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सरकारी अस्पताल में ‘प्राइवेट प्रैक्टिस’

Sun, 10 Apr 2016 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराो ललितपुर
अमर उजाला ब्यूूराो ललितपुर Updated Sun, 10 Apr 2016 12:53 AM IST
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goverment docters forced for privat inspection
जांच - फोटो : amar ujala
ललितपुर। प्रदेश सरकार की ओर से गरीब जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जिला अस्पताल के चिकित्सक सरकार की मंशा के विपरीत काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा तमाम निर्देशों को दरकिनार करते हुए आज भी बदस्तूर बाहर की दवाएं व जांचें लिखी जा रहीं हैं। जब ऐसे मामलों में शिकायतें आला अधिकारियों से की जाती हैं, तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। इसका प्रमुख कारण यहां चिकित्सकों की कमी है।
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ताजा मामला मुहल्ला सरायपुरा का है। यहां रहने वाला एक परिवार अपने 9 माह के बच्चे की बीमारी का इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचा। अस्पताल की दूसरी मंजिल स्थित कक्ष में मौजूद चिकित्सक ने बच्चे का चेकअप करने के बाद पिता से बच्चे का सीवीसी टेस्ट कराने को कहा। चिकित्सक ने  एक कागज के टुकड़े पर सीवीसी नामक जांच लिख कर जिला अस्पताल के बाहर जाकर जांच कराने की सलाह दी।  तीमारदार ने जब जिला अस्पताल में ही जांच कराने की बात कही, तो डाक्टर ने जिला अस्पताल में बेेहतर जांच नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि निजी केंद्र पर बेहतर जांच होती है। तीमारदार ने मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एसके वासवानी से मोबाइल पर बात की तो सीएमएस ने बताया कि वह जिले से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी कोई बात है, तो जांच कराएंगे। तीमारदार ने  उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराते हुए दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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प्राइवेट मरीज सरकारी अस्पताल में
सरकारी अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भर्ती होने वाले मरीजों में अच्छी खासी संख्या अपने आवास पर मरीजों को देखने वाले चिकित्सकों के मरीजों की होती है। अस्पताल से रिटायर हुए एक चिकित्सक द्वारा अपने आवास पर मरीजों का इलाज किया जाता है, गंभीर मरीज को भर्ती करने की जगह घर पर न होने के कारण उसे जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता है। अस्पताल के कर्मियों से सांठगांठ करके सरकारी अस्पताल में निजी इलाज होता है।
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बंगले के मरीज चैंबर में
महिला अस्पताल के एक चिकित्सक द्वारा भी शासन के निर्देशों को धता बताते हुए खुलेआम अपने आवास पर मरीजों को देखा जाता है। सरकारी ड्यूटी का समय होने पर बंगले पर पहुंचे मरीज कहीं और न चले जाएं, इसके लिए इन चिकित्सक ने अपने बंगले पर अपना एक दलाल तैनात कर रखा है। यह दलाल बंगले पर पहुंचे मरीजों को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल चलने के लिए कहता है। अगर मरीज अपने साधन से तो कोई बात नहीं, वरना दलाल द्वारा अपनी मोटर साइकिल से मरीज को डॉक्टर साहब के चैँबर में पहुंचा दिया जाता है। इस तरह से सरकारी ड्यूटी करते हुए सरकारी चैंबर में प्राइवेट प्रैक्टिस का खेल चल रहा है।
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