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Lalitpur News: पर्यटन स्थलों पर सहूलियतें बढ़ेंगी तो सैलानियों को लुभाएंगी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। यहां कई ऐतिहासिक, पौराणिक व प्राकृतिक पर्यटन क्षेत्र हैं, लेकिन अधिकांश जगहों पर पहुंच मार्ग नहीं है। साथ ही मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, इससे पर्यटक इन स्थानों पर नहीं पहुंच पाते। वैसे, कई कार्य योजनाएं तैयार कर शासन को भेजी गई हैं। कई सड़कों की कार्ययोजना तैयार कर मनरेगा को भी दी गई, लेकिन अभी तक इन क्षेत्रों में पहुंच मार्ग नहीं बन पाए। अगर ये मार्ग बन जाते हैं, तो पर्यटकों को यहां पहुंचने में काफी सहूलियत होगी।
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दूधई पर्यटन क्षेत्र
जनपद मुख्यालय से 41 किलोमीटर दूर पाली-बालाबेहट मार्ग पर दूधई प्राचीन कला का केंद्र रहा है। यहां रामसागर तालाब है, इसके समीप ऊंचे टीलों पर मंदिर के अवशेष दिखाई देते हैं। साथ ही यहां दो सुरंगें हैं। इसके अलावा कई प्राचीन दार्शनिक स्थल हैं। 23 फीट ऊंची भगवान नृसिंह की दुर्लभ प्रतिमा है। आसपास का वन क्षेत्र इस स्थान को काफी मोहक बनाता है। लेकिन, यहां पहुंचने के लिए ढंग का कच्चा रास्ता भी मौजूद नहीं है। इससे लोगों को पहुंचने में काफी समस्या होती है।
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चांदपुर-जहाजपुर पर्यटन क्षेत्र
ललितपुर से करीब 32 किलोमीटर दूर देवगढ़ मार्ग पर यह स्थित है। इसके लिए ग्राम सैपुरा से सात किलोमीटर अंदर जाना होता है। यहां कई प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन मार्ग उचित न होने से सैलानियों को परेशानी होती है। साथ ही पर्यटन सुविधाओं का अभाव है।
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च्यवन आश्रम के पास का जलप्रपात
जिला मुख्यालय से करीब 34 किलोमीटर दूर तहसील मुख्यालय पाली के समीप ग्राम बंट में यह स्थित है। यहां प्राकृतिक जलप्रपात हैं। साथ ही शहजाद नदी का यह उदगम स्थल भी माना जाता है, लेकिन यहां पहुंचने के लिए मार्ग काफी क्षतिग्रस्त है। बरसात में तो यहां पहुंचना भी मुश्किल है।
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करकरावल जलप्रपात
जनपद मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर करकरावल जल प्रपात है। विकास खंड जखौरा के ग्राम बादरौन से होकर इसके लिए जाना पड़ता है। करीब एक किलोमीटर से अधिक का मार्ग जंगली इलाके में ऊबड़-खाबड़ होने के कारण आम सैलानियाें का यहां पहुंचना आसान नहीं होता है।
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कई सड़कों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं, जिससे सैलानी इन पर्यटक स्थल तक पहुंच सकें। अभी तक इन मार्गों का कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। इसके लिए पत्राचार किया जाएगा। -हेमलता, जिला पर्यटन अधिकारी
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ललितपुर। यहां कई ऐतिहासिक, पौराणिक व प्राकृतिक पर्यटन क्षेत्र हैं, लेकिन अधिकांश जगहों पर पहुंच मार्ग नहीं है। साथ ही मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, इससे पर्यटक इन स्थानों पर नहीं पहुंच पाते। वैसे, कई कार्य योजनाएं तैयार कर शासन को भेजी गई हैं। कई सड़कों की कार्ययोजना तैयार कर मनरेगा को भी दी गई, लेकिन अभी तक इन क्षेत्रों में पहुंच मार्ग नहीं बन पाए। अगर ये मार्ग बन जाते हैं, तो पर्यटकों को यहां पहुंचने में काफी सहूलियत होगी।
दूधई पर्यटन क्षेत्र
जनपद मुख्यालय से 41 किलोमीटर दूर पाली-बालाबेहट मार्ग पर दूधई प्राचीन कला का केंद्र रहा है। यहां रामसागर तालाब है, इसके समीप ऊंचे टीलों पर मंदिर के अवशेष दिखाई देते हैं। साथ ही यहां दो सुरंगें हैं। इसके अलावा कई प्राचीन दार्शनिक स्थल हैं। 23 फीट ऊंची भगवान नृसिंह की दुर्लभ प्रतिमा है। आसपास का वन क्षेत्र इस स्थान को काफी मोहक बनाता है। लेकिन, यहां पहुंचने के लिए ढंग का कच्चा रास्ता भी मौजूद नहीं है। इससे लोगों को पहुंचने में काफी समस्या होती है।
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चांदपुर-जहाजपुर पर्यटन क्षेत्र
ललितपुर से करीब 32 किलोमीटर दूर देवगढ़ मार्ग पर यह स्थित है। इसके लिए ग्राम सैपुरा से सात किलोमीटर अंदर जाना होता है। यहां कई प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन मार्ग उचित न होने से सैलानियों को परेशानी होती है। साथ ही पर्यटन सुविधाओं का अभाव है।
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च्यवन आश्रम के पास का जलप्रपात
जिला मुख्यालय से करीब 34 किलोमीटर दूर तहसील मुख्यालय पाली के समीप ग्राम बंट में यह स्थित है। यहां प्राकृतिक जलप्रपात हैं। साथ ही शहजाद नदी का यह उदगम स्थल भी माना जाता है, लेकिन यहां पहुंचने के लिए मार्ग काफी क्षतिग्रस्त है। बरसात में तो यहां पहुंचना भी मुश्किल है।
करकरावल जलप्रपात
जनपद मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर करकरावल जल प्रपात है। विकास खंड जखौरा के ग्राम बादरौन से होकर इसके लिए जाना पड़ता है। करीब एक किलोमीटर से अधिक का मार्ग जंगली इलाके में ऊबड़-खाबड़ होने के कारण आम सैलानियाें का यहां पहुंचना आसान नहीं होता है।
कई सड़कों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं, जिससे सैलानी इन पर्यटक स्थल तक पहुंच सकें। अभी तक इन मार्गों का कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। इसके लिए पत्राचार किया जाएगा। -हेमलता, जिला पर्यटन अधिकारी