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जूनियर साहब, सीनियर अंडर में
Lalitpur
Updated Thu, 14 Jul 2016 01:19 AM IST
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जूनियर साहब, सीनियर अंडर में
- फोटो : demo
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ललितपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां जूनियर को अफसर बना दिया गया है, वहीं सीनियर को उसके अंडर में काम कराया जा रहा है।
पिछले दिनों प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने निर्देश दिए थे, कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लेवल थ्री के चिकित्सकों की नियुक्ति चिकित्सा अधीक्षक के तौर पर की जाएगी। लेकिन, जनपद में इन आदेशों को दरकिनार सीनियर डॉक्टरों को अपने से जूनियर डॉक्टर के नीचे काम करना पड़ रहा है। अनुभवहीन जूनियर चिकित्सकों के हाथों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार की हालत जनपद में सबसे बुरी बनी हुई है। यहां पर तैनात चिकित्सा अधीक्षक डा नितिन कंसौरिया लेवल वन के अधिकारी हैं, जबकि इनके नीचे काम कर रहे बाल रोग विशेषज्ञ डा. गुप्ता लेवल थ्री व डा. अनिल शाक्य लेवल टू के अधिकारी हैं। लेकिन, शासनादेशों को दरकिनार करते हुए सीएचसी बार में सीनियर अधिकारी अपने से जूनियर अधिकारी के मातहत काम करने को मजबूर है। ऐसा ही हाल जखौरा सीएचसी, बिरधा सीएचसी का भी है, यहां पर भी लेवल वन के चिकित्सक को इंचार्ज बनाया गया है। अनुभव हीन हाथों में सीएचसी की कमान होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के प्राथमिकता वाले कार्यों में लापरवाही बरती जा रही है। पिछले दिनों मिशन इंद्रधनुष की समीक्षा बैठक में बिरधा, जखौरा व बार ब्लॉक की सबसे खराब स्थिति पाए जाने पर सबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई गई थी।
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सुविधा शुल्क न मिलने पर नहीं बंटी जेएसवाई की राशि
सीएचसी बार में अनियमितताओं का बोलबाला है। अमर उजाला ने सीएचसी बार में जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) फार्म के अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर पर बेचने की खबर को प्रकाशित किया था, इसके बाद मेडिकल पर फार्म बिकना तो बंद हो गए हैं, लेकिन जेएसवाई राशि बिना सुविधा शुल्क दिए लाभार्थियों को नहीं दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में बार सीएचसी में 1200 प्रसूताओं को जेएसवाई राशि नहीं बांटी गई है। इन लाभार्थियों में सबसे ज्यादा बानपुर थाना क्षेत्र की हैं। सुविधा शुल्क नहीं देने पर यहां की लाभार्थियों को राशि नहीं बांटी गई। बानपुर से बार तक बार-बार आने के किराए को बचाने के फेर में लाभार्थियो ने जेएसवाई राशि न लेने का मन बना लिया है। इस वर्ष भी जुलाई माह तक 450 लाभार्थियों को जेएसवाई राशि नहीं वितरित की गई है।
लेवल थ्री के अधिकारी बने बाबू
सीएचसी पर लेवल वन के अधिकारियों को तैनात करने के पीछे स्टाफ की कमी का कारण नहीं है। जनपद में करीब आठ से दस लेवल थ्री के अधिकारी मौजूद हैं। लेकिन यह अधिकारी सीएचसी पर तैनात होकर मरीजों को इलाज कराने की बजाए सीएमओ कार्यालय में तैनात रहकर बाबूगिरी करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। वहीं कुछ लेवल थ्री के अधिकारी तो ऐसे हैं, कि जो जनपद में आते ही नहीं है, बल्कि अपने गृह जनपद में जमकर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं।
नहीं रुक रहा अप-डाउन का खेल
बार, जखौरा व तालबेहट की सीएचसी पर तैनात चिकित्सा अधीक्षक केंद्र पर रुककर अपनी सेवाएं देने के बजाए अप-डाउन कर रहे हैं। बार सीएचसी पर तैनात अधीक्षक सप्ताह में केवल तीन ही उपलब्ध हो पाते हैं। सोमवार 11 बजे आना, मंगलवार चार बजे चले जाना। दो दिन का अवकाश लेने के बाद शुक्रवार 11 बजे आकर शनिवार चार बजे वापस चले जाना ही अधीक्षकों का नियम बन गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों का जूनियर अधिकारियों के नीचे काम करना नियम विरुद्ध है। यह सारी व्यवस्थाएं मेरे पद संभालने के पहले की हैं। शासनादेश के मुताबिक ही सीएचसी पर तैनाती की जाएगी व अप-डाउन करने वाले चिकित्सकों को केंद्र पर रुकने के आदेश दिए जाएंगे।
डा. प्रताप सिंह
मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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पिछले दिनों प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने निर्देश दिए थे, कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लेवल थ्री के चिकित्सकों की नियुक्ति चिकित्सा अधीक्षक के तौर पर की जाएगी। लेकिन, जनपद में इन आदेशों को दरकिनार सीनियर डॉक्टरों को अपने से जूनियर डॉक्टर के नीचे काम करना पड़ रहा है। अनुभवहीन जूनियर चिकित्सकों के हाथों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई हैं।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार की हालत जनपद में सबसे बुरी बनी हुई है। यहां पर तैनात चिकित्सा अधीक्षक डा नितिन कंसौरिया लेवल वन के अधिकारी हैं, जबकि इनके नीचे काम कर रहे बाल रोग विशेषज्ञ डा. गुप्ता लेवल थ्री व डा. अनिल शाक्य लेवल टू के अधिकारी हैं। लेकिन, शासनादेशों को दरकिनार करते हुए सीएचसी बार में सीनियर अधिकारी अपने से जूनियर अधिकारी के मातहत काम करने को मजबूर है। ऐसा ही हाल जखौरा सीएचसी, बिरधा सीएचसी का भी है, यहां पर भी लेवल वन के चिकित्सक को इंचार्ज बनाया गया है। अनुभव हीन हाथों में सीएचसी की कमान होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के प्राथमिकता वाले कार्यों में लापरवाही बरती जा रही है। पिछले दिनों मिशन इंद्रधनुष की समीक्षा बैठक में बिरधा, जखौरा व बार ब्लॉक की सबसे खराब स्थिति पाए जाने पर सबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई गई थी।
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सीएचसी बार में अनियमितताओं का बोलबाला है। अमर उजाला ने सीएचसी बार में जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) फार्म के अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर पर बेचने की खबर को प्रकाशित किया था, इसके बाद मेडिकल पर फार्म बिकना तो बंद हो गए हैं, लेकिन जेएसवाई राशि बिना सुविधा शुल्क दिए लाभार्थियों को नहीं दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में बार सीएचसी में 1200 प्रसूताओं को जेएसवाई राशि नहीं बांटी गई है। इन लाभार्थियों में सबसे ज्यादा बानपुर थाना क्षेत्र की हैं। सुविधा शुल्क नहीं देने पर यहां की लाभार्थियों को राशि नहीं बांटी गई। बानपुर से बार तक बार-बार आने के किराए को बचाने के फेर में लाभार्थियो ने जेएसवाई राशि न लेने का मन बना लिया है। इस वर्ष भी जुलाई माह तक 450 लाभार्थियों को जेएसवाई राशि नहीं वितरित की गई है।
लेवल थ्री के अधिकारी बने बाबू
सीएचसी पर लेवल वन के अधिकारियों को तैनात करने के पीछे स्टाफ की कमी का कारण नहीं है। जनपद में करीब आठ से दस लेवल थ्री के अधिकारी मौजूद हैं। लेकिन यह अधिकारी सीएचसी पर तैनात होकर मरीजों को इलाज कराने की बजाए सीएमओ कार्यालय में तैनात रहकर बाबूगिरी करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। वहीं कुछ लेवल थ्री के अधिकारी तो ऐसे हैं, कि जो जनपद में आते ही नहीं है, बल्कि अपने गृह जनपद में जमकर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं।
नहीं रुक रहा अप-डाउन का खेल
बार, जखौरा व तालबेहट की सीएचसी पर तैनात चिकित्सा अधीक्षक केंद्र पर रुककर अपनी सेवाएं देने के बजाए अप-डाउन कर रहे हैं। बार सीएचसी पर तैनात अधीक्षक सप्ताह में केवल तीन ही उपलब्ध हो पाते हैं। सोमवार 11 बजे आना, मंगलवार चार बजे चले जाना। दो दिन का अवकाश लेने के बाद शुक्रवार 11 बजे आकर शनिवार चार बजे वापस चले जाना ही अधीक्षकों का नियम बन गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों का जूनियर अधिकारियों के नीचे काम करना नियम विरुद्ध है। यह सारी व्यवस्थाएं मेरे पद संभालने के पहले की हैं। शासनादेश के मुताबिक ही सीएचसी पर तैनाती की जाएगी व अप-डाउन करने वाले चिकित्सकों को केंद्र पर रुकने के आदेश दिए जाएंगे।
डा. प्रताप सिंह
मुख्य चिकित्सा अधिकारी