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Lalitpur News: अयोध्या आंदोलन में जेल की यातनाएं सही, पर डिगे नहीं कारसेवक

Mon, 08 Jan 2024 12:19 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jan 2024 12:19 AM IST
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Jail tortures are true in Ayodhya movement, but kar sevaks did not waver
अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान जेल में रहकर तमाम यातनाएं सही, लेकिन कारसेवक डिगे नहीं। कारसेवकों ने कहा कि 30 साल पहले जो राम मंदिर का सपना उन्होंने देखा था, वह अब साकार हो रहा है। उनके लिए राम मंदिर निर्माण का आंदाेलन आजादी के आंदोलन से कम नहीं था, लोगों ने लाठियां का सामना किया और जेल भी गए। अब जब राममंदिर का निर्माण हो रहा है और जो लोग इस आंदोलन से जुड़े रहे हैं, वे दिल से खुश हैं, क्योंकि उन्होंने सौगंध खाई थी कि जहां राम ने जन्म लिया, मंदिर वहीं बनाएंगे। इस आंदोलन में सभी वर्ग के लोग शामिल थे। अधिवक्ता से लेकर ग्रामीण इलाकों के लोगों ने भी आंदोलन में हिस्सा लिया था। पेश है कारसेवकों से बातचीत के अंश...

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बाबरी ढांचा विध्वंस के पहले सरयू के तट पर हम लोगों ने राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतिज्ञा लेकर आंदोलन आरंभ किया था। विध्वंस के बाद मेरे साथ कई अधिवक्ता साथी उरई जेल में बंद हुए।-कंछेदी लाल मालवीय, वरिष्ठ अधिवक्ता
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वर्ष 1990 में आरएसएस के बौद्धिक प्रमुख के पद पर होने के कारण जब कारसेवा का आह्वान किया तो 30 अक्टूबर की तड़के ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने पुलिस से पैदल जाने के लिए कहा, उनकी गिरफ्तारी को देख रामभक्तों में जोश आ गया। मुझे जनपद से बाहर भेजकर उरई जेल में बंद किया गया।-संतोष तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता
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अपने सैदपुर गांव के साथियों के साथ जयश्रीराम का नारा लगाते हुए निकल गए। तालबेहट में साथियों सहित गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन हमें जैसे ही बाबरी विध्वंस की सूचना मिली, तो अस्थाई जेल जय श्रीराम के नारों से गूंज गई। भगवान श्रीराम नवनिर्मित मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं, इसकी हम लोगों में खुशी है।-मुन्नालाल जैन, कारसेवक

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जयश्रीराम के नारे लगाते हुए हम लोग जा रहे थे। तालबेहट में रोककर गिरफ्तार कर लिया गया। भले ही राम मंदिर निर्माण में समय लगा, लेकिन जन्मभूमि पर रामलला का विराजमान होना हमारी भक्ति को सफल बनाता है। हम लोग जल्द ही दर्शन करने जाएंगे।-गोविंददास साहू, कारसेवक
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