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लॉकडाउन से अब तक घटी 65 फीसदी कुष्ठ रोगियों की संख्या
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अस्पताल
- फोटो : ???????
ललितपुर। लॉकडाउन के चलते जिले में 65 फीसदी कुष्ठ रोगियों की संख्या कम हो गई हैं। मरीजों की संख्या में कमी आ रही कमी से विभागीय अफसर भी हैरान हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिरकार मरीजों की संख्या घटने का कारण क्या है? मरीज स्वस्थ हो गए हैं या कहां है। इन्हें खोजने में भी विभाग असमर्थ नजर आ रहा है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग लगातार कुष्ठ रोगियों को चिह्नित करने के लिए अभियान चलाता है। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में ओपीडी से भी कुष्ठ रोगियों को चिह्नित किया जाता है। प्रतिमाह लगभग दस रोगियों का पंजीयन किया जाता है, इन रोगियों को जिला मुख्यालय, सीएमओ कार्यालय पर स्थिति कुष्ठ रोगी कार्यालय से दवा दी जाती है। इसके अलावा ब्लॉक स्तर पर सीएचसी व पीएचसी से भी दवा देने की सुविधा की गई है।
लेकिन बीते माहों से देश में फैली महामारी के चलते शासन ने 22 मार्च से सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद कर दी है। इससे कुष्ठ रोगी चिह्नित नहीं हो पा रहे हैं। स्थिति यह है कि बीते वर्ष 2019 में मार्च माह में 18 रोगी चिह्नित किए गए, अप्रैल माह में आठ, मई में सात और जून में 19 रोगी। इस तरह चार माह में 52 मरीज चिह्नित किए गए थे। इनमें प्रारंभिक कुष्ठ रोगियों की संख्या 20 रही। इसके साथ ही संक्रामक कुष्ठ रोगियों की संख्या 32 रही। वहीं, इस वर्ष कोरोना काल में मार्च में 11 और अप्रैल में एक भी रोगी चिह्नित नहीं हो सका। मई में तीन और जून में चार रोगी ही चिह्नित हुए। इस तरह चार माह में कुल 18 रोगी चिह्नित हुए है। रोगियों की संख्या कम होने को लेकर विभाग भी नहीं समझ पा रहा है कि मरीज स्वास्थ्य हो गए हैं, या फिर दवा नहीं मिल पा रही है।
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दो प्रकार का होता है कुष्ठ रोग
प्रारंभिक अवस्था में होने वाला कुष्ठ रोग असंक्रामक होता है, जिसे पासी बेसीलेसरी (पीबी) कहते हैं। पीबी रोगी से यह रोग दूसरों में नहीं फैलता है। छह माह तक दवा का सेवन करने से रोगी स्वस्थ हो सकता है। इस दौरान बीच में ही दवा छोड़ने से वह रोगी (एमबी) संक्रामक बन जाता है। इस तरह के मरीजों को एक वर्ष तक दवा का सेवन करना होता है। एमबी मरीज के छींकने से दूसरों में फैल जाता है।
कुष्ठ रोग के मरीज चिह्नीकरण अभियान में चिह्नित हो जाते हैं। इसके अलावा अस्पतालों में ओपीडी के माध्यम से चिह्नित होते हैं। लेकिन ओपीडी सेवा बंद होने से मरीज चिह्नित नहीं हो पा रहे हैं।
- डॉ. आर के सोनी, जिला कुष्ठ रोग अधिकारी
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जिले में स्वास्थ्य विभाग लगातार कुष्ठ रोगियों को चिह्नित करने के लिए अभियान चलाता है। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में ओपीडी से भी कुष्ठ रोगियों को चिह्नित किया जाता है। प्रतिमाह लगभग दस रोगियों का पंजीयन किया जाता है, इन रोगियों को जिला मुख्यालय, सीएमओ कार्यालय पर स्थिति कुष्ठ रोगी कार्यालय से दवा दी जाती है। इसके अलावा ब्लॉक स्तर पर सीएचसी व पीएचसी से भी दवा देने की सुविधा की गई है।
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लेकिन बीते माहों से देश में फैली महामारी के चलते शासन ने 22 मार्च से सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद कर दी है। इससे कुष्ठ रोगी चिह्नित नहीं हो पा रहे हैं। स्थिति यह है कि बीते वर्ष 2019 में मार्च माह में 18 रोगी चिह्नित किए गए, अप्रैल माह में आठ, मई में सात और जून में 19 रोगी। इस तरह चार माह में 52 मरीज चिह्नित किए गए थे। इनमें प्रारंभिक कुष्ठ रोगियों की संख्या 20 रही। इसके साथ ही संक्रामक कुष्ठ रोगियों की संख्या 32 रही। वहीं, इस वर्ष कोरोना काल में मार्च में 11 और अप्रैल में एक भी रोगी चिह्नित नहीं हो सका। मई में तीन और जून में चार रोगी ही चिह्नित हुए। इस तरह चार माह में कुल 18 रोगी चिह्नित हुए है। रोगियों की संख्या कम होने को लेकर विभाग भी नहीं समझ पा रहा है कि मरीज स्वास्थ्य हो गए हैं, या फिर दवा नहीं मिल पा रही है।
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दो प्रकार का होता है कुष्ठ रोग
प्रारंभिक अवस्था में होने वाला कुष्ठ रोग असंक्रामक होता है, जिसे पासी बेसीलेसरी (पीबी) कहते हैं। पीबी रोगी से यह रोग दूसरों में नहीं फैलता है। छह माह तक दवा का सेवन करने से रोगी स्वस्थ हो सकता है। इस दौरान बीच में ही दवा छोड़ने से वह रोगी (एमबी) संक्रामक बन जाता है। इस तरह के मरीजों को एक वर्ष तक दवा का सेवन करना होता है। एमबी मरीज के छींकने से दूसरों में फैल जाता है।
कुष्ठ रोग के मरीज चिह्नीकरण अभियान में चिह्नित हो जाते हैं। इसके अलावा अस्पतालों में ओपीडी के माध्यम से चिह्नित होते हैं। लेकिन ओपीडी सेवा बंद होने से मरीज चिह्नित नहीं हो पा रहे हैं।
- डॉ. आर के सोनी, जिला कुष्ठ रोग अधिकारी