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एआरटीओ साहब बिना वाहन के ही बना दो हैवी लाइसेंस

Wed, 08 Feb 2017 11:54 PM IST
lalitpur
lalitpur Updated Wed, 08 Feb 2017 11:54 PM IST
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heavy vehical licence
बस - फोटो : demo pic
परिवहन विभाग आए दिन चर्चाओं में बना रहता है। लेकिन इस बार गलती परिवहन विभाग की नहीं, बल्कि उपभोक्ता खुद अपनी गलती विभाग पर थोपना चाह रहा है। विभाग में चार पहिया वाहनों के हैवी लाइसेंस बनवाने के लिए उपभोक्ता बिना वाहनों के ही आवेदन कर रहा है और बिना ड्राइव टेस्ट के ही लाइसेंस पाना चाह रहा है। जबकि विभाग द्वारा हर लाइसेंस पर वीडियोग्राफी कराई जा रही है।      
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परिवहन विभाग में रोजाना करीब एक दर्जन से अधिक दो पहिया और करीब इतने ही चार पहिया वाहनों को चलाने के लिए लाइसेंस के लिए वाहन स्वामियों द्वारा आवेदन किए जा रहे हैं। आवेदन में दो पहिया और चार पहिया वाहनों के लिए अलग-अलग व एक साथ आवेदन किया जा सकता है। यदि कोई आवेदक दो पहिया वाहन के लाइसेंस के लिए आवेदन करता है, तो उसे दो पहिया वाहन लाइसेंस की फीस ही देनी होगी, लेकिन यदि कोई आवेदक दो पहिया व चार पहिया दोनों प्रकार के वाहन चलाने के लिए हैवी लाइसेंस की अतिरिक्त फीस देनी होती है। जबकि यदि आवेदक हैवी वाहन नहीं चला सकता, तो भी उसे उक्त फीस पर ही दो पहिया वाहन का लाइसेंस ही मिल सकेगा। हालांकि आवेदक को इसके लिए ड्राइव रैंप सर्किल में वाहन चलाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
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इसी प्रकार बुधवार को शहर निवासी एक आवेदक ने दो पहिया व चार पहिया वाहन चलाने के लिए हैवी वाहन का लाइसेंस बनाने को आवेदन किया, लेकिन जब उससे वाहन चलाने के लिए कहा गया तो उसने वाहन मध्य प्रदेश में होने का तर्क रखा, जबकि वह ललितपुर के परिवहन विभाग में स्थानीय निवासी होने के चलते हैवी लाइसेंस के लिए आवेदन करने आया था। इसके चलते एआरटीओ ने उसके तर्क को अस्वीकार करते हुए दो पहिया वाहन का लाइसेंस बनाने का ही  आश्वासन दिया, जिस पर अब वह हैवी वाहन के लिए ली जाने वाली फीस भी वापस मांगने लगा, जबकि विभाग द्वारा लाइसेंस की फीस ऑनलाइन काटी जाती है। इससे विभाग भी असमंजस में पड़ गया और लाइसेंस जारी होने के अनुसार फीस पर नियम तलाशे गए। हालांकि विभाग द्वारा उसे चार पहिया वाहन चलाकर दिखाने के बाद ही हैवी लाइसेंस बनाने को कहा गया। दिन भर परिवहन विभाग में यह मामला चर्चा का विषय बना रहा। वहीं विभाग में रोजाना ऐसे मामले आ रहे हैं, जो विभाग के लिए परेशानी का सबक बने रहते हैं।
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