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Lalitpur News: अध्यापकों की आपसी गुटबाजी या कुछ और है कारण
Mon, 03 Mar 2025 12:36 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Mon, 03 Mar 2025 12:36 AM IST
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तहसील परिसर में हुए विवाद का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। तहसील परिसर में शनिवार को एक गांव के छात्रों और अभिभावकों द्वारा विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षिका के मामले को लेकर हुए बवाल के बाद उक्त मामले की चर्चा शिक्षा विभाग सहित अन्य जगह हो रही है। लोग इस घटना की वास्तविक बजह जानना चाहते हैं।
बताते चले की शनिवार को जब छात्रों एवं अभिभावकों ने संगीन आरोप लगाते हुए संपूर्ण समाधान दिवस में बवाल काटा तो पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। शिक्षा के मंदिर में इस तरह के आरोपों को सुनकर वहां मौजूद अन्य विभागीय अधिकारी भी सन्न से रह गए। वह इसकी हकीकत की के लिए अपने अपने विचार एक दूसरे से साझा करने लगे। वही इस मामले में आरोपी पक्ष अपने को बेगुनाह बता कर पूरे मामले में विद्यालय के कुछ अध्यापकों की आपसी गुटबाजी का परिणाम बता रहे है। उनका कहना है कि पूरी योजना अध्यापकों ने गांव के कुछ दंबगों के साथ मिल कर बनाई है।
बताते चले कि करीब चार वर्ष पहले इसी विद्यालय में एक जाति विशेष पर लिखे गए स्लोगन पर विद्यालय के दो अध्यापकों को तत्कालीन बीएसए ने निलंबित कर दिया था। रविवार को विद्यालय बंद होने के कारण शिक्षा विभाग से संबंध रखने वाले इस मामले की हकीकत के लिए एक दूसरे से जानकारी जुटाते रहे। जहां कुछ अध्यापक इसे आपसी गुट बाजी बता रहे है वही कुछ का मानना है कि आरोपों में कुछ तो सत्यता होगी वरना बिना किसी ठोस कारण के ग्रामीण इतना विरोध नहीं करते।
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संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। तहसील परिसर में शनिवार को एक गांव के छात्रों और अभिभावकों द्वारा विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षिका के मामले को लेकर हुए बवाल के बाद उक्त मामले की चर्चा शिक्षा विभाग सहित अन्य जगह हो रही है। लोग इस घटना की वास्तविक बजह जानना चाहते हैं।
बताते चले की शनिवार को जब छात्रों एवं अभिभावकों ने संगीन आरोप लगाते हुए संपूर्ण समाधान दिवस में बवाल काटा तो पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। शिक्षा के मंदिर में इस तरह के आरोपों को सुनकर वहां मौजूद अन्य विभागीय अधिकारी भी सन्न से रह गए। वह इसकी हकीकत की के लिए अपने अपने विचार एक दूसरे से साझा करने लगे। वही इस मामले में आरोपी पक्ष अपने को बेगुनाह बता कर पूरे मामले में विद्यालय के कुछ अध्यापकों की आपसी गुटबाजी का परिणाम बता रहे है। उनका कहना है कि पूरी योजना अध्यापकों ने गांव के कुछ दंबगों के साथ मिल कर बनाई है।
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बताते चले कि करीब चार वर्ष पहले इसी विद्यालय में एक जाति विशेष पर लिखे गए स्लोगन पर विद्यालय के दो अध्यापकों को तत्कालीन बीएसए ने निलंबित कर दिया था। रविवार को विद्यालय बंद होने के कारण शिक्षा विभाग से संबंध रखने वाले इस मामले की हकीकत के लिए एक दूसरे से जानकारी जुटाते रहे। जहां कुछ अध्यापक इसे आपसी गुट बाजी बता रहे है वही कुछ का मानना है कि आरोपों में कुछ तो सत्यता होगी वरना बिना किसी ठोस कारण के ग्रामीण इतना विरोध नहीं करते।
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