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कंडम आवासों में रहने को मजबूर जीआरपी पुलिस कर्मी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Aug 2016 12:43 AM IST
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jrp avas, lalitpur news
- फोटो : amar ujala, lalitpur news
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ललितपुर। रेलवे कालोनी में कंडम घोषित आवासों में बारिश बाहर ही नहीं रसोई और कमरे में अंदर तक होती है। जहां रातों में चैन की नींद सो रहे कर्मियों की छत व छप्परों से पानी टपकने से ही बारिश की आहट होते ही नींद खुल जाती है और फिर जागकर ही पूरी रात गुजारनी होती है। रेलवे कॉलोनी के जीर्ण शीर्ण स्थिति वाले इन आवासों में करीब दो दर्जन से अधिक जीआरपी व रेलवे कर्मी नारकीय स्थिति में किसी प्रकार निवास कर रहे हैं।
बारिश के मौसम में इस समय इन आवासों में प्रवेश से लेकर अंदर की रसोई तक सब पानी-पानी नजर आ रहा है। किसी के आवास में घरों की छतों से पानी टपक रहा है तो किसी की चद्दरें टूटने से पानी टपकता नहीं बारिश में बहता हुआ घरों को लबालब कर दे रहा है।रेलवे स्टेशन के बाहर जीआरपी थाना से लगी हुई रेलवे कॉलोनी में करीब बीस आवास और तीन रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के कार्यालय बने हुए हैं, जिनमें कुछ आवास रेलवे कर्मियों को आवंटित किए गए हैं, तो कुछ आवासों में रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के कार्यालय, जीआरपी थाना व जीआरपी अधिकारियों व कर्मियों के हैं।
किसी आवास की दीवारें चटख गई हैं, तो किसी की छतों की मरम्मत नहीं होने से बारिश के दौरान हर समय पानी टपकता रहता है, जिससे आवासों के कमरे और रसोई तक पानी से भर गया हैं। बारिश होने से कमरों की छतों से जहां पानी टपकता नजर आता है तो वहीं पुरानी सीमेंट सीटों की छप्परों से पानी गिरने से घरों में पानी बहता हुआ देखा जा सकता है। आवासों के आंगन में तो कई फीट पानी भर जाता है, ऐसे में इन आवासों के अंदर जाना या बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
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हालांर्कि पिछले दिनों आए जीआरपी के आईजी जोन ने जीआरपी कर्मियों के लिए प्री-फैब्रिकेटेड बैरक बनाने के लिए जमीन का निरीक्षण किया, लेकिन यह बैरक भी सभी कर्मियों के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा बहुत से कर्मी परिवार सहित निवास करते हैं, जो बैरक में निवास नहीं सकते हैं। वहीं, रेलवे द्वारा भी जीआरपी कर्मियों को आवास आवंटन भी नहीं किया जाता है, इसके अलावा रेलवे विभाग द्वारा कंडम कॉलोनी में आवासों को भी जीआरपी कर्मियों से खाली कराने को दबाव बनाया जा रहा है।
जबकि जीआरपी रेलवे डिपार्टमेंट का ही एक हिस्सा मानी जाती है, जो रेलवे में हो रही हर प्रकार की आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखते हुए अपराध रोकने में मदद करती है। इसके बाद भी इन कर्मियों को नारकीय स्थिति में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
नवीन टिकट आरक्षण कार्यालय की छत भी लीकेज
दशकों पूर्व निर्मित रेलवे कॉलोनियों की हालत तो दयनीय है ही इसके साथ ही नवीन आरक्षण कार्यालय की छत से भी पानी रिस रहा है। बारिश के दौरान जगह-जगह पानी टपकने से जहां यात्रियों को परेशानी हो रही है, तो वहीं टिकट काउंटरों पर रेलवे कर्मियों को भी परेशानी होती है।
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बारिश के मौसम में इस समय इन आवासों में प्रवेश से लेकर अंदर की रसोई तक सब पानी-पानी नजर आ रहा है। किसी के आवास में घरों की छतों से पानी टपक रहा है तो किसी की चद्दरें टूटने से पानी टपकता नहीं बारिश में बहता हुआ घरों को लबालब कर दे रहा है।रेलवे स्टेशन के बाहर जीआरपी थाना से लगी हुई रेलवे कॉलोनी में करीब बीस आवास और तीन रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के कार्यालय बने हुए हैं, जिनमें कुछ आवास रेलवे कर्मियों को आवंटित किए गए हैं, तो कुछ आवासों में रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के कार्यालय, जीआरपी थाना व जीआरपी अधिकारियों व कर्मियों के हैं।
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किसी आवास की दीवारें चटख गई हैं, तो किसी की छतों की मरम्मत नहीं होने से बारिश के दौरान हर समय पानी टपकता रहता है, जिससे आवासों के कमरे और रसोई तक पानी से भर गया हैं। बारिश होने से कमरों की छतों से जहां पानी टपकता नजर आता है तो वहीं पुरानी सीमेंट सीटों की छप्परों से पानी गिरने से घरों में पानी बहता हुआ देखा जा सकता है। आवासों के आंगन में तो कई फीट पानी भर जाता है, ऐसे में इन आवासों के अंदर जाना या बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
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हालांर्कि पिछले दिनों आए जीआरपी के आईजी जोन ने जीआरपी कर्मियों के लिए प्री-फैब्रिकेटेड बैरक बनाने के लिए जमीन का निरीक्षण किया, लेकिन यह बैरक भी सभी कर्मियों के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा बहुत से कर्मी परिवार सहित निवास करते हैं, जो बैरक में निवास नहीं सकते हैं। वहीं, रेलवे द्वारा भी जीआरपी कर्मियों को आवास आवंटन भी नहीं किया जाता है, इसके अलावा रेलवे विभाग द्वारा कंडम कॉलोनी में आवासों को भी जीआरपी कर्मियों से खाली कराने को दबाव बनाया जा रहा है।
जबकि जीआरपी रेलवे डिपार्टमेंट का ही एक हिस्सा मानी जाती है, जो रेलवे में हो रही हर प्रकार की आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखते हुए अपराध रोकने में मदद करती है। इसके बाद भी इन कर्मियों को नारकीय स्थिति में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
नवीन टिकट आरक्षण कार्यालय की छत भी लीकेज
दशकों पूर्व निर्मित रेलवे कॉलोनियों की हालत तो दयनीय है ही इसके साथ ही नवीन आरक्षण कार्यालय की छत से भी पानी रिस रहा है। बारिश के दौरान जगह-जगह पानी टपकने से जहां यात्रियों को परेशानी हो रही है, तो वहीं टिकट काउंटरों पर रेलवे कर्मियों को भी परेशानी होती है।