। शहर की मलिन बस्तियों व मुहल्लों नेहरू नगर, गांधीनगर, आजादपुरा, लेड़ियापुरा, रामनगर, पिसनारी, घुसयाना आदि क्षेत्रों की गलियों की सड़कों की स्थिति काफी बदतर है।
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सड़कों का कीचड़ लगा रहा चुनावी वर्ष पर दाग
बजट के अभाव से जूझ रही नगर पालिका ने शहर की मुख्य सड़कों व गलियों पर बन चुके बड़े-बड़े गड्ढों पर मौरंग का भराव करा दिया है। लेकिन बरसात के कारण यह कीचड़ में तब्दील हो गई है। नगर पालिका बोर्ड के लिए यह चुनावी वर्ष है। इस चुनावी वर्ष के दौर में विभाग के पास विकास कार्य कराने के लिए बजट ही नहीं है। बजट के अभाव में नगर पालिका ने पिछले करीब एक वर्ष से कोई भी विकास कार्य नहीं कराया है। शहर के कई निर्माण कार्य अधर में अटके हुए हैं। सड़कों व नालियों के निर्माण नहीं होने के कारण लोगों को काफी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। नगर पालिका के कई पार्षद ऐसे हैं, जिन्होंने अपने वार्डों के मुख्य निर्माण कार्यों को चुनावी वर्ष के लिए बचा कर रखा था, लेकिन पार्षदों पर बजट के अभाव की मार भारी पड़ रही है। सभी को अपने-अपने वार्डों के विकास कार्यों की चिंता सताने लगी है। इसके अलावा पार्षदों के चुनावी विरोधी भी इसका फायदा उठाने के पीछे नहीं हट रहे हैं।
नपा अध्यक्ष ने भेजा सड़कों के लिए 4.85 करोड़ का प्रस्ताव
नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने शहर की सड़कों के निर्माण के लिए नगरीय सड़क सुधार योजना के तहत विगत माह करीब 4.85 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। राज्य वित्त आयोग से तो विभाग विकास कार्य के लिए धनराशि नहीं बचा पा रहा है, शासन द्वारा नगरीय सड़क सुधार योजना में बजट की स्वीकृति मिलने पर ही विकास कार्य की आस जुड़ी हुई है। नगर पालिका पर ठेकेदारों के लाखों रुपये बकाया हैं।
नहीं बच रहे विकास खाते में पैसे
नगर पालिका को राज्यवित्त आयोग से प्रतिमाह लगभग 1.45 करोड़ रुपये शासन की ओर से मिलते हैं। इसी धनराशि से विभाग को अपने विभागीय कर्मचारियों का वेतन व पेंशन अदा करनी पड़ती है। विभाग प्रत्येक माह अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन व पेंशन पर 1.10 करोड़ रुपये व्यय करता है, इसमें कार्यालय अधिकारियों, लिपिकों, कर्मचारियों, स्थायी सफाई कर्मचारी, संविदा सफाई कर्मचारी व आउट सोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया जाता है। वहीं, लाखों रुपये प्रत्येक माह वाहनों में डीजल, रखरखाव आदि में खर्च होजाते हैं। विभाग के पास पिछले एक वर्ष से केवल पेंच वर्क कराने के लिए ही कुछ लाख रुपये शेष बचते हैं। यह स्थिति विगत वर्ष संविदा कर्मचारियों का मानदेय बढ़ने से हुई है। वहीं, शासन द्वारा 51 संविदा सफाई कर्मचारियों की भर्ती के बाद विभाग पर 7.65 लाख रुपये प्रति माह का अतिरिक्त व्यय बढ़ जाएगा।
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पक्की सड़क की बाट जोह रहीं गलियों की कच्ची सड़कें बरसात के कारण कीचड़ में तब्दील हो चुकी हैं। सबसे अधिक खराब स्थिति मलिन बस्तियों व शहरी सीमा क्षेत्रों पर बसे मुहल्लों की गलियों में है। शहर में स्थित खाली मैदानों व खेतों में अब बस्ती बसने लगी है, कई इलाके ऐसे हैं जहां पर लोगों ने अपने मकान तो बना लिए हैं, लेकिन सुविधा के लिए न तो सड़क है और न ही जल निकासी के लिए पक्की नालियों की कोई व्यवस्था है। ऐसी बस्तियों की गलियों के कच्चे रास्ते बरसात के कारण कीचड़ में तब्दील हो गए हैं और जलभराव की स्थिति बन रही है।
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वहीं, शहर के ऐसे कई मुहल्ले हैं जहां की पक्की सड़कें बड़े-बड़े गड्ढों में बदल गई है और टूटी व क्षतिग्रस्त पड़ी नालियों से जलनिकासी की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसी स्थिति में स्थानीय लोगों व राहगीरों दोनों को ही भारी मुसीबत झेलनी पड़ रही है। नगर पालिका विगत वर्ष से आर्थिक तंगी की स्थिति से जूझ रही है, इस कारण विभाग इन जर्जर सड़कों व नालियों की मरम्मत नहीं करा पा रहा है और न ही सड़कों का निर्माण करा पा रहा है। शहर की मलिन बस्तियों व मुहल्लों नेहरू नगर, गांधीनगर, आजादपुरा, लेड़ियापुरा, रामनगर, पिसनारी, घुसयाना आदि क्षेत्रों की गलियों की सड़कों की स्थिति काफी बदतर है।
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सड़कों का कीचड़ लगा रहा चुनावी वर्ष पर दाग
बजट के अभाव से जूझ रही नगर पालिका ने शहर की मुख्य सड़कों व गलियों पर बन चुके बड़े-बड़े गड्ढों पर मौरंग का भराव करा दिया है। लेकिन बरसात के कारण यह कीचड़ में तब्दील हो गई है। नगर पालिका बोर्ड के लिए यह चुनावी वर्ष है। इस चुनावी वर्ष के दौर में विभाग के पास विकास कार्य कराने के लिए बजट ही नहीं है। बजट के अभाव में नगर पालिका ने पिछले करीब एक वर्ष से कोई भी विकास कार्य नहीं कराया है। शहर के कई निर्माण कार्य अधर में अटके हुए हैं। सड़कों व नालियों के निर्माण नहीं होने के कारण लोगों को काफी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। नगर पालिका के कई पार्षद ऐसे हैं, जिन्होंने अपने वार्डों के मुख्य निर्माण कार्यों को चुनावी वर्ष के लिए बचा कर रखा था, लेकिन पार्षदों पर बजट के अभाव की मार भारी पड़ रही है। सभी को अपने-अपने वार्डों के विकास कार्यों की चिंता सताने लगी है। इसके अलावा पार्षदों के चुनावी विरोधी भी इसका फायदा उठाने के पीछे नहीं हट रहे हैं।
नपा अध्यक्ष ने भेजा सड़कों के लिए 4.85 करोड़ का प्रस्ताव
नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने शहर की सड़कों के निर्माण के लिए नगरीय सड़क सुधार योजना के तहत विगत माह करीब 4.85 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। राज्य वित्त आयोग से तो विभाग विकास कार्य के लिए धनराशि नहीं बचा पा रहा है, शासन द्वारा नगरीय सड़क सुधार योजना में बजट की स्वीकृति मिलने पर ही विकास कार्य की आस जुड़ी हुई है। नगर पालिका पर ठेकेदारों के लाखों रुपये बकाया हैं।
नहीं बच रहे विकास खाते में पैसे
नगर पालिका को राज्यवित्त आयोग से प्रतिमाह लगभग 1.45 करोड़ रुपये शासन की ओर से मिलते हैं। इसी धनराशि से विभाग को अपने विभागीय कर्मचारियों का वेतन व पेंशन अदा करनी पड़ती है। विभाग प्रत्येक माह अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन व पेंशन पर 1.10 करोड़ रुपये व्यय करता है, इसमें कार्यालय अधिकारियों, लिपिकों, कर्मचारियों, स्थायी सफाई कर्मचारी, संविदा सफाई कर्मचारी व आउट सोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया जाता है। वहीं, लाखों रुपये प्रत्येक माह वाहनों में डीजल, रखरखाव आदि में खर्च होजाते हैं। विभाग के पास पिछले एक वर्ष से केवल पेंच वर्क कराने के लिए ही कुछ लाख रुपये शेष बचते हैं। यह स्थिति विगत वर्ष संविदा कर्मचारियों का मानदेय बढ़ने से हुई है। वहीं, शासन द्वारा 51 संविदा सफाई कर्मचारियों की भर्ती के बाद विभाग पर 7.65 लाख रुपये प्रति माह का अतिरिक्त व्यय बढ़ जाएगा।