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वैभवशाली एवं समृद्ध पुरातात्विक खजाने का गढ है ललितपुर

Tue, 23 Nov 2021 01:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Nov 2021 01:00 AM IST
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heritage rich sources in lalitpur
जैन मंदिर देवगढ़ - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। करुणा इंटरनेशनल ललितपुर केंद्र की ओर से 19 से 25 नवंबर तक मनाए जाने वाले विश्व धरोहर सप्ताह के अंतर्गत सोमवार को वर्चुअल गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें वक्ताओं ने जनपद की समृद्ध पुरासंपदा, पर्यटन स्थलों, देवालयों के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया। बताया गया कि ललितपुर वैभवशाली एवं समृद्ध पुरातात्विक खजाने का गढ़ है।
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संरक्षक अक्षय अलया ने कहा कि जनपद में पुरा संपदा का वैभव देखने के लिए विदेशी सैलानी हर साल आते हैं लेकिन इस अमूल्य संपदा को सहेजने की दिशा में ठोस कारगर उपाय नहीं किए गए हैं। उन्होंने स्कूली पाठ्यक्रम में ‘अपनी विरासत को जानो’ विषय सम्मिलित किए जाने का सुझाव दिया।
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महामंत्री ध्रुव साहू ने कहा कि धरोहरों को संरक्षित करने की महती आवश्यकता है। संयोजक पुष्पेंद्र जैन ने कहा कि यहां के शिल्प में सौंदर्य है। हरिशंकर सोनी ने कहा कि विश्व धरोहर सप्ताह मनाने का उद्देश्य सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति पीढ़ियों को जागरूक करना है। डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि जनपद में प्राचीन धरोहरों की कमी नहीं हैं। मड़ावरा के ग्राम मदनपुर में आल्हा-ऊदल की बैठक है तो वहीं पर जैनियों का तीर्थक्षेत्र पंचपहाड़ी पर भगवान शांतिनाथ की विशालतम मूर्ति स्थापित हैं।
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दशावतार मंदिर देवगढ़ व जैन मंदिर, तालबेहट के समीप झूमरनाथ, देवामाता, पाली के समीप नीलकंठेश्वर, मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित अमझरा घाटी, बार के तालाब की सीढ़ियां जो जिन्नों द्वारा बनवाई गई, बाबा सदनशाह, सुम्मेरा तालाब, सौंरई, मड़ावरा, बानपुर, बार, तालबेहट के किले जो हमारे जनपद की अमूल्य धरोहरें हैं।

प्राचार्य केपी पांडे ने कहा कि हमें पर्यावरण की रक्षा व नदियों के संरक्षण के साथ-साथ पुरासंपदा, रीति-रिवाज, लोकनृत्य एवं वन औषधि के संरक्षण के लिए कदम बढ़ाने की आवश्यकता है। गोष्ठी का संचालन ध्रुव साहू ने किया। वर्चुअल गोष्ठी में अंतिम जैन, शैलेष तिवारी, बृजेश कुशवाहा, अरुण तिवारी, देवीशंकर कुशवाहा आदि ने विचार रखे।

दशावतार मंदिर देवगढ़

दशावतार मंदिर देवगढ़- फोटो : LALITPUR

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