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Lalitpur News: यहां के जटायू जाएंगे गोरखपुर के वल्चर प्रजनन केंद्र
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ललितपुर। देवगढ़ वन क्षेत्र में महावीर वन्य जीव बिहार कैमूर मिर्जापुर से संचालित किया जा रहा है। यहां गिद्ध की कई कॉलोनियां (घोसला) हैं। गिद्धों के संरक्षण के लिए यहां निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। जंगलों में किंग विल्ड प्रजाति के गिद्ध भी हैं, जो प्रदेश में बहुत की कम संख्या में मौजूद हैं। ऐसी दुर्लभ प्रजाति के जीवों को बढ़ाने के लिए सरकार ने गोरखपुर में वल्चर प्रजनन केंद्र खोला है। प्रजनन केंद्र के लिए जनपद से दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों को मांगा गया है। चार जोड़े गिद्ध वहां भेजे जाने हैं, इसके लिए वन्य जीव बिहार के लोग तैयारी कर रहे हैं। स्वच्छंद भ्रमण करने वाले पक्षी होने के कारण अभी तक इन्हें भेजा नहीं जा सका है।
देवगढ़ वन क्षेत्र में करीब 1362 हेक्टेयर क्षेत्र में महावीर वन्य जीव बिहार है। यहां कई पशु-पक्षी निवास करते हैं। पक्षी राज जटायू के वंशजों के प्राकृतिक वास भी हैं। वैसे तो यहां गिद्धों की कई प्रजाति है, लेकिन दो प्रकार के गिद्ध प्रमुख रूप से देखे जाते हैं, इनमें लांग विल्ड व किंग विल्ड शामिल हैं। किंग विल्ड दुर्लभ प्रजाति का गिद्ध है, इसे राजा गिद्ध भी कहा जाता है। गिद्ध प्राकृतिक सफाई कर्मी होते हैं। कई वर्षों से यहां गिद्धों के संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। यही कारण है कि यहां सौ से अधिक गिद्ध मौजूद हैं। जंगल में गिद्धों के करीब आधा सैकड़ा घोसले देखे जा सकते हैं। प्राकृतिक संतुलन के लिए गिद्धाें की संख्या बढ़ाने को सरकार अहम कदम उठा रही है, जिसके चलते गोरखपुर में वल्चर प्रजनन केंद्र बनाया गया है। वहां से पूरे प्रदेश से गिद्ध मांगे गए हैं। हालांकि अभी इन्हें भेजने के लिए कोई ठोस योजना विभाग ने नहीं बनाई है, लेकिन अगर कहीं और किंग गिद्ध नहीं मिला, तो जनपद से इन्हें भेजा जाएगा।
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यहां विभिन्न प्रकार के गिद्ध मौजूद हैं, इनमें किंग गिद्ध भी शामिल हैं। इन्हें महावीर वन्य जीव बिहार में संरक्षित किया गया है। गोरखपुर वल्चर प्रजनन केंद्र के लिए गिद्ध मांगे गए हैं। अभी गिद्धों को भेजने के लिए कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। विभागीय निर्देशों के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।-आरएस यादव, रेंजर महावीर वन्य जीव बिहार देवगढ़।
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देवगढ़ वन क्षेत्र में करीब 1362 हेक्टेयर क्षेत्र में महावीर वन्य जीव बिहार है। यहां कई पशु-पक्षी निवास करते हैं। पक्षी राज जटायू के वंशजों के प्राकृतिक वास भी हैं। वैसे तो यहां गिद्धों की कई प्रजाति है, लेकिन दो प्रकार के गिद्ध प्रमुख रूप से देखे जाते हैं, इनमें लांग विल्ड व किंग विल्ड शामिल हैं। किंग विल्ड दुर्लभ प्रजाति का गिद्ध है, इसे राजा गिद्ध भी कहा जाता है। गिद्ध प्राकृतिक सफाई कर्मी होते हैं। कई वर्षों से यहां गिद्धों के संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। यही कारण है कि यहां सौ से अधिक गिद्ध मौजूद हैं। जंगल में गिद्धों के करीब आधा सैकड़ा घोसले देखे जा सकते हैं। प्राकृतिक संतुलन के लिए गिद्धाें की संख्या बढ़ाने को सरकार अहम कदम उठा रही है, जिसके चलते गोरखपुर में वल्चर प्रजनन केंद्र बनाया गया है। वहां से पूरे प्रदेश से गिद्ध मांगे गए हैं। हालांकि अभी इन्हें भेजने के लिए कोई ठोस योजना विभाग ने नहीं बनाई है, लेकिन अगर कहीं और किंग गिद्ध नहीं मिला, तो जनपद से इन्हें भेजा जाएगा।
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यहां विभिन्न प्रकार के गिद्ध मौजूद हैं, इनमें किंग गिद्ध भी शामिल हैं। इन्हें महावीर वन्य जीव बिहार में संरक्षित किया गया है। गोरखपुर वल्चर प्रजनन केंद्र के लिए गिद्ध मांगे गए हैं। अभी गिद्धों को भेजने के लिए कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। विभागीय निर्देशों के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।-आरएस यादव, रेंजर महावीर वन्य जीव बिहार देवगढ़।
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