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चंदेलकालीन हजारिया मंदिर पर लगता है भक्तों का मेला
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कैप्सन - चमत्कारिक हजारिया महादेव 3- हजारिया महादेव मंदिर के बाहर का मनमोहक दृश्य
- फोटो : TALDEHATE
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तालबेहट। मानसरोवर झील के किनारे स्थित हजारिया महादेव मंदिर पर वैसे तो हर समय भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन सावन माह के सोमवार और महाशिवरात्रि पर यहां पूरे समय भक्तों का मेला सा लगा रहता है। यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि भोले बाबा के मंदिर पर वह जो भी मुराद लेकर आते है, वह अवश्य पूरी होती है।
मानसरोवर झील के किनारे दो विशाल शिवलिंग हैं। जो काफी पुराने हैं। इतिहासकारों ने इन्हें चंदेलकालीन युग का बताया है। जो अपने अतीत में हजारों वर्ष का इतिहास संजोए हुए हैं। भारतगढ़ दुर्ग के अंदर झील के किनारे बने एक शिवलिंग को भीतर कोट शिवलिंग के नाम से और वोट क्लब के समीप बने शिवलिंग को बाहर कोट हजारिया महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है।
दोनों शिवलिंगों के बारे में बताया जाता है कि यह एक ही आकार के है और एक ही पत्थर के बने है। जिनकी पिंडी का व्यास लगभग छह फीट आठ इंच तथा ऊंचाई 2 फीट 5 इंच है। प्रत्येक शिवलिंगों की पिंडी पर छोटे-छोटे शिवलिंगों के 11 चक्र बने हैं। प्रत्येक फेेेरे में 108 शिवलिंग बने हैं। लोगों का ऐसा मानना है कि रानी अपने महल से दोनों शिवलिंगों के दर्शन किया करती थी।
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वैसे तो यहा हर समय भक्तों की मौजूदगी रहती है लेकिन महाशिवरात्रि, सावन माह के सोमवार को पूरे समय भक्तों का मेला लगा रहता है लेकिन आज भी प्रशासनिक उपेक्षा के चलते इन दोनों स्थलों का समुचित विकास न हो सका।
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पहले मेरे पिता जी पूजा करते थे। अब लगभग पांच वर्ष से मैं यहां की पूजा कर रहा हूं। प्रतिदिन यहां काफी संख्या में भक्त दर्शन करने आते है। महाशिवरात्रि एवं अन्य पर्वों पर भजन कीर्तन आदि होते रहते हैं। भोले बाबा भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
-- पंडित अनुज लिटौरिया, पुजारी
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मानसरोवर झील के किनारे दो विशाल शिवलिंग हैं। जो काफी पुराने हैं। इतिहासकारों ने इन्हें चंदेलकालीन युग का बताया है। जो अपने अतीत में हजारों वर्ष का इतिहास संजोए हुए हैं। भारतगढ़ दुर्ग के अंदर झील के किनारे बने एक शिवलिंग को भीतर कोट शिवलिंग के नाम से और वोट क्लब के समीप बने शिवलिंग को बाहर कोट हजारिया महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है।
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दोनों शिवलिंगों के बारे में बताया जाता है कि यह एक ही आकार के है और एक ही पत्थर के बने है। जिनकी पिंडी का व्यास लगभग छह फीट आठ इंच तथा ऊंचाई 2 फीट 5 इंच है। प्रत्येक शिवलिंगों की पिंडी पर छोटे-छोटे शिवलिंगों के 11 चक्र बने हैं। प्रत्येक फेेेरे में 108 शिवलिंग बने हैं। लोगों का ऐसा मानना है कि रानी अपने महल से दोनों शिवलिंगों के दर्शन किया करती थी।
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वैसे तो यहा हर समय भक्तों की मौजूदगी रहती है लेकिन महाशिवरात्रि, सावन माह के सोमवार को पूरे समय भक्तों का मेला लगा रहता है लेकिन आज भी प्रशासनिक उपेक्षा के चलते इन दोनों स्थलों का समुचित विकास न हो सका।
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पहले मेरे पिता जी पूजा करते थे। अब लगभग पांच वर्ष से मैं यहां की पूजा कर रहा हूं। प्रतिदिन यहां काफी संख्या में भक्त दर्शन करने आते है। महाशिवरात्रि एवं अन्य पर्वों पर भजन कीर्तन आदि होते रहते हैं। भोले बाबा भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
-- पंडित अनुज लिटौरिया, पुजारी

कैप्सन - चमत्कारिक हजारिया महादेव 3- हजारिया महादेव मंदिर के बाहर का मनमोहक दृश्य- फोटो : TALDEHATE