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दो हैंडपंप के सहारे तीन मुहल्ले
lalitpur
Updated Sat, 16 Apr 2016 12:25 AM IST
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पानी संकट
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। शहर के वार्ड नंबर 01 में पानी की समस्या लोगों के लिए चुनौती बन गई है। वर्षों पुरानी पाइप लाइन होने के कारण नलों का ज्यादा सहारा नहीं है। स्थानीय लोगों को पानी के लिए हैंडपंप पर लाइन लगाकर धूप में लगा रहना पड़ता है।
यह वार्ड काफी पुराना है। यहां की लगभग 70 प्रतिशत आबादी दलित वर्ग की है। इस वार्ड की सीमा के भीतर चार मुहल्ले आते हैं, जो मलिन बस्ती घोषित हैं। मुहल्ला नारायण पुरा में करीब 600 परिवार रहते हैं, सभी परिवार पेयजल के लिए इकलौते हैंडपंप के भरोसे पर ही अपनी प्यास बुझा रहे हैं। उक्त हैंडपंप के पास में एक प्राचीन कुआं है, जिसके सहारे पर हैंडपंप अब तक लोगों का साथ दे रहा है। स्थानीय लोग कुएं का उपयोग नहाने व कपड़े धोने के लिए करते हैं, लेकिन इसके लिए भी लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कुएं व हैंडपंप के चारों ओर गंदगी का ढेर लगा है। पानी के लिए कड़ी धूप में गंदगी के बीच लाइन में लगा रहना पड़ता है।
एक हैंडपंप बुझा रहा 3,500 लोगों की प्यास
मुहल्ला विष्णु पुरा में करीब 550 परिवार रहते हैं, इन परिवारों की प्यास बुझाने के लिए मात्र तीन हैंडपंप हैं। इनमें से केवल एक हैंडपंप से ही वर्तमान में पानी निकल रहा है, बाकी दोनों हैंडपंप पूरी तरह से बंद पड़े हैं। इसी मुहल्ले से सटे हुए मुहल्ला रैदासपुरा में करीब 700 परिवार रहते हैं। मुहल्लेवासियों का दुर्भाग्य है कि यहां पर एक भी सार्वजनिक हैंडपंप नहीं है। मुहल्ला रैदासपुरा की करीब 2,000 आबादी और विष्णुपुरा की करीब 1,500 आबादी एक हैंडपंप के सहारे से ही अपनी प्यास बुझा रहे हैं। सुबह से घंटों लाइन में खड़े रहने से बचने के लिए कई लोग आधी रात में पानी भरने के लिए जागते हैं। केवल महिलाएं ही नहीं, परिवार के पुरुष और बच्चे भी दिनभर डिब्बों व बाल्टियों से पानी ढोने को मजबूर हैं।
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नलों में नहीं आता पानी
इन मुहल्लों में कई वर्षों पूर्व पाइप लाइन बिछाई गई थी, लेकिन वर्तमान में क्षेत्र काफी विकसित हो गया है। यह मुहल्ला अपर जोन में है, यहां डाली गई लाइन कई जगहों से लीकेज है और लाइन के बीच से कई लोगों ने अवैध कनेक्शन ले लिए हैं, जिससे पानी मुहल्लों के नलों तक नहीं पहुंच पाता है।
टंकी बनी शोपीस
मुहल्ला नारायणपुरा में स्थित मान्यवर कांशीराम कालोनी में विगत वर्ष टंकी बनाई गई थी। लेकिन, बंद पड़ी यह पानी की टंकी शोपीस साबित हो रही हैं। इस कालोनी में मात्र 32 परिवार रहते हैं, लेकिन यदि यह टंकी चालू होती है तो इस अकाल की स्थित में स्थानीय लोगों को काफी मददगार सबित हो सकती थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब से टंकी बनी है एक बार भी चालू नहीं हुई है। नलों में पानी नहीं आने के कारण लोगों ने कालोनी की छत पर रखी प्लास्टिक की टंकियों को अपने घरों में रख लिया है।
पानी के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नलों में पिछले दो सप्ताह से पानी नहीं आ रहा है। नलों की यह स्थिति हमेशा ही बनी रहती है। नलों का कोई सहारा नहीं है इसके बावजूद भी बिल देना पड़ता है।
- मचला देवी
स्थानीय निवासी महिला
तीनों मुहल्लों विष्णु पुरा, नारायणपुरा व रैदासपुरा की आबादी 4,500 से अधिक है। क्षेत्र में आधा दर्जन हैंडपंप लगे है। लेकिन, वर्तमान में केवल दो हैंडपंपों से पानी निकल रहा है। पाइप लाइन से भी नलों में पानी नहीं आ रहा है। जल संस्थान में कई बार सूचना देने पर एक बार ही टैंकर भेजा जाता है। स्थानीय लोगों को पेयजल के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।
- रामसखी कुशवाहा, वार्ड पार्षद
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यह वार्ड काफी पुराना है। यहां की लगभग 70 प्रतिशत आबादी दलित वर्ग की है। इस वार्ड की सीमा के भीतर चार मुहल्ले आते हैं, जो मलिन बस्ती घोषित हैं। मुहल्ला नारायण पुरा में करीब 600 परिवार रहते हैं, सभी परिवार पेयजल के लिए इकलौते हैंडपंप के भरोसे पर ही अपनी प्यास बुझा रहे हैं। उक्त हैंडपंप के पास में एक प्राचीन कुआं है, जिसके सहारे पर हैंडपंप अब तक लोगों का साथ दे रहा है। स्थानीय लोग कुएं का उपयोग नहाने व कपड़े धोने के लिए करते हैं, लेकिन इसके लिए भी लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कुएं व हैंडपंप के चारों ओर गंदगी का ढेर लगा है। पानी के लिए कड़ी धूप में गंदगी के बीच लाइन में लगा रहना पड़ता है।
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एक हैंडपंप बुझा रहा 3,500 लोगों की प्यास
मुहल्ला विष्णु पुरा में करीब 550 परिवार रहते हैं, इन परिवारों की प्यास बुझाने के लिए मात्र तीन हैंडपंप हैं। इनमें से केवल एक हैंडपंप से ही वर्तमान में पानी निकल रहा है, बाकी दोनों हैंडपंप पूरी तरह से बंद पड़े हैं। इसी मुहल्ले से सटे हुए मुहल्ला रैदासपुरा में करीब 700 परिवार रहते हैं। मुहल्लेवासियों का दुर्भाग्य है कि यहां पर एक भी सार्वजनिक हैंडपंप नहीं है। मुहल्ला रैदासपुरा की करीब 2,000 आबादी और विष्णुपुरा की करीब 1,500 आबादी एक हैंडपंप के सहारे से ही अपनी प्यास बुझा रहे हैं। सुबह से घंटों लाइन में खड़े रहने से बचने के लिए कई लोग आधी रात में पानी भरने के लिए जागते हैं। केवल महिलाएं ही नहीं, परिवार के पुरुष और बच्चे भी दिनभर डिब्बों व बाल्टियों से पानी ढोने को मजबूर हैं।
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नलों में नहीं आता पानी
इन मुहल्लों में कई वर्षों पूर्व पाइप लाइन बिछाई गई थी, लेकिन वर्तमान में क्षेत्र काफी विकसित हो गया है। यह मुहल्ला अपर जोन में है, यहां डाली गई लाइन कई जगहों से लीकेज है और लाइन के बीच से कई लोगों ने अवैध कनेक्शन ले लिए हैं, जिससे पानी मुहल्लों के नलों तक नहीं पहुंच पाता है।
टंकी बनी शोपीस
मुहल्ला नारायणपुरा में स्थित मान्यवर कांशीराम कालोनी में विगत वर्ष टंकी बनाई गई थी। लेकिन, बंद पड़ी यह पानी की टंकी शोपीस साबित हो रही हैं। इस कालोनी में मात्र 32 परिवार रहते हैं, लेकिन यदि यह टंकी चालू होती है तो इस अकाल की स्थित में स्थानीय लोगों को काफी मददगार सबित हो सकती थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब से टंकी बनी है एक बार भी चालू नहीं हुई है। नलों में पानी नहीं आने के कारण लोगों ने कालोनी की छत पर रखी प्लास्टिक की टंकियों को अपने घरों में रख लिया है।
पानी के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नलों में पिछले दो सप्ताह से पानी नहीं आ रहा है। नलों की यह स्थिति हमेशा ही बनी रहती है। नलों का कोई सहारा नहीं है इसके बावजूद भी बिल देना पड़ता है।
- मचला देवी
स्थानीय निवासी महिला
तीनों मुहल्लों विष्णु पुरा, नारायणपुरा व रैदासपुरा की आबादी 4,500 से अधिक है। क्षेत्र में आधा दर्जन हैंडपंप लगे है। लेकिन, वर्तमान में केवल दो हैंडपंपों से पानी निकल रहा है। पाइप लाइन से भी नलों में पानी नहीं आ रहा है। जल संस्थान में कई बार सूचना देने पर एक बार ही टैंकर भेजा जाता है। स्थानीय लोगों को पेयजल के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।
- रामसखी कुशवाहा, वार्ड पार्षद