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लॉकडाउन की आड़ में हो रहा अवैध कटान
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कैप्सन - जंगल से कटे हुए पेड़ के निशान
- फोटो : TALDEHATE
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तालबेहट। वन विभाग के अधिकारियों की उपेक्षा व कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते इस समय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वन संपदा का दोहन हो रहा है। खुलेआम हरे पेड़ों को काटा जा रहा है। जानकारी के बाद भी जिम्मेदार पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं।
इस समय देश में कोरोना संक्रमण चल रहा है, जिसे रोकने के लिए तीन मई तक देश में लॉकडाडन है। प्रशासनिक अमला लॉकडाउन का पालन कराने के लिए बनाई गई व्यवस्थाओं के पालन कराने में जुटा हुआ है। इसके चलते वन संपदा की रखवाली का पूरा दारोमदार वन विभाग पर आ गया है। इसका अवैध कटान करने वाले लाभ उठा रहे हैं। इस समय क्षेत्र के बिजरौठा, पारा, बादीवर, गुलेंदा हर्षपुर आदि गांवों में हरे पेड़ों का व्यापक स्तर पर अवैध कटान किया जा रहा है।
लोगों का आरोप है की इसकी सूचना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को देेने के बाद भी वह अपने आप को व्यस्त होने की बात कहकर वन विभाग के अधिकारियों को अवगत कराने की बात कहते हैं। वहीं, वन विभाग के अधिकारी क्षेत्र में तैनात कर्मचारी को ही मौके पर भेज देते हैं। ऐसी स्थिति में क्या संभव है कि वह कर्मचारी सही जांच करेगा।
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लोगों का मानना है कि वास्तविकता का पता लगाने के लिए अधिकारी जंगल का औचक निरीक्षण करके या पूर्व की वीडियोग्राफी से वर्तमान का मिलान करके सत्यता का पता लगा सकते हैं।
क्षेत्र में ईंट-भट्ठे का अच्छा कारोबार होता है। ईंटा पकाने के लिए लकड़ी और कोयला आवश्यक होता है। इस बार लॉकडाउन की वजह से कोयला बाहर से पर्याप्त मात्रा में आ नहीं पा रहा है। कुछ लोग अधिक लाभ कमाने की चाहत में कोयला के स्थान पर अधिक लकड़ी प्रयुक्त करके शीघ्र अपना भट्ठा पकाना चाहते हैं। इसलिए लकड़ी की मांग इन गांवों में बढ़ जाने से हरे पेड़ काटे जा रहे हैं।
कर्मचारी को मौके पर भेजा जाएगा। जंगल का कटान किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा।
- आरएस यादव, एसडीओ फॉरेस्ट
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इस समय देश में कोरोना संक्रमण चल रहा है, जिसे रोकने के लिए तीन मई तक देश में लॉकडाडन है। प्रशासनिक अमला लॉकडाउन का पालन कराने के लिए बनाई गई व्यवस्थाओं के पालन कराने में जुटा हुआ है। इसके चलते वन संपदा की रखवाली का पूरा दारोमदार वन विभाग पर आ गया है। इसका अवैध कटान करने वाले लाभ उठा रहे हैं। इस समय क्षेत्र के बिजरौठा, पारा, बादीवर, गुलेंदा हर्षपुर आदि गांवों में हरे पेड़ों का व्यापक स्तर पर अवैध कटान किया जा रहा है।
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लोगों का आरोप है की इसकी सूचना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को देेने के बाद भी वह अपने आप को व्यस्त होने की बात कहकर वन विभाग के अधिकारियों को अवगत कराने की बात कहते हैं। वहीं, वन विभाग के अधिकारी क्षेत्र में तैनात कर्मचारी को ही मौके पर भेज देते हैं। ऐसी स्थिति में क्या संभव है कि वह कर्मचारी सही जांच करेगा।
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लोगों का मानना है कि वास्तविकता का पता लगाने के लिए अधिकारी जंगल का औचक निरीक्षण करके या पूर्व की वीडियोग्राफी से वर्तमान का मिलान करके सत्यता का पता लगा सकते हैं।
क्षेत्र में ईंट-भट्ठे का अच्छा कारोबार होता है। ईंटा पकाने के लिए लकड़ी और कोयला आवश्यक होता है। इस बार लॉकडाउन की वजह से कोयला बाहर से पर्याप्त मात्रा में आ नहीं पा रहा है। कुछ लोग अधिक लाभ कमाने की चाहत में कोयला के स्थान पर अधिक लकड़ी प्रयुक्त करके शीघ्र अपना भट्ठा पकाना चाहते हैं। इसलिए लकड़ी की मांग इन गांवों में बढ़ जाने से हरे पेड़ काटे जा रहे हैं।
कर्मचारी को मौके पर भेजा जाएगा। जंगल का कटान किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा।
- आरएस यादव, एसडीओ फॉरेस्ट
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