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संस्थागत प्रसव के मामले में जांच अधिकारी बदले
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 30 Sep 2016 01:24 AM IST
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hospital, lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की शाषी निकाय की बैठक में जिलाधिकारी डा रुपेश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर नाराजगी व्यक्त की।
मालूम हो कि अमर उजाला ने बार सीएचसी में घरों में हुए प्रसव को संस्थागत दिखाने की खबर को संज्ञान लेते हुए डीएम ने जांच अधिकारी को बदलते हुए अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा मुकेश दुबे को जांच सौंप दी है। उन्होंने निर्देशित किया कि जल्द इस मामले की जांच करके उन्हें रिपोर्ट सौंपी जाए। एक संस्थागत प्रसव पर हजारों रुपए का खर्च आता है। झूठे आंकड़े बनाने के फेर में झूठे संस्थागत प्रसव बनाने पर शासन को राजस्व की हानि होती है।
जिलाधिकारी ने जननी सुरक्षा योजना की समीक्षा के दौरान यह पाया कि प्रसव लाभार्थियों का कुल भुगतान 72.34 प्रतिशत किया गया है। ब्लॉक बिरधा, बार एवं जिला महिला चिकित्सालय में लाभार्थियों का भुगतान संतोषजनक नहीं पाया गया। जिलाधिकारी ने चेतावनी जारी करते हुये निर्देश दिये कि लाभार्थियों का भुगतान कर अवगत करायें। पिछले वर्ष की तुलना में ब्लॉक महरौनी एवं जिला महिला चिकित्सालय में कम प्रसव होेेने पर दोनो चिकित्सा अधीक्षकों से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये।
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वित्तीय वर्ष 2015-16 के जननी सुरक्षा योजना के तहत जिला महिला चिकित्सालय द्वारा 32 प्रतिशत, मडावरा में 52 प्रतिशत, बार में 57 प्रतिशत लाभार्थियों का भुगतान किये जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जाहिर करते हुये तीनों प्रभारियों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दिये जाने के निर्देश दिये। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अन्तर्गत यूपी एम्बुलेंस 102 व 108 द्वारा प्रसव लाभार्थियों का ड्राप बेक किया जाता है। नोडल अधिकारी डॉ मुकेश दुबे को निर्देशित किया गया कि उपरोक्त वाहनों की लॉग बुक का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। परिवार नियोजन कार्यक्रम के अन्तर्गत पुरूष नसबंदी की प्रगति असंतोषजनक होने पर ब्लॉक में कार्यरत बीसीपीएम के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी किए।
नियमित टीकाकरण के अन्तर्गत कम उपलब्धि पाये जाने पर ब्लॉक मडावरा, महरौनी, जखौरा के चिकित्सा अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था जो संतोषजनक नहीं पाया गया। जिलाधिकारी ने इन तीनों चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दिये जाने का निर्देश मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिया।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ एसके वासबानी, डॉ मुकेश चन्द्र दुबे, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ डीसी दोहरे, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ जे एस बक्शी, डीपीएम रजिया फिरोज, रीना गुप्ता व समिति के अन्य समस्त सदस्य उपस्थित थे। बैठक का संचालन डॉ डी सी दोहरे नोडल अधिकारी एनएचएम द्वारा किया गया। अंत में डॉ अजय भाले मुख्य चिकित्सा अधिकारी (कार्यवाहक) द्वारा सभी का धन्यवाद दिया गया।
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मालूम हो कि अमर उजाला ने बार सीएचसी में घरों में हुए प्रसव को संस्थागत दिखाने की खबर को संज्ञान लेते हुए डीएम ने जांच अधिकारी को बदलते हुए अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा मुकेश दुबे को जांच सौंप दी है। उन्होंने निर्देशित किया कि जल्द इस मामले की जांच करके उन्हें रिपोर्ट सौंपी जाए। एक संस्थागत प्रसव पर हजारों रुपए का खर्च आता है। झूठे आंकड़े बनाने के फेर में झूठे संस्थागत प्रसव बनाने पर शासन को राजस्व की हानि होती है।
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जिलाधिकारी ने जननी सुरक्षा योजना की समीक्षा के दौरान यह पाया कि प्रसव लाभार्थियों का कुल भुगतान 72.34 प्रतिशत किया गया है। ब्लॉक बिरधा, बार एवं जिला महिला चिकित्सालय में लाभार्थियों का भुगतान संतोषजनक नहीं पाया गया। जिलाधिकारी ने चेतावनी जारी करते हुये निर्देश दिये कि लाभार्थियों का भुगतान कर अवगत करायें। पिछले वर्ष की तुलना में ब्लॉक महरौनी एवं जिला महिला चिकित्सालय में कम प्रसव होेेने पर दोनो चिकित्सा अधीक्षकों से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये।
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वित्तीय वर्ष 2015-16 के जननी सुरक्षा योजना के तहत जिला महिला चिकित्सालय द्वारा 32 प्रतिशत, मडावरा में 52 प्रतिशत, बार में 57 प्रतिशत लाभार्थियों का भुगतान किये जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जाहिर करते हुये तीनों प्रभारियों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दिये जाने के निर्देश दिये। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अन्तर्गत यूपी एम्बुलेंस 102 व 108 द्वारा प्रसव लाभार्थियों का ड्राप बेक किया जाता है। नोडल अधिकारी डॉ मुकेश दुबे को निर्देशित किया गया कि उपरोक्त वाहनों की लॉग बुक का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। परिवार नियोजन कार्यक्रम के अन्तर्गत पुरूष नसबंदी की प्रगति असंतोषजनक होने पर ब्लॉक में कार्यरत बीसीपीएम के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी किए।
नियमित टीकाकरण के अन्तर्गत कम उपलब्धि पाये जाने पर ब्लॉक मडावरा, महरौनी, जखौरा के चिकित्सा अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था जो संतोषजनक नहीं पाया गया। जिलाधिकारी ने इन तीनों चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दिये जाने का निर्देश मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिया।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ एसके वासबानी, डॉ मुकेश चन्द्र दुबे, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ डीसी दोहरे, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ जे एस बक्शी, डीपीएम रजिया फिरोज, रीना गुप्ता व समिति के अन्य समस्त सदस्य उपस्थित थे। बैठक का संचालन डॉ डी सी दोहरे नोडल अधिकारी एनएचएम द्वारा किया गया। अंत में डॉ अजय भाले मुख्य चिकित्सा अधिकारी (कार्यवाहक) द्वारा सभी का धन्यवाद दिया गया।