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होली पर खास होती हैं गुझिया
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होली के त्योहार को लेकर दुकानों में सजी गुजिया
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। चाशनी में डूबी, खोवा और मेवा से तैयार गुझिया का स्वाद आमतौर पर पूरे साल चखने को मिलता है। मगर, होली के मौके पर खासतौर से गुझिया का इंतजार होता है, जो घर से लेकर दुकानों तक में तैयार की जाती हैं। होली त्योहार के नजदीक आते ही बाजार में दुकानों पर रंग, गुलाल व पिचकारियों के साथ- साथ गुझियों भी दुकानों पर सजने लगी है। बाजार के साथ ही घरों में भी विभिन्न प्रकार की गुझिया बननी शुरु होने लगीं हैं।
रंगों का त्योहार हो और किचन से गुझिया की खुशबू न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। होली के नजदीक आते ही घरों में तैयारी शुरू हो गई हैं। बड़े से लेकर बच्चे सब गुझिया बनाने के लिए उत्साहित हैं। कुछ दिन पहले से ही लोगों में होली का जोश दिखने लगा है। होली पर सिर्फ रंग, पिचकारी और गुब्बारों का महत्व नहीं है, बल्कि किचन में बनने वाले पकवान भी लोगों के दिल में अपनी अलग ही जगह रखते हैं।
हर शुभ काम का शुभारंभ मिठाई के साथ किया जाता है, तो फिर घर में पूजन हो या फिर फेस्टिवल जैसे दिवाली, होली, क्रिसमस और ईद। बिना मुंह मीठा किए, इनमें से किसी भी काम का शुरुआत ही नहीं होती। वैसे तो मुंह मीठा करने के लिए हर बार ही किचन में कुछ पकाया ही जाता है, लेकिन कुछ बड़े त्योहार जैसे दिवाली, होली पर मेहमानों का आना जाना ज्यादा होता है, इसलिए कुछ चीजें इसी खास मौकों पर घर में अपने हाथों से ही बनाई जाती हैं। गुझिया भी इन्हीं मिठाई में से एक है, जो कि होली के खास मौके पर हर घर-परिवार में देखी जा सकती हैं।
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मावे या खोवा के साथ ड्राई फ्रूट्स इनके टेस्टी होने का मुख्य कारण है। रंग वाली होली के कुछ दिन पहले से ही गुझिया बनाकर रख ली जाती है, ताकि होली खेलने आने वाले गेस्ट के सामने गुझिया परोसी जा सके।
यह खास गुझिया होली के स्वागत के रूप में बनाई जाती है। म्यूजिक से भरी शाम, अपने बड़े, छोटों और परिवार के सदस्यों पर रंग लगाकर होली खेलना और इसके साथ टेस्टी फूड। होली की शाम को यादगार बनाने के लिए काफी होता है। इस दिन बाजार या घर पर फ्रेश गुझिया भगवान को भोग लगाने के लिए प्रयोग की जाती है।
अभी से ही गुझिया बननी शुरु हो गई है। इसकी बिक्री तो रोज होती है, लेकिन होली और भाई दूज पर गुझिया की मांग अधिक हो जाती है।
- आकाश कुशवाहा, मिष्ठान विक्रेता
गुझिया की बिक्री तो हमेशा होती है, लेकिन रंगों के त्योहार पर इसकी मांग ज्यादा हो जाती है। होली के दो दिनों में गुझिया की मांग ज्यादा होने के कारण हमें अपने कारीगरों की संख्या बढ़ानी पढ़ती है। शुद्व देशी घी की सूखी गुझिया चार सौ रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है।
- रमेश चंद्र, मिष्ठान विक्रेता
प्रतिदिन डेढ़ सौ से दो सौ पीस गुझिया के बेचते हैं, वहीं त्योहार को लेकर गुझिया की बिक्री में तेजी आ जाती है। होली और भाई दूज पर अधिक बिक्री होती है।
- ब्रजेश महाराज, मिष्ठान विक्रेता
घर में ही गुझिया बनाते हैं और घर की ही बनी गुझिया में चिरौंजी और किशमिश नट्स डाले जाते हैं और इन्हें इलायची पाउडर के साथ मिक्स करके स्वादिष्ट बनाया जाता है।
- प्रियांशु गुप्ता
रंगों के त्योहार होली पर हम अपने मित्रों सहित गुझिया बनाते हैं। सब साथ में मिलकर एक- दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं। इसके बाद गुझिया का भी स्वाद लेते हैं।
- अमन बादल
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रंगों का त्योहार हो और किचन से गुझिया की खुशबू न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। होली के नजदीक आते ही घरों में तैयारी शुरू हो गई हैं। बड़े से लेकर बच्चे सब गुझिया बनाने के लिए उत्साहित हैं। कुछ दिन पहले से ही लोगों में होली का जोश दिखने लगा है। होली पर सिर्फ रंग, पिचकारी और गुब्बारों का महत्व नहीं है, बल्कि किचन में बनने वाले पकवान भी लोगों के दिल में अपनी अलग ही जगह रखते हैं।
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हर शुभ काम का शुभारंभ मिठाई के साथ किया जाता है, तो फिर घर में पूजन हो या फिर फेस्टिवल जैसे दिवाली, होली, क्रिसमस और ईद। बिना मुंह मीठा किए, इनमें से किसी भी काम का शुरुआत ही नहीं होती। वैसे तो मुंह मीठा करने के लिए हर बार ही किचन में कुछ पकाया ही जाता है, लेकिन कुछ बड़े त्योहार जैसे दिवाली, होली पर मेहमानों का आना जाना ज्यादा होता है, इसलिए कुछ चीजें इसी खास मौकों पर घर में अपने हाथों से ही बनाई जाती हैं। गुझिया भी इन्हीं मिठाई में से एक है, जो कि होली के खास मौके पर हर घर-परिवार में देखी जा सकती हैं।
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मावे या खोवा के साथ ड्राई फ्रूट्स इनके टेस्टी होने का मुख्य कारण है। रंग वाली होली के कुछ दिन पहले से ही गुझिया बनाकर रख ली जाती है, ताकि होली खेलने आने वाले गेस्ट के सामने गुझिया परोसी जा सके।
यह खास गुझिया होली के स्वागत के रूप में बनाई जाती है। म्यूजिक से भरी शाम, अपने बड़े, छोटों और परिवार के सदस्यों पर रंग लगाकर होली खेलना और इसके साथ टेस्टी फूड। होली की शाम को यादगार बनाने के लिए काफी होता है। इस दिन बाजार या घर पर फ्रेश गुझिया भगवान को भोग लगाने के लिए प्रयोग की जाती है।
अभी से ही गुझिया बननी शुरु हो गई है। इसकी बिक्री तो रोज होती है, लेकिन होली और भाई दूज पर गुझिया की मांग अधिक हो जाती है।
- आकाश कुशवाहा, मिष्ठान विक्रेता
गुझिया की बिक्री तो हमेशा होती है, लेकिन रंगों के त्योहार पर इसकी मांग ज्यादा हो जाती है। होली के दो दिनों में गुझिया की मांग ज्यादा होने के कारण हमें अपने कारीगरों की संख्या बढ़ानी पढ़ती है। शुद्व देशी घी की सूखी गुझिया चार सौ रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है।
- रमेश चंद्र, मिष्ठान विक्रेता
प्रतिदिन डेढ़ सौ से दो सौ पीस गुझिया के बेचते हैं, वहीं त्योहार को लेकर गुझिया की बिक्री में तेजी आ जाती है। होली और भाई दूज पर अधिक बिक्री होती है।
- ब्रजेश महाराज, मिष्ठान विक्रेता
घर में ही गुझिया बनाते हैं और घर की ही बनी गुझिया में चिरौंजी और किशमिश नट्स डाले जाते हैं और इन्हें इलायची पाउडर के साथ मिक्स करके स्वादिष्ट बनाया जाता है।
- प्रियांशु गुप्ता
रंगों के त्योहार होली पर हम अपने मित्रों सहित गुझिया बनाते हैं। सब साथ में मिलकर एक- दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं। इसके बाद गुझिया का भी स्वाद लेते हैं।
- अमन बादल