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संस्कारित मां के बच्चे होंगे संस्कारवान: आचार्यश्री
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Sun, 31 Jan 2016 12:47 AM IST
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पाली/ललितपुर। राष्ट्रसंत सारकोद्धारक आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज ने पंचकल्याणक को जीवन के लिए कल्याणकारी बताया। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में व्यक्ति अपने और पराए को भूल रहा है। मोबाइल व इंटरनेट के बढ़ते प्रचलन से इसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। गर्भ में मिलने वाले संस्कार ही जन्म-जन्मांतर तक रहते हैं और संस्कारवान बनाते हैं। मां सद्चरित्र होगी तो बच्चे भी संस्कारवान होंगे।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों के पतन से भारतीय संस्कृति दूषित हो रही है। व्यक्ति जन्म से नहीं, बल्कि कर्म से महान बनता है। गर्भ के दौरान मां को अच्छे विचारों का शंखनाद करना चाहिए। भगवान महावीर जैनियों के ही नहीं, वरन विश्व के आराध्य हैैं। उन्होंने जीवन को आदर्श और पवित्रता के लिए अहिंसा शाकाहार का जो सिद्धांत दिया, उस पर समूचा विश्व गौरवान्वित है। उन्होंने माताओं से आह्वान किया कि जीवन में गर्भपात जैसा कृत्य नहीं करें।
इससे पहले प्रात:काल अभिषेक पूजन की मांगलिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी जय निशांत भैया ने अपने सहयोगी ब्रह्मचारी अशोक लिधौरा, नितिन भैया खुरई, सनत कुमार रजवांस व धीरज भैया राहतगढ के साथ संपन्न कराईं। मध्याह्न में यंत्र पूजन, सीमंतनी क्रियाएं माताजी की गोदभराई, अधिवेशन, प्रवचन एवं मानस्तंभ शुद्धि की क्रियाएं हुईं। रात्रि में महाराजा सुदर्शन का दरबार लगा, जिसमें पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में गर्भकल्याणक क्रियाओं के प्रारंभ में माता मित्रसेन के गर्भ में श्री अरनाथ भगवान का आना और इंद्रदेव की आज्ञा से अष्टकुमारी देवियों व छप्पन कुमारिकाओं का माताजी की सेवा में संलग्न हो जाना, पुण्यवान आत्मा का इस धरा पर आने के लक्षण हैं।
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पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रमुख पात्र भगवान के माता- पिता अनंदी लाल- विमलादेवी लुहर्रा, सौधर्म इंद्र योगेंद्र जैन- नीलांजना टीकमगढ़, कुबेर गजराज रजनी मिठया तालबेहट, ईशान इंद्र सपन कोठादार, सनत कुमार, इंद्र राजकुमार समता जैन इंदौर और महेंद्र डा. प्रदीप जैन- उर्मिला छतरपुर ने मंचन के माध्यम से प्रतिष्ठा महोत्सव में भूमिका निभाई। अष्टकुमारिकाओं में सुरभि जैन गुढ़ा, कृति जैन मडावरा, आस्था जैन सागर, कृति जैन मुजफ्फरनगर, प्रियंका जैन सागर, रोशनी जैन, नेहा जैन गाजियाबाद, आकांक्षा जैन, ऋतु जैन, रुचि जैन, पायल जैन, सुप्रिया कपासिया, समीक्षा जैन, सिमरन जैन, रूबी जैन और अंजलि जैन की भूमिका रही।
महोत्सव की व्यवस्थाओं में वीरेंद्र ककरवाहा, सुनील जैन घुवारा, कैलाश जैन सोजना, डा. भरत जैन गुढा, चक्रेश जैन बल्देबगढ, धीरेंद्र जैन, अभिषेक जैन, अर्पित जैन, संजय जैन, पीयूष जैन डूंडा, राकेश जैन हटैया बडागांव, अशोक कपासिया, अजित जैन मैनवार, जयकुमार मैनवार, सुरेश जैन अंतौरिया, पवन जैन नेकोरा, राकेश जैन ऊमरी, अशोक क्रांतिकारी आदि का योगदान मिल रहा है।
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धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों के पतन से भारतीय संस्कृति दूषित हो रही है। व्यक्ति जन्म से नहीं, बल्कि कर्म से महान बनता है। गर्भ के दौरान मां को अच्छे विचारों का शंखनाद करना चाहिए। भगवान महावीर जैनियों के ही नहीं, वरन विश्व के आराध्य हैैं। उन्होंने जीवन को आदर्श और पवित्रता के लिए अहिंसा शाकाहार का जो सिद्धांत दिया, उस पर समूचा विश्व गौरवान्वित है। उन्होंने माताओं से आह्वान किया कि जीवन में गर्भपात जैसा कृत्य नहीं करें।
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इससे पहले प्रात:काल अभिषेक पूजन की मांगलिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी जय निशांत भैया ने अपने सहयोगी ब्रह्मचारी अशोक लिधौरा, नितिन भैया खुरई, सनत कुमार रजवांस व धीरज भैया राहतगढ के साथ संपन्न कराईं। मध्याह्न में यंत्र पूजन, सीमंतनी क्रियाएं माताजी की गोदभराई, अधिवेशन, प्रवचन एवं मानस्तंभ शुद्धि की क्रियाएं हुईं। रात्रि में महाराजा सुदर्शन का दरबार लगा, जिसमें पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में गर्भकल्याणक क्रियाओं के प्रारंभ में माता मित्रसेन के गर्भ में श्री अरनाथ भगवान का आना और इंद्रदेव की आज्ञा से अष्टकुमारी देवियों व छप्पन कुमारिकाओं का माताजी की सेवा में संलग्न हो जाना, पुण्यवान आत्मा का इस धरा पर आने के लक्षण हैं।
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पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रमुख पात्र भगवान के माता- पिता अनंदी लाल- विमलादेवी लुहर्रा, सौधर्म इंद्र योगेंद्र जैन- नीलांजना टीकमगढ़, कुबेर गजराज रजनी मिठया तालबेहट, ईशान इंद्र सपन कोठादार, सनत कुमार, इंद्र राजकुमार समता जैन इंदौर और महेंद्र डा. प्रदीप जैन- उर्मिला छतरपुर ने मंचन के माध्यम से प्रतिष्ठा महोत्सव में भूमिका निभाई। अष्टकुमारिकाओं में सुरभि जैन गुढ़ा, कृति जैन मडावरा, आस्था जैन सागर, कृति जैन मुजफ्फरनगर, प्रियंका जैन सागर, रोशनी जैन, नेहा जैन गाजियाबाद, आकांक्षा जैन, ऋतु जैन, रुचि जैन, पायल जैन, सुप्रिया कपासिया, समीक्षा जैन, सिमरन जैन, रूबी जैन और अंजलि जैन की भूमिका रही।
महोत्सव की व्यवस्थाओं में वीरेंद्र ककरवाहा, सुनील जैन घुवारा, कैलाश जैन सोजना, डा. भरत जैन गुढा, चक्रेश जैन बल्देबगढ, धीरेंद्र जैन, अभिषेक जैन, अर्पित जैन, संजय जैन, पीयूष जैन डूंडा, राकेश जैन हटैया बडागांव, अशोक कपासिया, अजित जैन मैनवार, जयकुमार मैनवार, सुरेश जैन अंतौरिया, पवन जैन नेकोरा, राकेश जैन ऊमरी, अशोक क्रांतिकारी आदि का योगदान मिल रहा है।