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Lalitpur News: भगवान ने पाया निर्वाण, विश्वशांति महायज्ञ में दी आहुतियां
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ललितपुर। दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में शनिवार को पंचकल्याणक महोत्सव में अंतिम दिन तीर्थंकर भगवान का मोक्षकल्याणक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस मौके पर जिनबिंब स्थापना की गई। रथयात्रा में जयकारे गूंजते रहे।
मुनि सुप्रभसागर महाराज, मुनि प्रणतसागर महाराज , मुनि सौम्य सागर महाराज, मुनि अनंग सागर के सानिध्य में मड़ावरा विकासखंड में स्थित अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में शनिवार को मोक्षकल्याणक की क्रियाएं की गईं। जिसमें प्रात: पात्र शुद्धि ,अभिषेक, शांतिधारा, नित्य महापूजन हुआ। तीर्थंकर भगवान को प्रात: मोक्ष की प्राप्ति हुई। तीर्थंकर भगवान के मोक्ष जाने की घोषणा प्रतिष्ठाचार्य ने की तो भक्तों ने जयकारे लगाए। आयोजन के अंतिम दिन विश्व शांति महायज्ञ में पूर्णाहुति दी गई।
इसके बाद रथयात्रा निकाली गई। जिसमें रथ पर श्रीजी विराजमान थे। रथों पर बैठे पंचकल्याणक के पात्र मंगलगान करते हुए चल रहे थे। परिक्रमा के बाद श्रीजी का अभिषेक विधि- विधान के साथ संपन्न हुआ। आयोजन में सौजना, लुहर्रा, नेकौरा, ललितपुर, मड़ावरा, महरौनी, टीकमगढ़ , सागर, बड़ागांव, घुवारा, शाहगढ़, छिंदवाड़ा,सौंरई, मैनवार, ककरवाहा, नेकौरा, तालबेहट, समर्रा आदि अनेक स्थानों से श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रतिष्ठा विधि विधान पंडित महेश जैन, प्राचार्य महेंद्र जैन मुरैना, पंडित अखिलेश जैन, पंडित राकेश जैन ने संपन्न कराया। इस मौके पर मुख्य संयोजक अजित खजुरिया, महोत्सव समिति के अध्यक्ष प्रकाश जैन, महामंत्री अशोक कपासिया, संयोजक राजेश रज्जू, राजू सौरया, स्वागत समिति के डॉ शिखरचंद सिलोनिया, डीके सराफ, आनंदी जैन, प्रचारमंत्री डॉ. सुनील संचय, प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शिखरचंद जैन, डॉ श्रेयांस जैन, डॉ विजय जैन, पलाश, राकेश जैन, जिनेंद्र जैन, संतोष जैन मौजूद रहे।
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मोक्ष का अर्थ है आठ कर्मों से मुक्ति : मुनि सुप्रभ सागर
मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि वास्तव में मोक्ष गमन जैन दर्शन के चिंतन की चरमोत्कृष्ट आस्था है जो प्रत्येक हृदय में फलित होना चाहिए। मोक्ष गमन को देखना इस निश्चय को दोहराना है कि जीवन के सभी कार्य तब तक सफल नहीं कहे जा सकते जब तक उसका अंतिम लक्ष्य मोक्षगमन न हो। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर भगवान कषाय, काय से रहित हुए, अभी हम इन दोनों से युक्त हैं। उन्होंने कहा कि मोक्ष का अर्थ है आठ कर्मों से मुक्ति। जैन दर्शन के अनुसार मोक्ष प्राप्त करने के बाद जीव जन्म मरण के चक्र से निकल जाता है।
मुनिसंघ का गुढ़ा के लिए हुआ पद विहार
प्रचारमंत्री डॉ सुनील संचय ने बताया कि मुनि सुप्रभ सागर महाराज ससंघ का पद विहार शनिवार को पंचकल्याणक महोत्सव संपन्न होने के बाद हो गया। शनिवार को रात्रि विश्राम ग्राम पंडाखेरा में होने के बाद रविवार को प्रात: गुढ़ा में मंगल अगवानी होगी। रविवार को श्री दिगंबर जैन मंदिर गुढ़ा में मुनि संघ के सानिध्य में चर्या शिरोमणि श्रमणाचार्य विशुद्धसागर महाराज का जन्म दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा। साथ ही 19 दिसंबर सोमवार को आठ वर्ष से ऊपर के अविवाहित बच्चों के उपनयन संस्कार किए जाएंगे।
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मुनि सुप्रभसागर महाराज, मुनि प्रणतसागर महाराज , मुनि सौम्य सागर महाराज, मुनि अनंग सागर के सानिध्य में मड़ावरा विकासखंड में स्थित अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में शनिवार को मोक्षकल्याणक की क्रियाएं की गईं। जिसमें प्रात: पात्र शुद्धि ,अभिषेक, शांतिधारा, नित्य महापूजन हुआ। तीर्थंकर भगवान को प्रात: मोक्ष की प्राप्ति हुई। तीर्थंकर भगवान के मोक्ष जाने की घोषणा प्रतिष्ठाचार्य ने की तो भक्तों ने जयकारे लगाए। आयोजन के अंतिम दिन विश्व शांति महायज्ञ में पूर्णाहुति दी गई।
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इसके बाद रथयात्रा निकाली गई। जिसमें रथ पर श्रीजी विराजमान थे। रथों पर बैठे पंचकल्याणक के पात्र मंगलगान करते हुए चल रहे थे। परिक्रमा के बाद श्रीजी का अभिषेक विधि- विधान के साथ संपन्न हुआ। आयोजन में सौजना, लुहर्रा, नेकौरा, ललितपुर, मड़ावरा, महरौनी, टीकमगढ़ , सागर, बड़ागांव, घुवारा, शाहगढ़, छिंदवाड़ा,सौंरई, मैनवार, ककरवाहा, नेकौरा, तालबेहट, समर्रा आदि अनेक स्थानों से श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रतिष्ठा विधि विधान पंडित महेश जैन, प्राचार्य महेंद्र जैन मुरैना, पंडित अखिलेश जैन, पंडित राकेश जैन ने संपन्न कराया। इस मौके पर मुख्य संयोजक अजित खजुरिया, महोत्सव समिति के अध्यक्ष प्रकाश जैन, महामंत्री अशोक कपासिया, संयोजक राजेश रज्जू, राजू सौरया, स्वागत समिति के डॉ शिखरचंद सिलोनिया, डीके सराफ, आनंदी जैन, प्रचारमंत्री डॉ. सुनील संचय, प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शिखरचंद जैन, डॉ श्रेयांस जैन, डॉ विजय जैन, पलाश, राकेश जैन, जिनेंद्र जैन, संतोष जैन मौजूद रहे।
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मोक्ष का अर्थ है आठ कर्मों से मुक्ति : मुनि सुप्रभ सागर
मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि वास्तव में मोक्ष गमन जैन दर्शन के चिंतन की चरमोत्कृष्ट आस्था है जो प्रत्येक हृदय में फलित होना चाहिए। मोक्ष गमन को देखना इस निश्चय को दोहराना है कि जीवन के सभी कार्य तब तक सफल नहीं कहे जा सकते जब तक उसका अंतिम लक्ष्य मोक्षगमन न हो। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर भगवान कषाय, काय से रहित हुए, अभी हम इन दोनों से युक्त हैं। उन्होंने कहा कि मोक्ष का अर्थ है आठ कर्मों से मुक्ति। जैन दर्शन के अनुसार मोक्ष प्राप्त करने के बाद जीव जन्म मरण के चक्र से निकल जाता है।
मुनिसंघ का गुढ़ा के लिए हुआ पद विहार
प्रचारमंत्री डॉ सुनील संचय ने बताया कि मुनि सुप्रभ सागर महाराज ससंघ का पद विहार शनिवार को पंचकल्याणक महोत्सव संपन्न होने के बाद हो गया। शनिवार को रात्रि विश्राम ग्राम पंडाखेरा में होने के बाद रविवार को प्रात: गुढ़ा में मंगल अगवानी होगी। रविवार को श्री दिगंबर जैन मंदिर गुढ़ा में मुनि संघ के सानिध्य में चर्या शिरोमणि श्रमणाचार्य विशुद्धसागर महाराज का जन्म दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा। साथ ही 19 दिसंबर सोमवार को आठ वर्ष से ऊपर के अविवाहित बच्चों के उपनयन संस्कार किए जाएंगे।