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Lalitpur News: क्षत्रिय महासभा ने मनाई महाराणा प्रताप की जयंती
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ललितपुर। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा और राजपूत करणी सेना की ओर से वृहस्पतिवार को महाराजा महाराणा प्रताप की जयंती मनाई गई। इसमें वक्ताओं ने उनके पराक्रम को याद किया और उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि भारत भूमि के रक्षार्थ वीरता शौर्य और मातृभूमि के प्रति अगाध श्रद्धा आज भी हर देशवासियों के लिए आदर्श है। अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार, नौ मई 1540 को महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था लेकिन अधिकांश देशवासियों जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष की तृतीया को ही महाराणा प्रताप का जन्मोत्सव मनाते हैं।
बुंदेलखंड अध्यक्ष सुरेंद्र पाल सिंह बघेल ने कहा कि उन्होंने सर्व समाज को लेकर मुगल सेना को कई बार पराजित किया था। जिला महामंत्री भगवत सिंह बैस ने कहा कि राणाप्रताप अपने साथ 207 किलो वजन लेकर चलते थे, जिसमें उनका भाला, ढाल, तलवार, कवच आदि थे। उनका प्रिय घोड़ा चेतक आगामी संकेत दे देता था, जिससे उन्हें दुश्मनों को पराजित करने में सफलता मिलती थी।
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करणी सेना जिला प्रभारी राजेंद्र सिंह परमार ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रताप ने भील, गाड़िया लोहार आदि विभिन्न सर्व समाज को लेकर अनेकों बार युद्ध किए और विजय रहे। इस दौरान जिलाध्यक्ष बृजेंद्र सिंह परमार, हरपाल सिंह चंदेल, घनश्याम सिंह, अमृत सिंह तोमर, पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, आकाश राजा चौहान आदि रहे।
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वक्ताओं ने कहा कि भारत भूमि के रक्षार्थ वीरता शौर्य और मातृभूमि के प्रति अगाध श्रद्धा आज भी हर देशवासियों के लिए आदर्श है। अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार, नौ मई 1540 को महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था लेकिन अधिकांश देशवासियों जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष की तृतीया को ही महाराणा प्रताप का जन्मोत्सव मनाते हैं।
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बुंदेलखंड अध्यक्ष सुरेंद्र पाल सिंह बघेल ने कहा कि उन्होंने सर्व समाज को लेकर मुगल सेना को कई बार पराजित किया था। जिला महामंत्री भगवत सिंह बैस ने कहा कि राणाप्रताप अपने साथ 207 किलो वजन लेकर चलते थे, जिसमें उनका भाला, ढाल, तलवार, कवच आदि थे। उनका प्रिय घोड़ा चेतक आगामी संकेत दे देता था, जिससे उन्हें दुश्मनों को पराजित करने में सफलता मिलती थी।
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करणी सेना जिला प्रभारी राजेंद्र सिंह परमार ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रताप ने भील, गाड़िया लोहार आदि विभिन्न सर्व समाज को लेकर अनेकों बार युद्ध किए और विजय रहे। इस दौरान जिलाध्यक्ष बृजेंद्र सिंह परमार, हरपाल सिंह चंदेल, घनश्याम सिंह, अमृत सिंह तोमर, पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, आकाश राजा चौहान आदि रहे।