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सरकारी एवं सहायता प्राप्त कॉलेज छात्रों की पहली पसंद
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ललितपुर। निजी कॉलेजों की चमक दमक भी छात्रों को लुभा नहीं पाती है। आज भी अधिकतर छात्र कम खर्च में बेहतर शिक्षा पाने के लिए लालायित रहते हैं। यही कारण है कि शासकीय एवं अनुदानित महाविद्यालयों में प्रवेश पाने की होड़ मच जाती है। जिले के नेहरू महाविद्यालय में पिछले साल 11 हजार छात्रों ने पंजीकरण कराया था। इस बार भी कॉलेज खुलने पर प्रवेश के लिए होड़ मचेगी।
देश में बुंदेलखंड अन्य राज्यों के मुकाबले काफी पिछड़ा है। इसमें ललितपुर जिले की स्थिति और भी दयनीय है। उद्योग शून्यता के कारण अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर हैं। इससे लोगों की आय सीमित है। इस कारण तमाम अभिभावक शिक्षा पर ज्यादा खर्च करने से बचते हैं। वहीं, छात्र भी कम खर्च में बेहतर शिक्षा पाने के लिए उत्सुक रहते हैं। जब प्रवेश की बारी आती है तो वह शासकीय एवं अनुदानित विद्यालयों में आवेदन करते हैं। जब इन विद्यालयों में छात्रों को मायूसी हाथ लगती है, तब जाकर तमाम छात्र निजी विद्यालयों की ओर रुख करते हैं। पिछले वर्ष जिले के नेहरू महाविद्यालय में करीब 11 हजार छात्रों ने प्रवेश के लिए पंजीकरण कराया था जबकि यहां 972 सीटें ही उपलब्ध हैं। वहीं, राजकीय विद्यालयों में बीए, बीएससी व बीकॉम में 60-60 सीटें आवंटित हैं।
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मात्र 132 रुपये है बीए का शिक्षण शुल्क
नेहरू महाविद्यालय में बीए में शिक्षण शुल्क 132 रुपये है। इसके अलावा खेल, स्काउट, पत्रिका का शुल्क भी छात्रों से लिया जाता है। इस तरह पांच सौ रुपये के आसपास छात्र को शुल्क देना पड़ता है। वहीं, निजी विद्यालय छात्रों से बीए का शुल्क 5 हजार, बीएससी में 7500, एमए में 10 हजार रुपये के आसपास शुल्क लेते हैं जो हर अभिभावक नहीं दे पाता है।
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अनुमोदन के नाम पर होता खेल
कुछ निजी कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षक की जगह दूसरे से शिक्षण कार्य लिया जाता है। इस तरह छात्रों को बेहतर शिक्षा नहीं मिल पाती है। कई कॉलेजों में नियमित कक्षाओं का भी अभाव रहता है। इस तरह की परिस्थिति छात्रों को मुंह मोड़ने के लिए मजबूर करती हैं।
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शासकीय एवं अनुदानित कॉलेज में नियमित कक्षाएं संचालित होती हैं, साथ ही कम शुल्क लिया जाता है। हर कोई चाहता है कि कम खर्च में बेहतर शिक्षा प्राप्त हो, इससे छात्रों में प्रवेश पाने की होड़ रहती है।
डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री, विभागाध्यक्ष संस्कृत नेमवि
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देश में बुंदेलखंड अन्य राज्यों के मुकाबले काफी पिछड़ा है। इसमें ललितपुर जिले की स्थिति और भी दयनीय है। उद्योग शून्यता के कारण अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर हैं। इससे लोगों की आय सीमित है। इस कारण तमाम अभिभावक शिक्षा पर ज्यादा खर्च करने से बचते हैं। वहीं, छात्र भी कम खर्च में बेहतर शिक्षा पाने के लिए उत्सुक रहते हैं। जब प्रवेश की बारी आती है तो वह शासकीय एवं अनुदानित विद्यालयों में आवेदन करते हैं। जब इन विद्यालयों में छात्रों को मायूसी हाथ लगती है, तब जाकर तमाम छात्र निजी विद्यालयों की ओर रुख करते हैं। पिछले वर्ष जिले के नेहरू महाविद्यालय में करीब 11 हजार छात्रों ने प्रवेश के लिए पंजीकरण कराया था जबकि यहां 972 सीटें ही उपलब्ध हैं। वहीं, राजकीय विद्यालयों में बीए, बीएससी व बीकॉम में 60-60 सीटें आवंटित हैं।
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मात्र 132 रुपये है बीए का शिक्षण शुल्क
नेहरू महाविद्यालय में बीए में शिक्षण शुल्क 132 रुपये है। इसके अलावा खेल, स्काउट, पत्रिका का शुल्क भी छात्रों से लिया जाता है। इस तरह पांच सौ रुपये के आसपास छात्र को शुल्क देना पड़ता है। वहीं, निजी विद्यालय छात्रों से बीए का शुल्क 5 हजार, बीएससी में 7500, एमए में 10 हजार रुपये के आसपास शुल्क लेते हैं जो हर अभिभावक नहीं दे पाता है।
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अनुमोदन के नाम पर होता खेल
कुछ निजी कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षक की जगह दूसरे से शिक्षण कार्य लिया जाता है। इस तरह छात्रों को बेहतर शिक्षा नहीं मिल पाती है। कई कॉलेजों में नियमित कक्षाओं का भी अभाव रहता है। इस तरह की परिस्थिति छात्रों को मुंह मोड़ने के लिए मजबूर करती हैं।
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शासकीय एवं अनुदानित कॉलेज में नियमित कक्षाएं संचालित होती हैं, साथ ही कम शुल्क लिया जाता है। हर कोई चाहता है कि कम खर्च में बेहतर शिक्षा प्राप्त हो, इससे छात्रों में प्रवेश पाने की होड़ रहती है।
डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री, विभागाध्यक्ष संस्कृत नेमवि