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बेहतर का था भरोसा, जीवन किया बद्तर
अमर उजाला ब्यूूराो ललितपुर
Updated Sun, 10 Apr 2016 12:49 AM IST
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अावास याोजना
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। झोपड़ियों व कच्चे घरों में जीवन यापन करने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं के साथ अपने घर का सपना दिखाकर ठगा गया है। उनका जीवन स्तर बेहतर बनाने का वादा कर प्रशासन ने उसे बद्तर कर दिया है। राजकीय महाविद्यालय के पास बनी दो कांशीराम कालोनियों में रहने वाले सैकड़ों परिवारों को बिजली की सुविधा नसीब नहीं है। पानी के लिए उन्हें काफी संघष करना पड़ता है, वहीं कालोनी तक जाने के लिए सड़क भी नहीं है।
शहरी क्षेत्र के गरीब लोगों को आवास और अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पूर्ववर्ती मायावती सरकार ने आवासीय कालोनी का निर्माण कराया था। कालोनी बनवाकर लोगों को यह आश्वासन दिया गया था कि उन्हें अपने मकान के साथ बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं सुगमता के साथ मुहैया कराई जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। नवीन गल्ला मंडी के पीछे स्थित वार्ड नंबर 07 में राजकीय महाविद्यालय के पास दो मान्यवर कांशीराम आवासीय कालोनी बनी हुई हैं। इनमें से एक कालोनी के आवास गत वर्ष ही लाभार्थियों को आवंटित की गई थीं। यह कालोनी शहर में बनी अन्य कांशीराम कालोनियों की अपेक्षा सबसे बड़ी है। इसमें तीन मंजिल वाले 42 ब्लाक हैं, जिनमें 504 परिवार निवास कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों को आवास भले ही आवंटित कर दिए हैं, लेकिन यहां पर पेयजल, बिजली व सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर बसी इस कालोनी में पानी की पाइप लाइन की कोई व्यवस्था नहीं है। कालोनी की छतों पर टंकी तो रखी है, लेकिन इन्हें भरने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
यहां रहने वाले 504 परिवार आधा दर्जन हैंडपंपों पर निर्भर हैं। अन्य दो हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। ऊपर की मंजिल पर रहने वाले लोगों को हैंडपंप से पानी भरकर ऊपर तक ले जाना पड़ता है, जिससे उनको काफी दिक्कत आती है। इतना ही नहीं यहां बिजली तक की व्यवस्था नहीं है। सूरज डूबते ही 500 परिवार अंधेरे में डूब जाते हैं। घरों में लैंप व दीपक जलाकर लोग अपने घरों में उजाला करते हैं। बिजली नहीं होने के कारण लोगों को पंखा व कूलर की हवा नहीं मिल पा रही है। शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप शुरू हो जाता है। कालोनी के करीब 100 मीटर दूरी तक कोई पेड़ भी नहीं है, जिससे प्राकृतिक हवा भी यहां के लोगों को नसीब नहीं हो रही। बिजली के साथ-साथ कालोनी तक पहुंचने के लिए सड़क की व्यवस्था नहीं है। आधा किमी से अधिक दूरी कच्चे रास्ते से सफर करनी पड़ती है, केवल कालोनी परिसर में ही सड़क का निर्माण किया गया है।
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टंकी बनी है, पर कोई सहारा नहीं
नई कालोनी के पास पुरानी कांशीराम कालोनी बनी है, यहां पर भी पेयजल व्यवस्था हैंडपंपों पर ही निर्भर है। यह कालोनी करीब पांच वर्ष पुरानी है। इसमें चार मंजिल के 24 ब्लाक बने हैं, प्रत्येक ब्लाक में 16 आवास बने हैं। इस कालोनी में कुल 384 परिवार निवास करते हैं। कालोनी के निर्माण के समय कालोनी परिसर में पेयजल के लिए टंकी का निर्माण कराया गया था, लेकिन टंकी के पानी की सुविधा सभी परिवार के लोगों को नहीं मिल पर रही है। टंकी से प्रतिदिन पानी की सप्लाई नहीं दी जाती है और जब सप्लाई दी जाती है तो पानी केवल भूतल तक ही पहुंचता है। लोगों को हैंडपंप से पानी भरकर चौथी मंजिल तक ले जाना पड़ता है, जिसमें काफी समस्या आती है।
प्लास्टिक की टंकियां हुई गायब
आवासों में नलों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक ब्लाक पर प्लास्टिक की टंकिया रखी हुई थीं, जिससे आवासों में नलों की सप्लाई दी गई थी। टंकियों तक पानी नहीं पहुंचने के कारण पिछले पांच वर्षों में इनका बिल्कुल भी उपयोग नहीं हुआ। शोपीस बनी प्रत्येक ब्लाकों की टंकियों को लोगों ने उठा लिया है। कुछ लोग उसको अपने निजी उपयोग में ले रहे हैं या फिर बेच दी हैं। यहां से गायब हुई लगभग एक सैकड़ा टंकियों की कोई जानकारी ही नहीं है।
बिजली के अभाव में घरों में लैंप जलाकर उजाले की व्यवस्था करते हैं, शासन से मिलने वाला पूरा मिट्टी का तेल लैंप व लालटेन में खत्म हो जाता है। गर्मी के कारण बच्चे परेशान हो जाते हैं। हाथ वाले पंखे से हवा करके बच्चों सुला पाते हैं। यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी नरक के समान है।
- तारा बाई
कांशीराम कालोनी निवासी
तीसरी मंजिल पर आवास है, एक दिन में कम से कम 20 बाल्टी पानी ऊपर चढ़ाना पड़ता है। यही स्थिति पूरी कालोनी की है। पुरुष तो अपने घरों के बाहर सो जाते हैं, लेकिन महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली नहीं होने कारण शाम होते ही अंधेरा हो जाता है, जिससे सुरक्षा का भी भय लगा रहता है। बिजली, पानी, हवा, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के बिना यह पक्के मकान किसी काम के नहीं है।
- महेश कुमार पंथ
कांशीराम कालोनी निवासी
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शहरी क्षेत्र के गरीब लोगों को आवास और अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पूर्ववर्ती मायावती सरकार ने आवासीय कालोनी का निर्माण कराया था। कालोनी बनवाकर लोगों को यह आश्वासन दिया गया था कि उन्हें अपने मकान के साथ बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं सुगमता के साथ मुहैया कराई जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। नवीन गल्ला मंडी के पीछे स्थित वार्ड नंबर 07 में राजकीय महाविद्यालय के पास दो मान्यवर कांशीराम आवासीय कालोनी बनी हुई हैं। इनमें से एक कालोनी के आवास गत वर्ष ही लाभार्थियों को आवंटित की गई थीं। यह कालोनी शहर में बनी अन्य कांशीराम कालोनियों की अपेक्षा सबसे बड़ी है। इसमें तीन मंजिल वाले 42 ब्लाक हैं, जिनमें 504 परिवार निवास कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों को आवास भले ही आवंटित कर दिए हैं, लेकिन यहां पर पेयजल, बिजली व सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर बसी इस कालोनी में पानी की पाइप लाइन की कोई व्यवस्था नहीं है। कालोनी की छतों पर टंकी तो रखी है, लेकिन इन्हें भरने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
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यहां रहने वाले 504 परिवार आधा दर्जन हैंडपंपों पर निर्भर हैं। अन्य दो हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। ऊपर की मंजिल पर रहने वाले लोगों को हैंडपंप से पानी भरकर ऊपर तक ले जाना पड़ता है, जिससे उनको काफी दिक्कत आती है। इतना ही नहीं यहां बिजली तक की व्यवस्था नहीं है। सूरज डूबते ही 500 परिवार अंधेरे में डूब जाते हैं। घरों में लैंप व दीपक जलाकर लोग अपने घरों में उजाला करते हैं। बिजली नहीं होने के कारण लोगों को पंखा व कूलर की हवा नहीं मिल पा रही है। शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप शुरू हो जाता है। कालोनी के करीब 100 मीटर दूरी तक कोई पेड़ भी नहीं है, जिससे प्राकृतिक हवा भी यहां के लोगों को नसीब नहीं हो रही। बिजली के साथ-साथ कालोनी तक पहुंचने के लिए सड़क की व्यवस्था नहीं है। आधा किमी से अधिक दूरी कच्चे रास्ते से सफर करनी पड़ती है, केवल कालोनी परिसर में ही सड़क का निर्माण किया गया है।
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टंकी बनी है, पर कोई सहारा नहीं
नई कालोनी के पास पुरानी कांशीराम कालोनी बनी है, यहां पर भी पेयजल व्यवस्था हैंडपंपों पर ही निर्भर है। यह कालोनी करीब पांच वर्ष पुरानी है। इसमें चार मंजिल के 24 ब्लाक बने हैं, प्रत्येक ब्लाक में 16 आवास बने हैं। इस कालोनी में कुल 384 परिवार निवास करते हैं। कालोनी के निर्माण के समय कालोनी परिसर में पेयजल के लिए टंकी का निर्माण कराया गया था, लेकिन टंकी के पानी की सुविधा सभी परिवार के लोगों को नहीं मिल पर रही है। टंकी से प्रतिदिन पानी की सप्लाई नहीं दी जाती है और जब सप्लाई दी जाती है तो पानी केवल भूतल तक ही पहुंचता है। लोगों को हैंडपंप से पानी भरकर चौथी मंजिल तक ले जाना पड़ता है, जिसमें काफी समस्या आती है।
प्लास्टिक की टंकियां हुई गायब
आवासों में नलों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक ब्लाक पर प्लास्टिक की टंकिया रखी हुई थीं, जिससे आवासों में नलों की सप्लाई दी गई थी। टंकियों तक पानी नहीं पहुंचने के कारण पिछले पांच वर्षों में इनका बिल्कुल भी उपयोग नहीं हुआ। शोपीस बनी प्रत्येक ब्लाकों की टंकियों को लोगों ने उठा लिया है। कुछ लोग उसको अपने निजी उपयोग में ले रहे हैं या फिर बेच दी हैं। यहां से गायब हुई लगभग एक सैकड़ा टंकियों की कोई जानकारी ही नहीं है।
बिजली के अभाव में घरों में लैंप जलाकर उजाले की व्यवस्था करते हैं, शासन से मिलने वाला पूरा मिट्टी का तेल लैंप व लालटेन में खत्म हो जाता है। गर्मी के कारण बच्चे परेशान हो जाते हैं। हाथ वाले पंखे से हवा करके बच्चों सुला पाते हैं। यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी नरक के समान है।
- तारा बाई
कांशीराम कालोनी निवासी
तीसरी मंजिल पर आवास है, एक दिन में कम से कम 20 बाल्टी पानी ऊपर चढ़ाना पड़ता है। यही स्थिति पूरी कालोनी की है। पुरुष तो अपने घरों के बाहर सो जाते हैं, लेकिन महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली नहीं होने कारण शाम होते ही अंधेरा हो जाता है, जिससे सुरक्षा का भी भय लगा रहता है। बिजली, पानी, हवा, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के बिना यह पक्के मकान किसी काम के नहीं है।
- महेश कुमार पंथ
कांशीराम कालोनी निवासी