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सरकार बदली, लेकिन नहीं बदली गरीबों की किस्मत

Thu, 02 Jun 2016 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 02 Jun 2016 12:34 AM IST
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govt change but poor people destiny as it is
avas, lalitpur hindi news - फोटो : demo
पाली (ललितपुर)। चुनाव के बाद सरकार तो बदल गई, लेकिन नहीं बदली तो सिर्फ गरीबों की किस्मत। गरीब छह साल से अपने आवास का इंतजार कर झोपड़ी में गुजर- बसर कर रहे हैं, लेकिन आवास कब पूरे होंगे, उन्हें बताने वाला कोई नहीं है।
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अच्छे दिन आएंगे का दावा करने वाली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अपने दो साल की उपलब्धियां गिना रही है। बहुजन समाज पार्टी के बाद प्रदेश में उम्मीदों से भरी अखिलेश यादव सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने वाली है और दूसरे चुनाव (वर्ष 2017) की तैयारियों में जुटी हुई है। नगर पंचायत की सरकार में युवा चेयरमैन का साथ है, वह भी अगली ताजपोशी की तैयारी करने में जुटे हुए हैं, लेकिन इन सबके बीच नगर पंचायत पाली स्थित गरीबों के लिए मंजूर की गई आवासीय योजना का लाभ गरीबों को अब तक नहीं मिला।
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हम बात कर रहे हैं जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) द्वारा आईएचएसडीपी योजना के तहत गरीबों को 144 आवास बनाने की। वर्ष 2009 में गरीबों के लिए आवास निर्माण करने का निर्णय लिया गया। इन आवासों के निर्माण का जिम्मा डूडा के पास है। आवास निर्माण के लिए 3.91 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इस राशि से आवासों का निर्माण कार्य वर्ष 2009 में शुरू हो गया था। निर्माण की जिम्मेदारी जल निगम की कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस को सौंपी गई। काम शुरू हुआ तो आवासहीनों को उम्मीद जाग गई, लेकिन उनकी उम्मीद को सात साल का लंबा अरसा हो गया।
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वैसे निर्माण कार्य पूरा करने की अवधि वर्ष 2010 निर्धारित की गई थी। लेकिन, बाद में धनराशि मिलने के बाद निमार्ण छह माह में पूरा करने की बात कही जाने लगी और तब से लेकर अब तक आशियानों की आस पाले गरीबों का इंतजार लंबा खिंचता चला जा रहा है, जिससे अब वह निराश हो गए हैं। लंबे समय से काम लटका होने के कारण इसका रिवाइज स्टीमेट बनाया गया और 5.22 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए गए। लेकिन, अभी तक कोई फायदा नहीं हुआ।

नगर पंचायत पाली में आर्थिक तंगी के साथ कच्चे घरोंदों में रहने वाले गरीबों के लिए 144 भवनों वाली आवासीय योजना में मूलभूत सुविधाओं बिजली, पानी, सड़क, नाली व खड़ंजा से लैस कालोनी विकसित की जानी थी। निर्माण कार्य प्रारंभ होने से मुफलिसी की जिंदगी जी रहे लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। शुरूआत में काम काफी तेजी से चलता रहा, लेकिन कुछ माह बाद काम की गति में ठहराव आ गया और कार्यदायी संस्था सीएंडीएस ने इसमें दिलचस्पी दिखानी कम कर दी। फर्श, प्लास्टर, खिड़कियां, दरवाजे, लाइटिंग आदि कार्य भी बाकी पड़ा है। 26 मई 2010 को गुजरे 6 साल हो गए हैं,


लेकिन सूचना पट में वही दर्शाया जा रहा है। इतने हालातों में गरीबों के आवासों का सपना अधर में लटका है और इंतजार को बढ़ा रहा है।
उल्लेखनीय है कि उक्त आवास सहरिया आदिवासियों, अनुसूचित जाति के गरीबों को वरीयता के आधार पर दिए जाने हैं। इसके अलावा सामान्य वर्ग व पिछड़ा वर्ग के गरीबों को भी आवास से लाभान्वित किया जाना है।

निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें समय कितना लगेगा यह तो नहीं बताया जा सकता, लेकिन इसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
- पवन कुमार शर्मा, सहायक परियोजना अधिकारी (डूडा)
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