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Lalitpur News: धरती की कोख से निकलने लगेगा आयरन, गोल्ड और रॉक फास्फेट
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। यहां खनिज संपदा की भरमार है। इस साल आयरन, गोल्ड व रॉक फास्फेट की खदानों की नीलामी हो चुकी है। कंपनी ने टेस्टिंग भी प्रारंभ कर दी है। आगामी वर्ष में इसके दोहन होने की संभावना है। इसके अलावा भी अनेक खनिज तत्व मौजूद हैं। कुछ का दोहन हो रहा है, तो कुछ के दोहन की प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है।
मड़ावरा तहसील के गिरार स्थित बड़वार में आयरन और सोने के भंडारण को मापने के लिए निजी कंपनी ने ड्रिलिंग शुरू कर दी है। भंडारण की पुष्टि के बाद ये खदानें सोना उगलेंगी। ग्राम बड़वार के 231 हेक्टेयर में तैयार इन ब्लॉकों को खनन के लिए आवंटित किया गया था। गिरार क्षेत्र में आयरन और सोना के अयस्क उपलब्धता की पुष्टि के बाद भूतत्व और खनिकर्म विभाग ने इन ब्लॉक के लिए कंपोजिट लाइसेंस की निविदा प्रक्रिया शुरू की थी। गोवा की फोमेंटो रिसोर्सेस कंपनी इसके लिए चुनी गई थी। कंपनी मैपिंग, भू-भौतिकी अध्ययन, भू-रासायनिक अध्ययन के साथ खनिज ब्लॉक में 31 बोर से छेद कर खनिज भंडारों का पता लगाएगी। वहीं, ड्रिलिंग के लिए दो कंपनी जियोलॉजी एंड माइनिंग एसोसिएट झांसी, जियोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड नागपुर को चयनित किया गया।
ड्रिलिंग के बाद आंकड़ों, विस्तृत भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और अध्ययन के आधार पर खनन की योजना बनाई है। अब तक तीन हजार मीटर तक ड्रिलिंग का कार्य पूर्ण हो गया है। तहसील मड़ावरा में ही रॉक फॉस्फेट के लिए इसे पांच ब्लॉकों में विभाजित किया गया है। पांच ब्लाकों की निविदा पूर्व में हो चुकी है। अब पांचवें और अंतिम ब्लॉक की निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है। दोहन शुरू होने से यहां कई लोगों को रोजगार मिलेगा। रॉक से निर्मित उत्पाद तैयार करने के लिए औद्योगिक इकाइयां खुलेंगी।
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गांव सौंरई में रॉक फॉस्फेट का भंडार भूगर्भ वैज्ञानिकों को वर्ष 2021 में मिला था। यहां 221 हेक्टेयर क्षेत्र में 16 लाख मिलियन टन रॉक फॉस्फेट है। इस क्षेत्र को भूतत्व खनिकर्म विभाग ने पांच खंड में बांटा था। पहला खंड पिसनारी, गोराकलां का आरएचएसएम कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड, दूसरा खंड पिसनारी टोरी लीला कृष्णा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, तीसरा खंड एचएसएम होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड, चौथा खंड सागर स्टोन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, पांचवां खंड धौरीसागर में मैमको माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड सिंहभूम झारखंड को ठेका मिला है।
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उर्वरक निर्माण के लिए है उपयुक्त : रॉक फास्फेट का भंडार उर्वरक निर्माण के लिए उपयुक्त है। जैविक खाद बनाने के लिए गोबर तथा रॉक फॉस्फेट को प्रयोग में लाया जाता है। इसकी मदद से रासायनिक क्रिया करके सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) तथा डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) तैयार किए जाते हैं। खनिज फास्फेट का सर्वाधिक प्रयोग फास्फेट उर्वरकों के निर्माण में होता है।
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ये है प्रमुख खनिज : जनपद में क्वार्ट्र्ज, पायरोफ्लाइट, डॉस्फोर, रेड ग्रेनाइट, तांबा, जिंक, लेड, प्लेटिनम मौजूद है। इसमें कुछ खनिज तत्व तांबा, जिंक, लेड व प्लेटिनम आदि ऐसे खनिज हैं, जो जनपद की धरा की कोख में तो हैं, लेकिन प्रचुर मात्रा की पुष्टि न होने के कारण उनका दोहन नहीं हो सकता है।
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आगामी वर्ष में आयरन व रॉक फॉस्फेट का दोहन होने की संभावना है। कई खनिज तत्व मौजूद होने के बाद भी प्रचुर मात्रा में न होने के कारण उनका दोहन नहीं किया जा रहा है। उनकी कीमत से ज्यादा, उनके दोहन व शोधन में खर्च हो जाएगा।-अमितोष वर्मा, जिला खनन अधिकारी।
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ललितपुर। यहां खनिज संपदा की भरमार है। इस साल आयरन, गोल्ड व रॉक फास्फेट की खदानों की नीलामी हो चुकी है। कंपनी ने टेस्टिंग भी प्रारंभ कर दी है। आगामी वर्ष में इसके दोहन होने की संभावना है। इसके अलावा भी अनेक खनिज तत्व मौजूद हैं। कुछ का दोहन हो रहा है, तो कुछ के दोहन की प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है।
मड़ावरा तहसील के गिरार स्थित बड़वार में आयरन और सोने के भंडारण को मापने के लिए निजी कंपनी ने ड्रिलिंग शुरू कर दी है। भंडारण की पुष्टि के बाद ये खदानें सोना उगलेंगी। ग्राम बड़वार के 231 हेक्टेयर में तैयार इन ब्लॉकों को खनन के लिए आवंटित किया गया था। गिरार क्षेत्र में आयरन और सोना के अयस्क उपलब्धता की पुष्टि के बाद भूतत्व और खनिकर्म विभाग ने इन ब्लॉक के लिए कंपोजिट लाइसेंस की निविदा प्रक्रिया शुरू की थी। गोवा की फोमेंटो रिसोर्सेस कंपनी इसके लिए चुनी गई थी। कंपनी मैपिंग, भू-भौतिकी अध्ययन, भू-रासायनिक अध्ययन के साथ खनिज ब्लॉक में 31 बोर से छेद कर खनिज भंडारों का पता लगाएगी। वहीं, ड्रिलिंग के लिए दो कंपनी जियोलॉजी एंड माइनिंग एसोसिएट झांसी, जियोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड नागपुर को चयनित किया गया।
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ड्रिलिंग के बाद आंकड़ों, विस्तृत भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और अध्ययन के आधार पर खनन की योजना बनाई है। अब तक तीन हजार मीटर तक ड्रिलिंग का कार्य पूर्ण हो गया है। तहसील मड़ावरा में ही रॉक फॉस्फेट के लिए इसे पांच ब्लॉकों में विभाजित किया गया है। पांच ब्लाकों की निविदा पूर्व में हो चुकी है। अब पांचवें और अंतिम ब्लॉक की निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है। दोहन शुरू होने से यहां कई लोगों को रोजगार मिलेगा। रॉक से निर्मित उत्पाद तैयार करने के लिए औद्योगिक इकाइयां खुलेंगी।
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गांव सौंरई में रॉक फॉस्फेट का भंडार भूगर्भ वैज्ञानिकों को वर्ष 2021 में मिला था। यहां 221 हेक्टेयर क्षेत्र में 16 लाख मिलियन टन रॉक फॉस्फेट है। इस क्षेत्र को भूतत्व खनिकर्म विभाग ने पांच खंड में बांटा था। पहला खंड पिसनारी, गोराकलां का आरएचएसएम कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड, दूसरा खंड पिसनारी टोरी लीला कृष्णा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, तीसरा खंड एचएसएम होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड, चौथा खंड सागर स्टोन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, पांचवां खंड धौरीसागर में मैमको माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड सिंहभूम झारखंड को ठेका मिला है।
उर्वरक निर्माण के लिए है उपयुक्त : रॉक फास्फेट का भंडार उर्वरक निर्माण के लिए उपयुक्त है। जैविक खाद बनाने के लिए गोबर तथा रॉक फॉस्फेट को प्रयोग में लाया जाता है। इसकी मदद से रासायनिक क्रिया करके सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) तथा डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) तैयार किए जाते हैं। खनिज फास्फेट का सर्वाधिक प्रयोग फास्फेट उर्वरकों के निर्माण में होता है।
ये है प्रमुख खनिज : जनपद में क्वार्ट्र्ज, पायरोफ्लाइट, डॉस्फोर, रेड ग्रेनाइट, तांबा, जिंक, लेड, प्लेटिनम मौजूद है। इसमें कुछ खनिज तत्व तांबा, जिंक, लेड व प्लेटिनम आदि ऐसे खनिज हैं, जो जनपद की धरा की कोख में तो हैं, लेकिन प्रचुर मात्रा की पुष्टि न होने के कारण उनका दोहन नहीं हो सकता है।
आगामी वर्ष में आयरन व रॉक फॉस्फेट का दोहन होने की संभावना है। कई खनिज तत्व मौजूद होने के बाद भी प्रचुर मात्रा में न होने के कारण उनका दोहन नहीं किया जा रहा है। उनकी कीमत से ज्यादा, उनके दोहन व शोधन में खर्च हो जाएगा।-अमितोष वर्मा, जिला खनन अधिकारी।