{"_id":"57c88bef4f1c1b7f042cb78b","slug":"in-some-of-the-archaeological-heritage-district-off","type":"story","status":"publish","title_hn":"कमरों में बंद जनपद की पुरातत्व धरोहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कमरों में बंद जनपद की पुरातत्व धरोहर
Lalitpur
Updated Fri, 02 Sep 2016 01:43 AM IST
विज्ञापन
कमरों में बंद जनपद की पुरातत्व धरोहर
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। जनपद की धरोहर कमरों में बंद पड़ी है। पुरातत्व विभाग की संरक्षित इमारत में 134 प्राचीन मूर्तियां धूल खा रही हैं। अधिकांश समय पुरातत्व विभाग की इमारत में ताला लगा रहता है। इस कारण पर्यटकों को इन मूर्तियों की सही जानकारी भी नहीं मिल पा रही है।
पुरातात्विक धरोहरों से समृद्ध जनपद के देवगढ़ में चंदेल कालीन प्राचीन मूर्तियां, गुफाएं, दूधई की नृसिंह भगवान की प्राचीन मूर्ति, कुुचदों का शंकरजी का मंदिर, चांदपुर-जहाजपुर के शिवमंदिर, तालबेहट, बानपुर और बालाबेहट का प्राचीन किला, देवगढ़ के छठी शताब्दी के विश्व प्रसिद्ध उत्कीर्ण भगवान विष्णु, नरनारायणी दशावतार मंदिर, जैन तीर्थ क्षेत्र, शिव मंदिर, बार का मकबरा ऐसी धरोहर हैं, जिनकी कलाकृति पर्यटकों को लुभाने के लिए काफी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भी प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों के विकास और उनके संरक्षण के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की समिति गठित कर चुके हैं, जिसमें जिलाधिकारी को मुख्य पदाधिकारी बनाया गया है। 27 सितंबर को प्रदेश में विश्व पर्यटन दिवस जोरशोर से मनाने की तैयारियां भी की जा रही हैं, लेकिन जनपद में करोड़ों रुपए की लागत से नेहरू नगर में बना पुरातत्व विभाग उपेक्षित है।
यहां अधिकारियों के बैठने के लिए कार्यालय तो है, लेकिन अधिकारी महीने, दो महीनों में एक- दो चक्कर ही लगाते हैं। इमारत की देखभाल के लिए होमगार्ड जवानों की तैनाती की गई है। नियमानुसार संग्रहालय की सुरक्षा में एक होमगार्ड की ड्यूटी दिन में और दो होमगार्डों की ड्यूटी रात में होनी चाहिए। लेकिन, संग्रहालय की सुरक्षा में तैनात यह गार्ड हमेशा गायब रहते हैं।
विज्ञापन
संग्रहालय में कुचदों की भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्ति, नंदीश्वर भगवान की प्राचीन पत्थर की त्रिमूर्ति, भगवान बुध की प्राचीन प्रतिमा, भगवान विष्णु की कई रूपों की प्राचीन मूर्तियों समेत 134 प्राचीन मूर्तियां संरक्षण के लिए रखी गई हैं। लेकिन यह सभी मूर्तियां संग्रहालय प्रशासन की उदासीनता के चलते उपेक्षा का शिकार हैं। संग्रहालय में वर्षों से सफाई तक नहीं हुई है, जिससे यहां संरक्षण के लिए रखी गईं सभी 134 मूर्तियां धूल खा रही हैं। मूर्ति स्थलों पर एक इंच मोटी धूल की परत जम गई है। दीवारों व मूर्तियों पर मकड़जाल लग गया है। दीमक भी लग चुका है।
खाली हाथ लौटते सैलानी
ललितपुर। संग्रहालय घूमने आने वाले पर्यटकों को यहां निराशा ही मिलती है। आए दिन संग्रहालय बंद रहता है। मुख्य दरवाजे पर अंदर से ताला जड़ा रहता है, जिससे यहां आने वाले पर्यटकों को बिना घूमे ही वापस लौटना होता है।
बिजली, पानी कुछ नहीं
ललितपुर। करोड़ों की लागत से बनाए गए संग्रहालय में बिजली व्यवस्था के लिए कहने को तो अलग से ट्रांसफार्मर रखवाकर बिजली कनेक्शन किया गया है, पानी केे लिए बोर करवाकर मोटर भी रखवायी गई है। लेकिन यहां व्यवस्थाएं चौपट हैं। संग्रहालय के बाहर एक मात्र सौ वाट का बल्ब जरूर जलता है जिससे पता चलता है कि यह संग्रहालय है। संग्रहालय के अंदर और बाहर, गार्ड रूम में भी बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे यहां हमेशा अंधकार पसरा रहता है। वहीं पानी की मोटर वर्षों से खराब पड़ी है, शौचालय भी बंद रहते हैं, जो पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाए गए थे।
इनका कहना है-
पुरातत्व संग्रहालय की स्थिति काफी दयनीय है, इसके सुधार व पुख्ता रखरखाव के लिए लखनऊ स्थित कार्यालय में आलाधिकारियों को प्रस्ताव अप्रैल में भेजा गया था। कई रिमाइंड भेजे जा चुके हैं, लेकिन बजट के अभाव में स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। संग्रहालय की सुरक्षा जांचने के लिए औचक निरीक्षण किया जाएगा।
सुरेश कुमार दुबे, सहायक पुरातत्व अधिकारी, झांसी।
विज्ञापन
पुरातात्विक धरोहरों से समृद्ध जनपद के देवगढ़ में चंदेल कालीन प्राचीन मूर्तियां, गुफाएं, दूधई की नृसिंह भगवान की प्राचीन मूर्ति, कुुचदों का शंकरजी का मंदिर, चांदपुर-जहाजपुर के शिवमंदिर, तालबेहट, बानपुर और बालाबेहट का प्राचीन किला, देवगढ़ के छठी शताब्दी के विश्व प्रसिद्ध उत्कीर्ण भगवान विष्णु, नरनारायणी दशावतार मंदिर, जैन तीर्थ क्षेत्र, शिव मंदिर, बार का मकबरा ऐसी धरोहर हैं, जिनकी कलाकृति पर्यटकों को लुभाने के लिए काफी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भी प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों के विकास और उनके संरक्षण के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की समिति गठित कर चुके हैं, जिसमें जिलाधिकारी को मुख्य पदाधिकारी बनाया गया है। 27 सितंबर को प्रदेश में विश्व पर्यटन दिवस जोरशोर से मनाने की तैयारियां भी की जा रही हैं, लेकिन जनपद में करोड़ों रुपए की लागत से नेहरू नगर में बना पुरातत्व विभाग उपेक्षित है।
विज्ञापन
यहां अधिकारियों के बैठने के लिए कार्यालय तो है, लेकिन अधिकारी महीने, दो महीनों में एक- दो चक्कर ही लगाते हैं। इमारत की देखभाल के लिए होमगार्ड जवानों की तैनाती की गई है। नियमानुसार संग्रहालय की सुरक्षा में एक होमगार्ड की ड्यूटी दिन में और दो होमगार्डों की ड्यूटी रात में होनी चाहिए। लेकिन, संग्रहालय की सुरक्षा में तैनात यह गार्ड हमेशा गायब रहते हैं।
विज्ञापन
संग्रहालय में कुचदों की भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्ति, नंदीश्वर भगवान की प्राचीन पत्थर की त्रिमूर्ति, भगवान बुध की प्राचीन प्रतिमा, भगवान विष्णु की कई रूपों की प्राचीन मूर्तियों समेत 134 प्राचीन मूर्तियां संरक्षण के लिए रखी गई हैं। लेकिन यह सभी मूर्तियां संग्रहालय प्रशासन की उदासीनता के चलते उपेक्षा का शिकार हैं। संग्रहालय में वर्षों से सफाई तक नहीं हुई है, जिससे यहां संरक्षण के लिए रखी गईं सभी 134 मूर्तियां धूल खा रही हैं। मूर्ति स्थलों पर एक इंच मोटी धूल की परत जम गई है। दीवारों व मूर्तियों पर मकड़जाल लग गया है। दीमक भी लग चुका है।
खाली हाथ लौटते सैलानी
ललितपुर। संग्रहालय घूमने आने वाले पर्यटकों को यहां निराशा ही मिलती है। आए दिन संग्रहालय बंद रहता है। मुख्य दरवाजे पर अंदर से ताला जड़ा रहता है, जिससे यहां आने वाले पर्यटकों को बिना घूमे ही वापस लौटना होता है।
बिजली, पानी कुछ नहीं
ललितपुर। करोड़ों की लागत से बनाए गए संग्रहालय में बिजली व्यवस्था के लिए कहने को तो अलग से ट्रांसफार्मर रखवाकर बिजली कनेक्शन किया गया है, पानी केे लिए बोर करवाकर मोटर भी रखवायी गई है। लेकिन यहां व्यवस्थाएं चौपट हैं। संग्रहालय के बाहर एक मात्र सौ वाट का बल्ब जरूर जलता है जिससे पता चलता है कि यह संग्रहालय है। संग्रहालय के अंदर और बाहर, गार्ड रूम में भी बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे यहां हमेशा अंधकार पसरा रहता है। वहीं पानी की मोटर वर्षों से खराब पड़ी है, शौचालय भी बंद रहते हैं, जो पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाए गए थे।
इनका कहना है-
पुरातत्व संग्रहालय की स्थिति काफी दयनीय है, इसके सुधार व पुख्ता रखरखाव के लिए लखनऊ स्थित कार्यालय में आलाधिकारियों को प्रस्ताव अप्रैल में भेजा गया था। कई रिमाइंड भेजे जा चुके हैं, लेकिन बजट के अभाव में स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। संग्रहालय की सुरक्षा जांचने के लिए औचक निरीक्षण किया जाएगा।
सुरेश कुमार दुबे, सहायक पुरातत्व अधिकारी, झांसी।