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सिंचाई के अलावा सब कुछ हो रहा
lalitpur
Updated Fri, 15 Apr 2016 01:03 AM IST
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कचनाोदा बांध्ा
- फोटो : amar ujala
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हेड-सिंचाई के अलावा सब कुछ हो रहा
सबहेड- नहरों की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। किसानों को सिंचाई संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए कचनौदा बांध से सिंचाई के अलावा सारे काम हो रहे हैं। बांध की तलहटी में करोड़ों रुपये खर्च कर हेलीपेड, पार्क, वोटिंग लेक, पुलिस चौकी का निर्माण किया गया है, जबकि किसानों के लिए जरूरी नहरों की जमीन का अधिग्रहण करने की सुध भी सिंचाई विभाग को नहीं है।
कचनौदा बांध से 1,080 हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई संसाधन उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया था। सिंचाई के लिए चार किमी लंबी नहरों का निर्माण 35 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना था, लेकिन अभी तक एक इंच जमीन नहीं ली गई है। हालांकि, दर्शाने के लिए बांध की तलहटी से दांयी व बाई नहर का कुछ सौ मीटर निर्माण किया गया है। बजट के अभाव में नहरों का निर्माण नहीं हो पाने का दुखड़ा रोने वाले सिंचाई विभाग ने करोड़ों रुपए खर्च केवल सौंदर्यीकरण, विश्रामगृह व हेलीपेड बना दिया। कचनौदा बांध के आसपास के गांवों में सैकड़ों एकड़ खेतों में पानी के अभाव में फसल बोई तक नहीं गई।
हेलीपेड व चौकी वाला पहला बांध
प्रदेश में सबसे ज्यादा बांध जनपद में है। जनपद वासियों ने कचनौदा बांध जैसा हाल कभी बांध का नहीं देखा है। जनपद के साथ प्रदेश का यह पहला ऐसा बांध है, जहां पर हेलीपेड बनाया गया है। किसानों का सवाल है कि आखिर यह हेलीपेड किसके लिए बनाया गया है। जनपद में कई बार वीआईपी अतिथियों के लिए अस्थाई हेलीपेड बनाए गए हैं, लेकिन कचनौदा बांध पर लाखों रुपये खर्च करके स्थायी हेलीपेड बनाया गया है। वहीं, कचनौदा बांध जनपद के एक दर्जन बांधों में पहला बांध है, जहां पर पुलिस चौकी स्थापित की गई है।
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लिखकर दो, तब मिलेगा मुआवजा
सिंचाई निर्माण खंड (तृतीय) के अधिकारियों ने किसानों को मुआवजा बांटने से ज्यादा दिलचस्पी निर्माण कार्य में दिखाई है। एक जनवरी 2016 से सरकार के नए नियमों के मुताबिक मुआवजा सर्किल रेट से अधिकतम चार गुना तक बांटा जाएगा। नए नियम के कारण अब मुआवजा वितरण में करीब ढाई सौ करोड़ से ज्यादा रुपए के बजट की जरुरत है। इसलिए विभाग के कर्मचारी किसानों पर दबाव बना रहे हैं, कि लिखित में दो कि विभाग द्वारा तय मुआवजा से संतुष्ट हैं, तो मुआवजा दे दिया जाएगा। नए नियम के मुताबिक बजट बांटने में विभाग को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बांध बना है किसके लिए
गुगरवारा गांव निवासी बुर्जुग किसान आशाराम कचनौदा बांध के स्पिल- वे के पास भरे पानी में अपनी भैंसों को पानी पिलाते हुए मिले। बांध के बारे में पूछने पर वह फट पड़ते हैं और कहते हैं कि आखिर सरकार ने यह बांध किसके लिए बनाया है। उनकी सात एकड़ जमीन बांध के डूब क्षेत्र में सिंचाई विभाग ने अधिग्रहित की है, जिसका मुआवजा उन्हें 95 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से मिला है। वह कहते हैं कि अपनी इतनी उम्र में सजनाम नदी को सूखा नहीं देखा, लेकिन बांध के बन जाने के बाद पहली बार नदी पूर्ण रुप से सूूख चुकी है। पिछले साल बांध में काफी पानी था, लेकिन सिंचाई विभाग ने पूरा पानी बेच दिया और किसानों को एक बूंद भी पानी उपलब्ध नहीं हो पाया है।
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किसानों साथ हुआ छल
किसानों के मुआवजे के लिए संघर्ष करने वाले टीकरा तिवारी निवासी रासबिहारी तिवारी बताते हैं, कि बांध के नाम पर किसानों के साथ छल हुआ है। किसानों की जमीनें ले ली गईं, लेकिन पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। जब विभाग ने नहरें ही नहीं बनाई हैं, तो किसानों को पानी कहां से मिल सकेगा।
कचनौंदा बांध के रिवाइज स्टीमेट को शासन के पास भेजा गया है, जिसे मंजूरी मिलने पर किसानों को मुआवजा उपलब्ध करा दिया जाएगा।
- इंजी. गोपाल जी
अधिशासी अभियंता
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कचनौंदा बांध: मजदूरी मांगने पर हटा दिया
ललितपुर। सात वर्षों से कचनौंदा बांध परियोजना पर काम कर रहे कर्मियों को मजदूरी की मांग करने पर हटा दिया गया। कर्मचारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पैसा दिलाने व वापस नौकरी दिलाने की मांग की है।
पीड़ितों ने बताया कि वह कचनौंदा बांध पर वर्ष 2007 से काम कर रहे थे। पिछले वर्ष नौ महीने का पैसा नहीं मिलने पर उन्होंने सबंधित अधिकारियों से पैसे की मांग की, तो उन्हें नौकरी से ही निकाल दिया गया। इस मामले की शिकायत श्रम प्रवर्तन विभाग से की गई। 28 जनवरी को श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने दोनों पक्षों को बुलाया था, लेकिन केवल शिकायतकर्ता ही विभाग पहुंचे, जबकि सिंचाई विभाग के अधिकारी सुनवाई के लिए नहीं पहुंचे। पीड़ितों ने जिलाधिकारी से नौ माह का बकाया पैसा दिलाने की मांग की है। पैसा न मिलने से पूरा परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। ज्ञापन सौंपने वालों में दीपक सिंह, कोमल सिंह आदि शामिल रहे। इस संबंध में सिंचाई निर्माण खंड (तृतीय) के अधशासी अभियंता इंजी. गोपाल जी ने बताया कि मामला श्रम विभाग में चल रहा है। विभाग जो भी आदेश करेगा उसका पालन किया जाएगा।
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सबहेड- नहरों की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। किसानों को सिंचाई संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए कचनौदा बांध से सिंचाई के अलावा सारे काम हो रहे हैं। बांध की तलहटी में करोड़ों रुपये खर्च कर हेलीपेड, पार्क, वोटिंग लेक, पुलिस चौकी का निर्माण किया गया है, जबकि किसानों के लिए जरूरी नहरों की जमीन का अधिग्रहण करने की सुध भी सिंचाई विभाग को नहीं है।
कचनौदा बांध से 1,080 हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई संसाधन उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया था। सिंचाई के लिए चार किमी लंबी नहरों का निर्माण 35 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना था, लेकिन अभी तक एक इंच जमीन नहीं ली गई है। हालांकि, दर्शाने के लिए बांध की तलहटी से दांयी व बाई नहर का कुछ सौ मीटर निर्माण किया गया है। बजट के अभाव में नहरों का निर्माण नहीं हो पाने का दुखड़ा रोने वाले सिंचाई विभाग ने करोड़ों रुपए खर्च केवल सौंदर्यीकरण, विश्रामगृह व हेलीपेड बना दिया। कचनौदा बांध के आसपास के गांवों में सैकड़ों एकड़ खेतों में पानी के अभाव में फसल बोई तक नहीं गई।
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हेलीपेड व चौकी वाला पहला बांध
प्रदेश में सबसे ज्यादा बांध जनपद में है। जनपद वासियों ने कचनौदा बांध जैसा हाल कभी बांध का नहीं देखा है। जनपद के साथ प्रदेश का यह पहला ऐसा बांध है, जहां पर हेलीपेड बनाया गया है। किसानों का सवाल है कि आखिर यह हेलीपेड किसके लिए बनाया गया है। जनपद में कई बार वीआईपी अतिथियों के लिए अस्थाई हेलीपेड बनाए गए हैं, लेकिन कचनौदा बांध पर लाखों रुपये खर्च करके स्थायी हेलीपेड बनाया गया है। वहीं, कचनौदा बांध जनपद के एक दर्जन बांधों में पहला बांध है, जहां पर पुलिस चौकी स्थापित की गई है।
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लिखकर दो, तब मिलेगा मुआवजा
सिंचाई निर्माण खंड (तृतीय) के अधिकारियों ने किसानों को मुआवजा बांटने से ज्यादा दिलचस्पी निर्माण कार्य में दिखाई है। एक जनवरी 2016 से सरकार के नए नियमों के मुताबिक मुआवजा सर्किल रेट से अधिकतम चार गुना तक बांटा जाएगा। नए नियम के कारण अब मुआवजा वितरण में करीब ढाई सौ करोड़ से ज्यादा रुपए के बजट की जरुरत है। इसलिए विभाग के कर्मचारी किसानों पर दबाव बना रहे हैं, कि लिखित में दो कि विभाग द्वारा तय मुआवजा से संतुष्ट हैं, तो मुआवजा दे दिया जाएगा। नए नियम के मुताबिक बजट बांटने में विभाग को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बांध बना है किसके लिए
गुगरवारा गांव निवासी बुर्जुग किसान आशाराम कचनौदा बांध के स्पिल- वे के पास भरे पानी में अपनी भैंसों को पानी पिलाते हुए मिले। बांध के बारे में पूछने पर वह फट पड़ते हैं और कहते हैं कि आखिर सरकार ने यह बांध किसके लिए बनाया है। उनकी सात एकड़ जमीन बांध के डूब क्षेत्र में सिंचाई विभाग ने अधिग्रहित की है, जिसका मुआवजा उन्हें 95 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से मिला है। वह कहते हैं कि अपनी इतनी उम्र में सजनाम नदी को सूखा नहीं देखा, लेकिन बांध के बन जाने के बाद पहली बार नदी पूर्ण रुप से सूूख चुकी है। पिछले साल बांध में काफी पानी था, लेकिन सिंचाई विभाग ने पूरा पानी बेच दिया और किसानों को एक बूंद भी पानी उपलब्ध नहीं हो पाया है।
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किसानों साथ हुआ छल
किसानों के मुआवजे के लिए संघर्ष करने वाले टीकरा तिवारी निवासी रासबिहारी तिवारी बताते हैं, कि बांध के नाम पर किसानों के साथ छल हुआ है। किसानों की जमीनें ले ली गईं, लेकिन पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। जब विभाग ने नहरें ही नहीं बनाई हैं, तो किसानों को पानी कहां से मिल सकेगा।
कचनौंदा बांध के रिवाइज स्टीमेट को शासन के पास भेजा गया है, जिसे मंजूरी मिलने पर किसानों को मुआवजा उपलब्ध करा दिया जाएगा।
- इंजी. गोपाल जी
अधिशासी अभियंता
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कचनौंदा बांध: मजदूरी मांगने पर हटा दिया
ललितपुर। सात वर्षों से कचनौंदा बांध परियोजना पर काम कर रहे कर्मियों को मजदूरी की मांग करने पर हटा दिया गया। कर्मचारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पैसा दिलाने व वापस नौकरी दिलाने की मांग की है।
पीड़ितों ने बताया कि वह कचनौंदा बांध पर वर्ष 2007 से काम कर रहे थे। पिछले वर्ष नौ महीने का पैसा नहीं मिलने पर उन्होंने सबंधित अधिकारियों से पैसे की मांग की, तो उन्हें नौकरी से ही निकाल दिया गया। इस मामले की शिकायत श्रम प्रवर्तन विभाग से की गई। 28 जनवरी को श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने दोनों पक्षों को बुलाया था, लेकिन केवल शिकायतकर्ता ही विभाग पहुंचे, जबकि सिंचाई विभाग के अधिकारी सुनवाई के लिए नहीं पहुंचे। पीड़ितों ने जिलाधिकारी से नौ माह का बकाया पैसा दिलाने की मांग की है। पैसा न मिलने से पूरा परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। ज्ञापन सौंपने वालों में दीपक सिंह, कोमल सिंह आदि शामिल रहे। इस संबंध में सिंचाई निर्माण खंड (तृतीय) के अधशासी अभियंता इंजी. गोपाल जी ने बताया कि मामला श्रम विभाग में चल रहा है। विभाग जो भी आदेश करेगा उसका पालन किया जाएगा।